वैदिक मंत्र · माँ लक्ष्मी
श्री सूक्तम्
Shri Suktam
संस्कृत (देवनागरी)
हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह
रोमन लिपि
Hiranyavarnam Harinim Suvarna-Rajata-Srajam Chandram Hiranmayim Lakshmim Jatavedo Ma Avaha
अर्थ
हे जातवेद (अग्निदेव, देवताओं को आहुति ले जाने वाले), मेरे पास स्वर्णिम वर्ण वाली, हरे रंग की (ताजी वनस्पति जैसी), सोने-चाँदी की माला पहनी, चंद्रमा के समान तेजस्वी, और स्वर्णिम दीप्ति वाली लक्ष्मी माँ को लाओ।
अंतिम अपडेट: 20 अप्रैल 2026 · पारंपरिक वैदिक मंत्र
श्री सूक्तम् के लाभ
- ·श्री सूक्तम् (ऋग्वेद के 15 श्लोक) सबसे प्राचीन धन आह्वान मंत्र है
- ·वैदिक उत्पत्ति के कारण वैदिक साधकों के लिए लक्ष्मी मंत्र से अधिक शक्तिशाली
- ·अग्नि (अग्नि) के माध्यम से लक्ष्मी माँ की उपस्थिति का आह्वान — होम आदर्श अभ्यास
- ·भोर में दैनिक पाठ से स्थायी समृद्धि बनती है
- ·जन्म कुंडली में दरिद्र योग दूर होता है
- ·दीपावली लक्ष्मी पूजा में पारंपरिक रूप से श्री सूक्तम् पाठ शामिल है
जाप विधि
- 1.ब्रह्म मुहूर्त — सूर्योदय पर पूर्व दिशा में मुँह करके पढ़ें
- 2.श्री सूक्तम् होम के लिए: अग्नि में घी, कमल के बीज और लाल फूल आहुति दें
- 3.स्फटिक माला या कमल गट्टे की माला
- 4.पाठ करते समय लक्ष्मी माँ को कमल के फूल और लाल गुलाब अर्पित करें
- 5.श्री सूक्तम् के लिए शुक्रवार साप्ताहिक शुभ दिन है
- 6.दीपावली: पूर्ण धन आह्वान के लिए लक्ष्मी पूजा से पहले पढ़ें
जाप का सर्वोत्तम समय
शुक्रवार ब्रह्म मुहूर्त। दीपावली। अक्षय तृतीया। लक्ष्मी होरा के दौरान।
अनुशंसित जाप संख्या
पूरे 15 श्लोक: प्रतिदिन 1-3 बार। होम के लिए: प्रत्येक अनुष्ठान में एक बार।
सामान्य प्रश्न
प्र.श्री सूक्तम् और लक्ष्मी मंत्र में क्या अंतर है?
श्री सूक्तम् ऋग्वेद का 15 श्लोकों का पूर्ण सूक्त है — पुराना और पारंपरिक वैदिक साधकों द्वारा अधिक शक्तिशाली माना जाता है। लक्ष्मी मंत्र दैनिक अभ्यास के लिए एकल बीज मंत्र है।