वैदिक मंत्र · माँ लक्ष्मी
श्री सूक्तम्
Shri Suktam
संस्कृत (देवनागरी)
हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह
रोमन लिपि
Hiranyavarnam Harinim Suvarna-Rajata-Srajam Chandram Hiranmayim Lakshmim Jatavedo Ma Avaha
अर्थ
हे जातवेद (अग्निदेव, देवताओं को आहुति ले जाने वाले), मेरे पास स्वर्णिम वर्ण वाली, हरे रंग की (ताजी वनस्पति जैसी), सोने-चाँदी की माला पहनी, चंद्रमा के समान तेजस्वी, और स्वर्णिम दीप्ति वाली लक्ष्मी माँ को लाओ।
अंतिम अपडेट: 13 जून 2026 · पारंपरिक वैदिक मंत्र
श्री सूक्तम् के लाभ
- ·श्री सूक्तम् (ऋग्वेद के 15 श्लोक) सबसे प्राचीन धन आह्वान मंत्र है
- ·वैदिक उत्पत्ति के कारण वैदिक साधकों के लिए लक्ष्मी मंत्र से अधिक शक्तिशाली
- ·अग्नि (अग्नि) के माध्यम से लक्ष्मी माँ की उपस्थिति का आह्वान, होम आदर्श अभ्यास
- ·भोर में दैनिक पाठ से स्थायी समृद्धि बनती है
- ·जन्म कुंडली में दरिद्र योग दूर होता है
- ·दीपावली लक्ष्मी पूजा में पारंपरिक रूप से श्री सूक्तम् पाठ शामिल है
जाप विधि
- 1.ब्रह्म मुहूर्त, सूर्योदय पर पूर्व दिशा में मुँह करके पढ़ें
- 2.श्री सूक्तम् होम के लिए: अग्नि में घी, कमल के बीज और लाल फूल आहुति दें
- 3.स्फटिक माला या कमल गट्टे की माला
- 4.पाठ करते समय लक्ष्मी माँ को कमल के फूल और लाल गुलाब अर्पित करें
- 5.श्री सूक्तम् के लिए शुक्रवार साप्ताहिक शुभ दिन है
- 6.दीपावली: पूर्ण धन आह्वान के लिए लक्ष्मी पूजा से पहले पढ़ें
जाप का सर्वोत्तम समय
शुक्रवार ब्रह्म मुहूर्त। दीपावली। अक्षय तृतीया। लक्ष्मी होरा के दौरान।
अनुशंसित जाप संख्या
पूरे 15 श्लोक: प्रतिदिन 1-3 बार। होम के लिए: प्रत्येक अनुष्ठान में एक बार।
सामान्य प्रश्न
प्र.श्री सूक्तम् और लक्ष्मी मंत्र में क्या अंतर है?
श्री सूक्तम् ऋग्वेद का 15 श्लोकों का पूर्ण सूक्त है, पुराना और पारंपरिक वैदिक साधकों द्वारा अधिक शक्तिशाली माना जाता है। लक्ष्मी मंत्र दैनिक अभ्यास के लिए एकल बीज मंत्र है।