वैदिक मंत्र · माँ लक्ष्मी
लक्ष्मी गायत्री मंत्र
Lakshmi Gayatri Mantra
प्रकारवैदिक मंत्र
देवतामाँ लक्ष्मी
अक्षर24
संस्कृत (देवनागरी)
ॐ महादेव्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्
रोमन लिपि
Om Mahadevyai Cha Vidmahe Vishnupatnyai Cha Dhimahi Tanno Lakshmih Prachodayat
अर्थ
हम महादेवी को जानते हैं, विष्णु पत्नी का ध्यान करते हैं, माँ लक्ष्मी हमें प्रेरित और प्रकाशित करें।
अंतिम अपडेट: 22 मई 2026 · पारंपरिक वैदिक मंत्र
लक्ष्मी गायत्री मंत्र के लाभ
- ·धन, सौंदर्य और समृद्धि के लिए लक्ष्मी माँ की दैवीय कृपा का आह्वान
- ·लक्ष्मी बीज मंत्र से अधिक सात्विक, कट्टर वैष्णवों के लिए उपयुक्त
- ·कुंडली में शुक्र और बृहस्पति मजबूत होते हैं
- ·जन्म कुंडली में दरिद्र योग और वित्तीय अवरोध दूर होते हैं
- ·लक्ष्मी माँ के आशीर्वाद के लिए दैनिक प्रातः अभ्यास के लिए आदर्श
- ·शुक्रवार और दीपावली के दौरान विशेष रूप से शक्तिशाली
जाप विधि
- 1.शुक्रवार प्रातः, लक्ष्मी माँ का पवित्र दिन
- 2.कमल के फूल, सफेद फूल और पीली मिठाई अर्पित करें
- 3.उत्तर दिशा में मुँह करें (कुबेर की दिशा, धन उत्तर से आता है)
- 4.स्फटिक माला या कमल गट्टे की माला
- 5.हल्दी या केसर युक्त घी का दीपक जलाएँ
- 6.दीपावली में: शाम से आधी रात तक 1008 बार जपें
जाप का सर्वोत्तम समय
शुक्रवार प्रातः। दीपावली। पूर्णिमा। शुक्र होरा के दौरान।
अनुशंसित जाप संख्या
प्रतिदिन 108 बार। दीपावली: 1008 बार। पुरश्चरण: 1,25,000 जाप।
सामान्य प्रश्न
प्र.लक्ष्मी गायत्री और लक्ष्मी बीज मंत्र में कौन सा जपें?
दैनिक सात्विक अभ्यास के लिए लक्ष्मी गायत्री। तीव्र धन आकर्षण, शुक्रवार और दीपावली के लिए लक्ष्मी बीज मंत्र। दोनों एक ही देवी को आमंत्रित करते हैं।