क्षेत्रीय त्योहार — हिंदू पवित्र उत्सव
स्कंद षष्ठी
संक्षिप्त परिचय
स्कंद षष्ठी भगवान मुरुगन (स्कंद/कार्तिकेय) — शिव-पार्वती के पुत्र और देवसेना के सेनापति — के सम्मान में छह दिवसीय उत्सव है। यह असुर सूरपद्मन पर मुरुगन की विजय का उत्सव है जो छह दिनों के युद्ध के बाद षष्ठी को अपने दिव्य वेल (भाले) से सम्पन्न हुई। यह त्योहार तमिलनाडु और विश्वभर के तमिल समुदायों में सबसे भव्य रूप से मनाया जाता है।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
महत्व
दैवीय शक्ति की आसुरी शक्तियों पर विजय का उत्सव। स्कंद षष्ठी पर मुरुगन की पूजा से शत्रुओं (बाह्य एवं आंतरिक — अहंकार, कामना और क्रोध जो असुर के प्रतीक हैं) का नाश होता है। इससे विजय, साहस, बुद्धि और बुराई से रक्षा मिलती है।
अनुष्ठान और परंपराएं
सात्विक आहार या पूर्ण उपवास के साथ छह-दिवसीय कावड़ी व्रत रखें। प्रतिदिन मुरुगन मंदिर जाएं। कंद षष्ठी कवचम् (रक्षात्मक स्तोत्र) का पाठ करें। षष्ठी के दिन: भव्य मंदिर शोभायात्रा, कावड़ी वहन, कुछ भक्तों द्वारा कठोर तपस्या। वेल, फूल और नारियल चढ़ाएं। अंतिम दिन प्रसाद से व्रत तोड़ें।
पारंपरिक व्यंजन
सामान्य प्रश्न
प्र.स्कंद षष्ठी क्या है?
स्कंद षष्ठी भगवान मुरुगन (स्कंद/कार्तिकेय) — शिव-पार्वती के पुत्र और देवसेना के सेनापति — के सम्मान में छह दिवसीय उत्सव है। यह असुर सूरपद्मन पर मुरुगन की विजय का उत्सव है जो छह दिनों के युद्ध के बाद षष्ठी को अपने दिव्य वेल (भाले) से सम्पन्न हुई। यह त...
प्र.स्कंद षष्ठी का क्या महत्व है?
दैवीय शक्ति की आसुरी शक्तियों पर विजय का उत्सव। स्कंद षष्ठी पर मुरुगन की पूजा से शत्रुओं (बाह्य एवं आंतरिक — अहंकार, कामना और क्रोध जो असुर के प्रतीक हैं) का नाश होता है। इससे विजय, साहस, बुद्धि और बुराई से रक्षा मिलती है।
प्र.स्कंद षष्ठी के अनुष्ठान क्या हैं?
सात्विक आहार या पूर्ण उपवास के साथ छह-दिवसीय कावड़ी व्रत रखें। प्रतिदिन मुरुगन मंदिर जाएं। कंद षष्ठी कवचम् (रक्षात्मक स्तोत्र) का पाठ करें। षष्ठी के दिन: भव्य मंदिर शोभायात्रा, कावड़ी वहन, कुछ भक्तों द्वारा कठोर तपस्या। वेल, फूल और नारियल चढ़ाएं। अंतिम दिन प्रसाद से व्रत तोड़ें।
प्र.स्कंद षष्ठी में कौन से व्यंजन बनते हैं?
पोंगल, इडली, वड़ा, पंचामृत, नारियल प्रसाद, फल