क्षेत्रीय त्योहार — हिंदू पवित्र उत्सव
शीतला सप्तमी
संक्षिप्त परिचय
शीतला सप्तमी (शीतला अष्टमी या बसोड़ा भी कहलाती है) चैत्र के कृष्ण पक्ष की सप्तमी या अष्टमी को, होली के लगभग एक सप्ताह बाद, मनाई जाती है। यह माँ शीतला (शीतल देवी) को समर्पित है — जो चेचक, छोटी माता, खसरे और बुखार से रक्षा करती हैं। इस दिन घर में आग नहीं जलाई जाती; सारा खाना एक दिन पहले पकाकर ठंडा खाया जाता है (बसोड़ा)।
अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
महत्व
शीतला देवी संक्रामक रोगों — विशेषकर त्वचा विस्फोट और बुखार — से रक्षक हैं। बसोड़ा (ठंडे भोजन का) अनुष्ठान लोक महामारी विज्ञान का एक रूप है — गर्मी के महीनों में जब संक्रमण बढ़ता है, ठंडे और संयमित भोजन से उसका सामना किया जाता है।
अनुष्ठान और परंपराएं
एक दिन पहले (शीतला षष्ठी) सारा खाना पकाएं। सप्तमी/अष्टमी पर आग न जलाएं। दही, चावल, रोली और ठंडे पानी से घर या मंदिर में शीतला माता की पूजा करें। देवी को बासी भोजन अर्पित करें। सुबह स्नान करके माता के पास भेंट लेकर जाएं। दिन भर पहले का पका ठंडा खाना (बसोड़ा) खाएं।
पारंपरिक व्यंजन
सामान्य प्रश्न
प्र.शीतला सप्तमी क्या है?
शीतला सप्तमी (शीतला अष्टमी या बसोड़ा भी कहलाती है) चैत्र के कृष्ण पक्ष की सप्तमी या अष्टमी को, होली के लगभग एक सप्ताह बाद, मनाई जाती है। यह माँ शीतला (शीतल देवी) को समर्पित है — जो चेचक, छोटी माता, खसरे और बुखार से रक्षा करती हैं। इस दिन घर में आग नह...
प्र.शीतला सप्तमी का क्या महत्व है?
शीतला देवी संक्रामक रोगों — विशेषकर त्वचा विस्फोट और बुखार — से रक्षक हैं। बसोड़ा (ठंडे भोजन का) अनुष्ठान लोक महामारी विज्ञान का एक रूप है — गर्मी के महीनों में जब संक्रमण बढ़ता है, ठंडे और संयमित भोजन से उसका सामना किया जाता है।
प्र.शीतला सप्तमी के अनुष्ठान क्या हैं?
एक दिन पहले (शीतला षष्ठी) सारा खाना पकाएं। सप्तमी/अष्टमी पर आग न जलाएं। दही, चावल, रोली और ठंडे पानी से घर या मंदिर में शीतला माता की पूजा करें। देवी को बासी भोजन अर्पित करें। सुबह स्नान करके माता के पास भेंट लेकर जाएं। दिन भर पहले का पका ठंडा खाना (बसोड़ा) खाएं।
प्र.शीतला सप्तमी में कौन से व्यंजन बनते हैं?
बसोड़ा (पिछले दिन का ठंडा बासी खाना), दही चावल, हलवा (पिछले दिन पका), पूरी (पिछले दिन पकी), रबड़ी