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वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना

पूर्णिमा त्योहार — हिंदू पवित्र उत्सव

शरद पूर्णिमा

देवता भगवान कृष्ण, देवी राधा, चंद्र देव
माह आश्विन पूर्णिमा (अक्टूबर)
क्षेत्र वृंदावन, मथुरा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान

संक्षिप्त परिचय

शरद पूर्णिमा शरद ऋतु की पूर्णिमा है, जो उत्तर और मध्य भारत में भगवान कृष्ण के प्रति विशेष श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। इसे रास पूर्णिमा भी कहते हैं, क्योंकि इसी रात कृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ दिव्य रास लीला की थी।

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

महत्व

शरद पूर्णिमा कृष्ण की महा रास लीला की रात है — जो जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस रात चंद्रमा षोडश कला सम्पूर्ण माना जाता है।

अनुष्ठान और परंपराएं

वृंदावन, मथुरा और ब्रज क्षेत्र में रात भर रास लीला का आयोजन। खीर को चाँदनी में रखें और आधी रात को ग्रहण करें। रास पंचाध्यायी का पाठ करें। कृष्ण को तुलसी और फूल अर्पित करें।

पारंपरिक व्यंजन

खीरपंचामृतपंजीरीमिश्रीमखाना प्रसाद

सामान्य प्रश्न

प्र.शरद पूर्णिमा क्या है?

शरद पूर्णिमा शरद ऋतु की पूर्णिमा है, जो उत्तर और मध्य भारत में भगवान कृष्ण के प्रति विशेष श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। इसे रास पूर्णिमा भी कहते हैं, क्योंकि इसी रात कृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ दिव्य रास लीला की थी।

प्र.शरद पूर्णिमा का क्या महत्व है?

शरद पूर्णिमा कृष्ण की महा रास लीला की रात है — जो जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस रात चंद्रमा षोडश कला सम्पूर्ण माना जाता है।

प्र.शरद पूर्णिमा के अनुष्ठान क्या हैं?

वृंदावन, मथुरा और ब्रज क्षेत्र में रात भर रास लीला का आयोजन। खीर को चाँदनी में रखें और आधी रात को ग्रहण करें। रास पंचाध्यायी का पाठ करें। कृष्ण को तुलसी और फूल अर्पित करें।

प्र.शरद पूर्णिमा में कौन से व्यंजन बनते हैं?

खीर, पंचामृत, पंजीरी, मिश्री, मखाना प्रसाद

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