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वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना

पूर्णिमा त्योहार — हिंदू पवित्र उत्सव

कोजागिरी पूर्णिमा

देवता देवी लक्ष्मी, चंद्र देव
माह आश्विन पूर्णिमा (अक्टूबर)
क्षेत्र महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश

संक्षिप्त परिचय

कोजागिरी पूर्णिमा आश्विन माह की पूर्णिमा की रात है, जो मुख्यतः महाराष्ट्र और पूरे भारत में मनाई जाती है। "कोजागिरी" संस्कृत के "को जागर्ति?" से आया है — किंवदंती के अनुसार, देवी लक्ष्मी इस रात पृथ्वी पर उतरती हैं और जागने वालों को आशीर्वाद देती हैं।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

महत्व

यह पूर्णिमा वर्ष की सबसे प्रकाशमान मानी जाती है और देवी लक्ष्मी की रात्रि भ्रमण से जुड़ी है। इस रात चंद्रमा की किरणें अमृत किरण मानी जाती हैं।

अनुष्ठान और परंपराएं

खीर (केसर और मेवे वाली चावल की खीर) को चाँदनी में रखें। रात भर जागें और भजन गाएं। देवी लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा करें। आधी रात को चंद्र-आहूत खीर ग्रहण करें। दीप और अगरबत्ती जलाएं।

पारंपरिक व्यंजन

खीरपोहानारियल मोदकपंचामृतमखाना

सामान्य प्रश्न

प्र.कोजागिरी पूर्णिमा क्या है?

कोजागिरी पूर्णिमा आश्विन माह की पूर्णिमा की रात है, जो मुख्यतः महाराष्ट्र और पूरे भारत में मनाई जाती है। "कोजागिरी" संस्कृत के "को जागर्ति?" से आया है — किंवदंती के अनुसार, देवी लक्ष्मी इस रात पृथ्वी पर उतरती हैं और जागने वालों को आशीर्वाद देती हैं।

प्र.कोजागिरी पूर्णिमा का क्या महत्व है?

यह पूर्णिमा वर्ष की सबसे प्रकाशमान मानी जाती है और देवी लक्ष्मी की रात्रि भ्रमण से जुड़ी है। इस रात चंद्रमा की किरणें अमृत किरण मानी जाती हैं।

प्र.कोजागिरी पूर्णिमा के अनुष्ठान क्या हैं?

खीर (केसर और मेवे वाली चावल की खीर) को चाँदनी में रखें। रात भर जागें और भजन गाएं। देवी लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा करें। आधी रात को चंद्र-आहूत खीर ग्रहण करें। दीप और अगरबत्ती जलाएं।

प्र.कोजागिरी पूर्णिमा में कौन से व्यंजन बनते हैं?

खीर, पोहा, नारियल मोदक, पंचामृत, मखाना

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