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ग्रह युति · वृश्चिक · Vrishchika · वैदिक ज्योतिष

वृश्चिक-वृषभ राहु-केतु अक्ष, ग्रहण अक्ष

संक्षिप्त उत्तर

वृश्चिक में राहु, वृषभ में केतु: गूढ़ गहराई की ओर खिंचाव, भौतिक स्थिरता से वैराग्य।

अंतिम अपडेट: 30 अप्रैल 2026 · स्रोत: बृहत्पाराशर होरा शास्त्र · फलदीपिका

राहु-केतु गणितीय रूप से विपरीत हैं। वृश्चिक-वृषभ अक्ष का कर्म भार समान है पर उल्टा खिंचाव।

ग्रहण अक्ष (वृश्चिक में राहु, वृषभ में केतु)

वृश्चिक में राहु शक्तिशाली माना जाता है। वृषभ में केतु भौतिक संचय से वैराग्य।

काल सर्प योग विचार

संकट के माध्यम से नाटकीय परिवर्तन।

कर्म पाठ

रूपांतरण के लिए पुराने का समर्पण आवश्यक है।

वृश्चिक में प्रभाव

  1. 1.वृश्चिक में राहु गूढ़ ज्ञान की भूख बढ़ाता है।
  2. 2.वृषभ में केतु भौतिक संचय से वैराग्य।
  3. 3.संकट की ओर आकर्षण।
  4. 4.काल सर्प योग पर नाटकीय परिवर्तन।
  5. 5.गूढ़ वंश से कर्म।

उपाय

  • दोनों नोडल मंत्रों का तीव्र जाप।
  • गुप्त वंश पर ध्यान देकर पितृ तर्पण।
  • शिव मंदिर में जल अर्पण।
  • गोमेद-लहसुनिया के लिए विशेष सावधानी।

सामान्य प्रश्न

प्र.क्या वृश्चिक में राहु शुभ है?

अक्सर तुलनात्मक रूप से सहज माना जाता है।

प्र.क्या वृषभ में केतु भौतिक हानि है?

अक्सर भौतिक संचय से संतुष्टि की कमी होती है।

सभी राशियों में राहु-केतु युति