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ग्रह युति · कर्क · Karka · वैदिक ज्योतिष

कर्क राशि में मंगल-केतु युति, जल में नीच योद्धा

संक्षिप्त उत्तर

कर्क में मंगल नीच है, और केतु से जुड़कर यह सबसे चुनौतीपूर्ण मंगल-केतु स्थानों में से एक है। मंगल की अग्नि जल में डूब जाती है।

अंतिम अपडेट: 30 अप्रैल 2026 · स्रोत: बृहत्पाराशर होरा शास्त्र · फलदीपिका

कर्क में मंगल-केतु इस संयोजन के अधिक कठिन स्थानों में से एक है। मंगल कर्क में शास्त्रीय रूप से नीच है, और केतु पहले से कमजोर योद्धा को और विरक्ति देता है।

लेकिन जो सांसारिक शब्दों में कमजोरी प्रतीत होती है वह आध्यात्मिक गहराई बन सकती है।

भावनात्मक वापसी और अचानक क्रोध

जातक भावनात्मक संवेदनशीलता से क्रोध दबाता है, फिर अचानक विस्फोट का अनुभव करता है। पारिवारिक संघर्ष सामान्य है।

आध्यात्मिक चिकित्सक का मार्ग

उचित रूप से काम करने पर यह उल्लेखनीय चिकित्सक उत्पन्न करता है।

स्वास्थ्य चिंताएं

कर्क छाती और पेट पर शासन करता है। पाचन सूजन और तनाव-संबंधी स्थितियां।

कर्क में प्रभाव

  1. 1.दबी योद्धा ऊर्जा अचानक विस्फोट करती है।
  2. 2.भावनात्मक वापसी और तीखा क्रोध।
  3. 3.आध्यात्मिक चिकित्सक की प्रबल संभावना।
  4. 4.पाचन सूजन, छाती की समस्याएं।
  5. 5.गृह विघटन की संभावना।

उपाय

  • मंगलवार हनुमान चालीसा अनिवार्य।
  • गणेश पूजा और जप।
  • महामृत्युंजय मंत्र।
  • माता की सेवा। मूंगा बिल्कुल वर्जित बिना ज्योतिषी अनुमति के।

सामान्य प्रश्न

प्र.क्या यह बुरा स्थान है?

चुनौतीपूर्ण लेकिन उचित उपायों से उल्लेखनीय चिकित्सक उत्पन्न कर सकता है।

प्र.क्या मूंगा पहनना चाहिए?

नहीं, बिना ज्योतिषी परामर्श के कभी नहीं। नीच मंगल को मजबूत करना उल्टा पड़ सकता है।

सभी राशियों में मंगल-केतु युति