माँ वैष्णो देवी · भक्ति स्तोत्र
वैष्णो देवी चालीसा
Vaishno Devi Chalisa
वैष्णो देवी चालीसा जम्मू के त्रिकूट पर्वत की पवित्र गुफा में विराजमान लक्ष्मी, सरस्वती और काली की त्रिशक्ति स्वरूपा माँ वैष्णो देवी की भक्ति स्तुति है। पाठ से सभी सच्ची मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और पवित्र तीर्थयात्रा के समतुल्य आशीर्वाद मिलता है।
अंतिम अपडेट: 14 जून 2026 · पारंपरिक वैदिक भक्ति ग्रंथ
वैष्णो देवी चालीसा के लाभ
- ·सभी सच्ची इच्छाओं और हार्दिक प्रार्थनाओं की पूर्ति
- ·लक्ष्मी (धन), सरस्वती (ज्ञान) और काली (सुरक्षा) का संयुक्त त्रिगुण आशीर्वाद
- ·वैष्णो देवी तीर्थयात्रा पूर्ण करने के समतुल्य आध्यात्मिक पुण्य
- ·जीवन की सभी परिस्थितियों में सुरक्षा, समृद्धि और दिव्य कृपा
- ·भक्ति और आध्यात्मिक प्रगति के मार्ग में बाधाओं का निवारण
- ·कठिन समय में मन की शांति और आस्था की दृढ़ता
पाठ का सर्वोत्तम समय
नवरात्रि, अष्टमी और वैष्णो देवी यात्रा की योजना बनाते या लौटते समय। परंपरागत रूप से शुक्रवार की शाम शुभ है।
वैष्णो देवी चालीसा, संपूर्ण पाठ
॥ श्री वैष्णो देवी चालीसा ॥
दोहा
जय माँ वैष्णो त्रिकूट-धाम, कटरा में जो विराज। लक्ष्मी-सरस्वती-काली एक, तुम्हीं हो देवी साज॥ भक्त चलें पैदल पथ पर, माँ बुलाए द्वार। वैष्णो दर्शन होते ही, जीवन हो उद्धार॥
॥ 1 ॥
जय माँ वैष्णो त्रिशक्ति-स्वरूपा। त्रिकूट पर्वत दिव्य अनूपा॥
॥ 2 ॥
कटरा धाम से यात्रा चलती। भक्त की थकान सब हरती॥
॥ 3 ॥
बाण-गंगा में स्नान कराओ। चरण-पखारन का सुख पाओ॥
॥ 4 ॥
अर्धकुँवारी गुफा में माता। नौ माह के गर्भ की दाता॥
॥ 5 ॥
भैरव-भूमि से होकर जाओ। भैरोनाथ के दर्शन पाओ॥
॥ 6 ॥
पवित्र गुफा में तीन पिंडी। लक्ष्मी-सरस्वती-काली अखंडी॥
॥ 7 ॥
श्रीधर भक्त ने पहले पाया। माँ वैष्णो का दर्शन आया॥
॥ 8 ॥
पाण्डवों ने भी यहाँ आकर। शक्ति-पूजा की थकान हर॥
॥ 9 ॥
भैरों से माँ ने छुपाई थी। पर्वत में शरण ली थी माई॥
॥ 10 ॥
भैरों का वध कर माँ ने की। कृपा-दृष्टि भक्तों पर दी॥
॥ 11 ॥
जय माता दी का जयकारा। त्रिकूट पर्वत पर उजियारा॥
॥ 12 ॥
चुनरी लाल चढ़ाओ माई को। नारियल और बताशे लाओ भाई को॥
॥ 13 ॥
पंजाब-हरियाणा से भक्त आते। दूर-दूर से दर्शन पाते॥
॥ 14 ॥
हेलिकॉप्टर हो या पैदल जाओ। माँ का दर्शन सबको मिल जाओ॥
॥ 15 ॥
नवरात्रि में भीड़ लगे भारी। पर माँ करे सबकी पुकारी॥
॥ 16 ॥
दर्शन मिलते जब माँ बुलाए। भक्त का भाग्य जब जाग जाए॥
॥ 17 ॥
लक्ष्मी-रूप में धन दिलाती। सरस्वती-रूप में विद्या लाती॥
॥ 18 ॥
काली-रूप में शत्रु नशाती। तीनों रूपों में वर पाती॥
॥ 19 ॥
यात्रा करने की जो मन्नत माने। माँ उसे घर बैठे पहचाने॥
॥ 20 ॥
इस चालीसे का पाठ जो करे। यात्रा का पुण्य घर बैठे भरे॥
॥ 21 ॥
अष्टमी-नवमी को पाठ करो। माँ के चरणों में ध्यान धरो॥
॥ 22 ॥
विवाह-मनोकामना जो लावे। माँ वैष्णो उसे वर पावे॥
॥ 23 ॥
संतान-प्राप्ति की करे जो आस। माँ करे पूरी उसकी प्यास॥
॥ 24 ॥
रोग-पीड़ित जो दर्शन पावे। निरोग होकर वापस जावे॥
॥ 25 ॥
ऋण-संकट में जो माँ को ध्याए। धन-संपत्ति माँ दिलवाए॥
॥ 26 ॥
परीक्षा में जो सफलता माँगे। माँ की कृपा से आगे भागे॥
॥ 27 ॥
त्रिकूट-धाम का ध्यान लगाओ। माँ के दर्शन मन में पाओ॥
॥ 28 ॥
आरती सुबह-शाम जो गाए। माँ उसे अपने पास बुलाए॥
॥ 29 ॥
भक्त-वत्सल माँ की लीला न्यारी। सदा करती सब पर रखवारी॥
॥ 30 ॥
माँ की गुफा में ज्योति जले। भक्त को मार्ग सदा मिले॥
॥ 31 ॥
हर हर गंगे की जय गाओ। माँ वैष्णो के दर्शन पाओ॥
॥ 32 ॥
जम्मू-कश्मीर की शान हो माई। सारे भारत की लाज बचाई॥
॥ 33 ॥
विध्न-बाधा और दुख-कलेश। माँ वैष्णो हरे सब क्लेश॥
॥ 34 ॥
पाप-ताप और कर्म-दोष। माँ की कृपा से हो मोक्ष॥
॥ 35 ॥
शत्रु-नाश और न्याय दिलाओ। माँ वैष्णो कृपा बरसाओ॥
॥ 36 ॥
भक्त जो आवे खाली हाथ। माँ भरती है उसका हाथ॥
॥ 37 ॥
जय माता दी की जय-जयकार। त्रिकूट-धाम में हो दर्शन-द्वार॥
॥ 38 ॥
माँ वैष्णो की भक्ति जो करे। जीवन के दुख सब दूर हरे॥
॥ 39 ॥
जय माता दी बोलो जोर से। पाओ आशीष माँ के ओर से॥
॥ 40 ॥
यह चालीसा माँ की गाऊँ। वैष्णो चरणों में शीश नवाऊँ॥
दोहा
वैष्णो देवी चालीसा, पढ़े जो नित्य सुबह। यात्रा का फल घर मिले, हो जीवन में लाभ॥
सामान्य प्रश्न
प्र.माँ वैष्णो देवी कौन हैं?
माँ वैष्णो देवी आदि शक्ति (आद्य देवी) का वह स्वरूप हैं जो लक्ष्मी, सरस्वती और काली की संयुक्त शक्ति को धारण करती हैं। वे जम्मू के कटरा के पास त्रिकूट पर्वत की प्राकृतिक गुफा में विराजमान हैं। 5,200 फीट ऊंचाई पर स्थित यह तीर्थ भारत के सर्वाधिक दर्शनीय स्थलों में से एक है।
प्र.क्या वैष्णो देवी चालीसा का पाठ शारीरिक यात्रा की जगह ले सकता है?
भक्ति परंपरा के अनुसार, सच्चे भाव से वैष्णो देवी चालीसा का पाठ यात्रा के समतुल्य आध्यात्मिक पुण्य देता है। कहा जाता है कि यात्रा तब होती है "जब माँ बुलाए"। जो लोग शारीरिक यात्रा नहीं कर सकते, उनके लिए चालीसा मानसिक यात्रा का माध्यम है।
प्र.वैष्णो देवी गुफा में तीन पिंडियों का क्या महत्व है?
पवित्र गुफा में तीन प्राकृतिक शिलाखंड (पिंडी) माँ वैष्णो देवी के तीन रूपों का प्रतिनिधित्व करते हैं: महाकाली (बाएं), महालक्ष्मी (मध्य) और महासरस्वती (दाएं)। मिलकर वे संपूर्ण दैवीय स्त्रीशक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं।
प्र."जय माता दी" का क्या अर्थ है?
"जय माता दी" का अर्थ है "माँ की जय हो"। यह वैष्णो देवी तीर्थयात्रियों की पारंपरिक अभिवादन और रणजयध्वनि है, जिसे कटरा से गुफा तक के 14 किमी के ट्रेकिंग मार्ग पर बार-बार जपा जाता है।