श्री गणेश जी · भक्ति स्तोत्र
गणेश चालीसा
Ganesh Chalisa
गणेश चालीसा विघ्नहर्ता और नई शुरुआत के देवता श्री गणेश जी को समर्पित 40 चौपाइयों की स्तुति है। वैदिक परंपरा में कोई भी शुभ कार्य गणेश पूजन के बिना आरंभ नहीं होता। यह चालीसा सफलता सुनिश्चित करती है, बाधाएँ दूर करती है और ज्ञान व समृद्धि प्रदान करती है।
अंतिम अपडेट: 19 अप्रैल 2026 · पारंपरिक वैदिक भक्ति ग्रंथ
गणेश चालीसा के लाभ
- ·किसी भी नए कार्य से पहले सभी बाधाओं का निवारण
- ·शिक्षा, परीक्षा और बौद्धिक कार्यों में सफलता
- ·बुद्धि, ज्ञान और तीव्र स्मृति
- ·व्यापार में सफलता और आर्थिक समृद्धि
- ·विवाह, गृह प्रवेश और मांगलिक कार्यों में शुभ आरंभ
- ·यात्रा के दौरान सुरक्षा
पाठ का सर्वोत्तम समय
बुधवार (गणेश का दिन), चतुर्थी (महीने का चौथा दिन), गणेश चतुर्थी और कोई भी नया कार्य या यात्रा शुरू करने से पहले।
गणेश चालीसा — संपूर्ण पाठ
॥ श्री गणेश चालीसा ॥
दोहा
जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल। विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥
॥ 1 ॥
जय जय जय गणपति गणराजू। मंगल भरण करण शुभ काजू॥
॥ 2 ॥
जय गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायक बुद्धि विधाता॥
॥ 3 ॥
वक्र तुंड शुचि शुंड सुहावन। तिलक त्रिपुंड भाल मन भावन॥
॥ 4 ॥
राजत मणि मुक्तन उर माला। स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥
॥ 5 ॥
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं। मोदक भोग सुगंध फूलं॥
॥ 6 ॥
सुंदर पीतांबर तन साजित। चरण पादुका मुनि मन राजित॥
॥ 7 ॥
धनि शिव सुवन षडानन भ्राता। गौरी लालन विश्व-विख्याता॥
॥ 8 ॥
ऋद्धि सिद्धि तव चँवर सुधारें। मूषक वाहन सोहत द्वारें॥
॥ 9 ॥
कहौं जन्म शुभ कथा तुम्हारी। अति शुचि पावन मंगलकारी॥
॥ 10 ॥
एक समय गिरिराज कुमारी। पुत्र हेतु तप कीन्हो भारी॥
॥ 11 ॥
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा। तब पहुँच्यो तुम धरि द्विज रूपा॥
॥ 12 ॥
अतिथि जानि कैं गौरि सुखारी। बहु विधि सेवा करी तुम्हारी॥
॥ 13 ॥
अति प्रसन्न ह्वैं तुम वर दीन्हा। मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥
॥ 14 ॥
मिलहिं पुत्र तुहि बुद्धि विशाला। बिना गर्भ धारण यहि काला॥
॥ 15 ॥
गणनायक गुण ज्ञान निधाना। पूजित प्रथम रूप भगवाना॥
॥ 16 ॥
अस कहि अंतर्धान रूप ह्वैं। पल में मातु गोद ह्वैं॥
॥ 17 ॥
गिरिजा खण्ड हर्षित गई। माँगत वर पाई॥
॥ 18 ॥
पार्वती तब मन हर्षाई। मूर्ति देखि मन अति सुखपाई॥
॥ 19 ॥
सहस्र दल कमल ले आवा। पूजन को सब साज सजावा॥
॥ 20 ॥
विघ्न हरण मंगल करन। जय जय गिरिजा लाल॥
॥ 21 ॥
शिव सुवन श्री गणेश महाराज। सर्वसिद्धि दायक है आज॥
॥ 22 ॥
पुत्र हेतु पार्वती रोई। भई प्रसन्न मनसा पूरी होई॥
॥ 23 ॥
नाम गणेश शंभु सुत जानो। सकल सिद्धि को तुम दो मानो॥
॥ 24 ॥
अस तव नाम जपे मन माहीं। सब बाधा विघ्न नाहीं॥
॥ 25 ॥
संकट काटे मिटे सब पीरा। जो सुमिरे गणपति बलवीरा॥
॥ 26 ॥
जय जय गणपति जय गणराजा। तुम्हारी भक्ति करूँ नित काजा॥
॥ 27 ॥
बुद्धि परीक्षा जो लेवे कोई। विघ्नेश्वर की कृपा होई॥
॥ 28 ॥
रिद्धि सिद्धि के तुम हो दाता। जन की पीड़ा दूर हटाता॥
॥ 29 ॥
जो यह चालीसा पढ़े नित्य। होय सिद्धि और सुख नित्य॥
॥ 30 ॥
भक्त जनों का कष्ट निवारो। गणपति बप्पा मोरया पुकारो॥
॥ 31 ॥
मंगलमूर्ति मोरया सुखकारी। जन की विपदा काटो भारी॥
॥ 32 ॥
कोई भी काम गणेश का नाम लेकर। होय सफल वो सब दुःख हटाकर॥
॥ 33 ॥
विद्यार्थी जो गणेश को ध्याये। परीक्षा में वो सफलता पाए॥
॥ 34 ॥
व्यापारी भजे गणेश महाराज। व्यापार में होय सब काज॥
॥ 35 ॥
नव विवाहित जो गणेश पूजे। दाम्पत्य जीवन का हर सुख भोगे॥
॥ 36 ॥
जय जय जय गणपति गणराजा। पूर्ण करो प्रभु मेरी अभिलाषा॥
॥ 37 ॥
गणेश चालीसा जो पढ़े नित्य। उसके घर में सुख हो नित्य॥
॥ 38 ॥
श्री गणेश की यह महिमा भारी। करती जन की विपदा उतारी॥
॥ 39 ॥
बुद्धि विवेक और शक्ति दाता। जन जन के मन की तुम ज्ञाता॥
॥ 40 ॥
गणपति बप्पा मोरया मंगलमूर्ति मोरया। जीवन में सदा सुख और समृद्धि मोरया॥
दोहा
जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल। विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥
सामान्य प्रश्न
प्र.गणेश को सभी देवताओं से पहले क्यों पूजा जाता है?
श्री गणेश नई शुरुआत के देवता और विघ्नहर्ता हैं। वैदिक परंपरा में बिना गणेश पूजन के शुरू किया गया कोई भी कार्य बाधित हो सकता है। वे प्रथमेश हैं और सुनिश्चित करते हैं कि सभी अन्य प्रार्थनाओं की ऊर्जा अपने गंतव्य तक पहुँचे।
प्र.गणेश चालीसा पढ़ने का सबसे अच्छा समय कब है?
बुधवार गणेश का दिन है और सर्वाधिक शुभ। प्रत्येक माह की चतुर्थी, विशेषकर गणेश चतुर्थी (अगस्त/सितंबर), अत्यंत शुभ है। कोई भी नया कार्य, परीक्षा, व्यापार या यात्रा शुरू करने से पहले पाठ करें।