श्री हनुमान जी · भक्ति स्तोत्र
हनुमान चालीसा
Hanuman Chalisa
हनुमान चालीसा 16वीं शताब्दी में तुलसीदास द्वारा रचित 40 चौपाइयों की भक्ति-स्तुति है। यह शक्ति, भक्ति और रक्षा के देवता श्री हनुमान जी की स्तुति है। हिंदू धर्म में सर्वाधिक पाठ किया जाने वाला यह स्तोत्र बुरी शक्तियों से रक्षा, बल प्राप्ति और दिव्य सुरक्षा के लिए पढ़ा जाता है।
अंतिम अपडेट: 19 अप्रैल 2026 · पारंपरिक वैदिक भक्ति ग्रंथ
हनुमान चालीसा के लाभ
- ·बुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा
- ·कठिन समय में शक्ति, साहस और आत्मविश्वास
- ·बाधाओं का निवारण और कार्यों में सफलता
- ·शनि दोष से मुक्ति
- ·स्वास्थ्य, दीर्घायु और शारीरिक स्फूर्ति
- ·मानसिक स्पष्टता और भय-चिंता से मुक्ति
पाठ का सर्वोत्तम समय
मंगलवार और शनिवार की सुबह, या प्रतिदिन सूर्योदय और सूर्यास्त के समय। हनुमान जयंती पर पाठ विशेष फलदायी है।
हनुमान चालीसा — संपूर्ण पाठ
॥ श्री हनुमान चालीसा ॥
दोहा
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥
॥ 1 ॥
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥
॥ 2 ॥
रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥
॥ 3 ॥
महावीर विक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥
॥ 4 ॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥
॥ 5 ॥
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥
॥ 6 ॥
शंकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बंदन॥
॥ 7 ॥
विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥
॥ 8 ॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥
॥ 9 ॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥
॥ 10 ॥
भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज सँवारे॥
॥ 11 ॥
लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥
॥ 12 ॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥
॥ 13 ॥
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥
॥ 14 ॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥
॥ 15 ॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥
॥ 16 ॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राजपद दीन्हा॥
॥ 17 ॥
तुम्हरो मंत्र विभीषण माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना॥
॥ 18 ॥
जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥
॥ 19 ॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥
॥ 20 ॥
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥
॥ 21 ॥
राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥
॥ 22 ॥
सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना॥
॥ 23 ॥
आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै॥
॥ 24 ॥
भूत पिशाच निकट नहिं आवै। महावीर जब नाम सुनावै॥
॥ 25 ॥
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
॥ 26 ॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥
॥ 27 ॥
सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥
॥ 28 ॥
और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै॥
॥ 29 ॥
चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥
॥ 30 ॥
साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥
॥ 31 ॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥
॥ 32 ॥
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥
॥ 33 ॥
तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥
॥ 34 ॥
अंत काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥
॥ 35 ॥
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेई सर्ब सुख करई॥
॥ 36 ॥
संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
॥ 37 ॥
जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥
॥ 38 ॥
जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥
॥ 39 ॥
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
॥ 40 ॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मँह डेरा॥
दोहा
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
सामान्य प्रश्न
प्र.हनुमान चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?
प्रतिदिन एक बार पाठ करना आदर्श है। विशेष मनोकामना या कठिन समय में 7, 11 या 108 बार पाठ की सलाह दी जाती है। मंगलवार और शनिवार को एक बार भी पाठ करने से विशेष लाभ होता है।
प्र.हनुमान चालीसा किसने लिखी?
हनुमान चालीसा की रचना संत तुलसीदास (1532–1623 ई.) ने की थी, जिन्होंने रामचरितमानस भी लिखा। यह अवधी भाषा में है और इसमें 40 चौपाइयाँ एवं 2 दोहे हैं।
प्र.हनुमान चालीसा पढ़ने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
सर्वोत्तम समय ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4–6 बजे) और सूर्यास्त है। मंगलवार और शनिवार हनुमान पूजा के लिए विशेष शुभ हैं। हनुमान जयंती पर पाठ का सर्वाधिक फल मिलता है।
प्र.क्या हनुमान चालीसा काले जादू से बचाती है?
वैदिक परंपरा में हनुमान चालीसा सर्वशक्तिमान रक्षा-कवच है। 24वीं चौपाई में स्पष्ट है: "भूत पिशाच निकट नहिं आवै। महावीर जब नाम सुनावै।" — अर्थात हनुमान का नाम लेते ही कोई भी बुरी शक्ति पास नहीं आती।