माँ दुर्गा · भक्ति स्तोत्र
दुर्गा चालीसा
Durga Chalisa
दुर्गा चालीसा माँ दुर्गा को समर्पित 40 चौपाइयों की भक्ति-स्तुति है। विशेष रूप से नवरात्रि में पढ़ी जाने वाली यह स्तुति माँ के नौ रूपों का आह्वान करती है। यह शक्ति प्रदान करती है, भय दूर करती है और सच्चे भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करती है।
अंतिम अपडेट: 19 अप्रैल 2026 · पारंपरिक वैदिक भक्ति ग्रंथ
दुर्गा चालीसा के लाभ
- ·समस्त बुराइयों और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा
- ·विपरीत परिस्थितियों में शक्ति और साहस
- ·सच्ची मनोकामनाओं की पूर्ति
- ·दीर्घकालिक रोग से मुक्ति
- ·परीक्षा, करियर और सृजनात्मक कार्यों में सफलता
- ·समृद्धि और पारिवारिक सुख का आशीर्वाद
पाठ का सर्वोत्तम समय
नवरात्रि के दौरान (विशेषकर अष्टमी-नवमी), शुक्रवार की सुबह और प्रतिदिन सूर्योदय पर। लगातार 9 दिन पाठ करने से अत्यधिक लाभ।
दुर्गा चालीसा — संपूर्ण पाठ
॥ श्री दुर्गा चालीसा ॥
दोहा
नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूँ लोक फैली उजियारी॥
॥ 1 ॥
शिव शक्ति आह्वाहन तुम्हारा। अचरज ये जग में उजियारा॥
॥ 2 ॥
ब्रह्मा विष्णु महेश बखाने। तुम बिन अघटित कछु न जाने॥
॥ 3 ॥
तुम भर्त्री हो जगत की माता। जग को सदा तुम ही देती दाता॥
॥ 4 ॥
शैलपुत्री नाम तुम्हारा। प्रथम दुर्गा का है उजियारा॥
॥ 5 ॥
ब्रह्मचारिणी दूज का नाम। तप से सिद्ध जो करे तमाम काम॥
॥ 6 ॥
चंद्रघंटा तृतीया माता। शत्रु नाशिनी सुख की दाता॥
॥ 7 ॥
कूष्मांडा चतुर्थ स्वरूप। ब्रह्मांड बनाया अपने अनूप॥
॥ 8 ॥
पंचम स्कंदमाता तुम कहाई। सकल सिद्धि दाती जगत माई॥
॥ 9 ॥
षष्ठम कात्यायनी कल्याणी। जगत जननी जय शुभ वरदानी॥
॥ 10 ॥
सप्तम कालरात्रि महारानी। शत्रु नाश करे अभिमानी॥
॥ 11 ॥
महागौरी अष्टम की माता। पाप नाशिनी सुख की दाता॥
॥ 12 ॥
नवम सिद्धिदात्री जग जानी। दीन बंधु माँ भवानी॥
॥ 13 ॥
महिषासुर मर्दिनी स्तुति। जगत तारिणी सदा प्रभुति॥
॥ 14 ॥
तुमने रक्त बीज संहारा। असुर दल को किया निष्कारा॥
॥ 15 ॥
शुंभ निशुंभ किए खंड खंड। जगत माता तुम हो अखंड॥
॥ 16 ॥
भक्त जनों की रक्षा करती। जग में तुम ही जय जय भरती॥
॥ 17 ॥
जो कोई तुमको ध्यान लगाए। दुःख दरिद्र ताके मिट जाए॥
॥ 18 ॥
जो तुम्हारा यश गावे कोई। सब सुख सम्पदा पावे सोई॥
॥ 19 ॥
दुर्गे पूजन जो कोई करता। सो नर पावन होकर तरता॥
॥ 20 ॥
माँ की महिमा अपरम्पार। कहाँ तक करूँ जय जयकार॥
॥ 21 ॥
नवरात्रि में पूजा करते। भवसागर से तुम ही तरते॥
॥ 22 ॥
जय जय माँ जगदम्बे भवानी। करो कृपा तुम मेरी रानी॥
॥ 23 ॥
भक्ति भाव से जो शीश नवाए। माँ के दर पर नित्य आए॥
॥ 24 ॥
माँ की ध्वजा अम्बर में फहराए। सत्य सनातन धर्म बचाए॥
॥ 25 ॥
रिद्धि सिद्धि और नव निधि दाती। संकट हरती जग की माती॥
॥ 26 ॥
जो कोई माँ को मन से ध्याए। सभी मनोरथ पूर्ण पाए॥
॥ 27 ॥
माँ का नाम जगत उजियारा। तुमसे ही है जग का सहारा॥
॥ 28 ॥
संकट काटे माँ की माया। भक्त जनों पर करे दया॥
॥ 29 ॥
जो यह चालीसा पढ़े नित्य। होय सिद्धि पाए सुख नित्य॥
॥ 30 ॥
माँ दुर्गा की है यह वाणी। दुःख हरती है जन की मानी॥
॥ 31 ॥
चौंसठ योगिनी माँ के संगा। नाचें गावें करें उमंगा॥
॥ 32 ॥
भैरव वीर माँ के द्वारपाल। रक्षा करते दिन और काल॥
॥ 33 ॥
माँ के दर्शन जो कोई पाए। सभी पाप उसके मिट जाए॥
॥ 34 ॥
तुम हो जगत की करुणा खान। सबका करो माँ कल्याण॥
॥ 35 ॥
भक्त जनों की विनती सुनती। माँ दुर्गा जग की जन्मदात्री॥
॥ 36 ॥
जय अम्बे जय जगदम्बे माता। जय जय माँ दुर्गा जग में विख्याता॥
॥ 37 ॥
तुम्हारी महिमा है अपार। करो भक्त जन पर उपकार॥
॥ 38 ॥
जो यह पाठ करे चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
॥ 39 ॥
दुर्गा चालीसा पढ़े जो कोई। सब विघ्न बाधा दूर होई॥
॥ 40 ॥
माँ का नाम सदा मन में धारो। जीवन सफल और सुखी बनाओ॥
दोहा
माँ दुर्गे की यह चालीसा। करे सिद्धि गौरीसा। जो नित पाठ करे मन लाई। उसकी रक्षा करे माँ आई॥
सामान्य प्रश्न
प्र.दुर्गा चालीसा कब पढ़नी चाहिए?
दुर्गा चालीसा नवरात्रि में विशेष रूप से पढ़नी चाहिए, खासकर अष्टमी और नवमी को। शुक्रवार की सुबह भी शुभ है। वर्षभर प्रतिदिन सूर्योदय पर पाठ लाभकारी है।
प्र.दुर्गा चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?
प्रतिदिन एक बार आदर्श है। नवरात्रि के नौ दिन 9 बार पाठ अत्यंत फलदायी है। तत्काल मनोकामना पूर्ति के लिए एक बैठक में 108 बार पाठ की सलाह दी जाती है।
प्र.दुर्गा चालीसा में माँ के कौन से नौ रूपों का वर्णन है?
नवदुर्गा के नौ रूप हैं: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। दुर्गा चालीसा में सभी का आह्वान है।