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वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना

भगवान शिव · भक्ति स्तोत्र

शिव चालीसा

Shiv Chalisa

देवताभगवान शिव
श्लोक40 चौपाइयाँ
भाषाहिंदी (देवनागरी)

शिव चालीसा भगवान शिव को समर्पित 40 चौपाइयों की स्तुति है। विशेष रूप से सोमवार, महाशिवरात्रि और सावन में पाठ से मोक्ष, रोग निवारण और मनोकामना पूर्ति होती है।

अंतिम अपडेट: 13 मई 2026 · पारंपरिक वैदिक भक्ति ग्रंथ

शिव चालीसा के लाभ

  • ·जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति
  • ·गंभीर और दीर्घकालिक रोग निवारण
  • ·बुरी शक्तियों और नकारात्मक कर्मों से रक्षा
  • ·गहरी मनोकामनाओं की पूर्ति

पाठ का सर्वोत्तम समय

सोमवार की सुबह, सावन माह (जुलाई–अगस्त), महाशिवरात्रि और प्रदोष काल।

शिव चालीसा, संपूर्ण पाठ

॥ श्री शिव चालीसा ॥

दोहा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

1

जय गिरिजापति दीनदयाला। सदा करत संतन प्रतिपाला॥

2

भाल चंद्रमा सोहत नीके। कानन कुंडल नागफनी के॥

3

अंग गौर शिर गंग बहाये। मुंडमाल तन क्षार लगाये॥

4

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥

5

मैना मातु की हवे दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥

6

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥

7

नंदि गणेश सोहैं तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥

8

कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥

9

देवन जबहीं जाय पुकारा। तब-तब दुख प्रभु आप निवारा॥

10

किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥

11

तुरत षडानन आप पठायो। लव-निमेष में मारि गिरायो॥

12

आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

13

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥

14

किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तिनकी पारी॥

15

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥

16

वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

17

प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला। जरत सुरासुर भये विहाला॥

18

कीन्ही दया तहँ करि सहाई। नीलकंठ तब नाम कहाई॥

19

पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंका विभीषण दीन्हा॥

20

सहस कमल मिन पूजन कीन्हा। कीन्ह परीक्षा शिवजी लीन्हा॥

21

एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चह सोई॥

22

कठिन भक्ति देखि प्रभु शंकर। भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥

23

जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घट वासी॥

24

दुष्ट सकल नित मोहिं सतावै। भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥

25

त्राहि-त्राहि मैं नाथ पुकारो। येहि अवसर मोहि आन उबारो॥

26

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥

27

मातु पिता भ्राता सब होई। संकट में पूछत नहिं कोई॥

28

स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥

29

धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जाँचे सो फल पाहीं॥

30

अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥

31

शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥

32

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। शारद नारद शीश नवावैं॥

33

नमो नमो जय नमः शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥

34

जो यह पाठ करे मन लाई। ता पर होत है शम्भु सहाई॥

35

ऋनिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥

36

पुत्र हीन इच्छा जो कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥

37

पंडित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे॥

38

त्रयोदशी व्रत करे हमेशा। तन नहिं ताहि रहे कलेशा॥

39

धूप-दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर-सम्मुख पाठ सुनावे॥

40

जन्म जन्म के पाप नसावे। अंत धाम शिवपुर में पावे॥

दोहा

कहे अयोध्यादास आस तुम्हारी। जानि सकल दुख हरहु हमारी॥

सामान्य प्रश्न

प्र.शिव चालीसा के क्या लाभ हैं?

शिव चालीसा जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति, गंभीर रोग निवारण, बुरी शक्तियों से रक्षा और सच्ची मनोकामनाओं की पूर्ति करती है। सोमवार और सावन माह में नियमित पाठ विशेष फलदायी होता है।

प्र.शिव चालीसा पाठ का सबसे अच्छा समय कब है?

सोमवार की सुबह, सावन माह, महाशिवरात्रि और प्रदोष काल (त्रयोदशी की संध्या) शिव चालीसा पाठ के लिए सबसे शुभ समय हैं।

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