भगवान सूर्य देव · भक्ति स्तोत्र
सूर्य चालीसा
Surya Chalisa
सूर्य चालीसा समस्त ब्रह्मांड की आत्मा, भगवान सूर्य देव को समर्पित 40 चौपाइयों की स्तुति है। सूर्योदय के समय पूर्व दिशा में मुँह करके पाठ से उत्तम स्वास्थ्य, ऊर्जा, तीव्र दृष्टि, आत्मविश्वास और सांसारिक कार्यों में सफलता मिलती है।
अंतिम अपडेट: 14 जून 2026 · पारंपरिक वैदिक भक्ति ग्रंथ
सूर्य चालीसा के लाभ
- ·उज्ज्वल स्वास्थ्य, ऊर्जा और मजबूत प्रतिरक्षा तंत्र
- ·तीव्र दृष्टि और नेत्र रोगों से राहत
- ·आत्मविश्वास, नेतृत्व गुण और करियर में सफलता
- ·चर्मरोग और दीर्घकालिक बीमारियों से राहत
- ·जन्मकुंडली में सूर्य दोष का निवारण
- ·मानसिक स्पष्टता और अज्ञान-अंधकार का नाश
पाठ का सर्वोत्तम समय
प्रतिदिन सूर्योदय के समय पूर्व दिशा में मुँह करके। रविवार की सुबह विशेष फलदायी। छठ पूजा और मकर संक्रांति पर विशेष महत्व।
सूर्य चालीसा, संपूर्ण पाठ
॥ श्री सूर्य चालीसा ॥
दोहा
कनक बदन कुंडल मकर, मुकुट मणि माल। अंध-तिमिर को हरत प्रभु, भक्त करो निहाल॥ सूर्य देव की वंदना, करूँ मैं बारम्बार। कृपा करो हे भास्कर, उर में करो विस्तार॥
॥ 1 ॥
जय जय जय सूर्य भगवाना। सकल जगत के तुम हो प्राणा॥
॥ 2 ॥
आदित्य तुम हो जग के स्वामी। प्रकाश से तुम जगत के नामी॥
॥ 3 ॥
सप्ताश्व रथ पर सवार आओ। सात रंगों से जग चमकाओ॥
॥ 4 ॥
उदय होत दिन होत सवेरा। प्रकाश फैले चहुँ दिश घेरा॥
॥ 5 ॥
ब्रह्मा विष्णु महेश तुम्हारे। तीनों देव तुम्हें मन प्यारे॥
॥ 6 ॥
भानु तुम्हीं हो दिवाकर नामा। सूर्य नारायण पूर्ण काम॥
॥ 7 ॥
सहस्र किरण से जग को नहलाओ। तम-अंधकार को दूर भगाओ॥
॥ 8 ॥
अरुण सारथी रथ जब चलाते। देव-दानव सब शीश नवाते॥
॥ 9 ॥
नेत्र रोग हरो प्रभु मेरे। दृष्टि दो स्वच्छ बनाओ घेरे॥
॥ 10 ॥
चर्म रोग से मुक्ति दिलाओ। निरोग काया मोहि दिलाओ॥
॥ 11 ॥
सूर्य दोष को दूर भगाओ। कुंडली में शुभ फल दिलाओ॥
॥ 12 ॥
प्रत्यक्ष देव तुम्हीं जग माहीं। दूसरा कोई तुम सम नाहीं॥
॥ 13 ॥
अर्घ्य चढ़ाऊँ जल से तेरा। प्रसन्न होओ प्रभु मेरा॥
॥ 14 ॥
आयुष्य बल बुद्धि वर देओ। भक्त जनों पर कृपा करो॥
॥ 15 ॥
विश्वकर्मा के पिता कहाओ। विश्वरूप तुम जग में छाओ॥
॥ 16 ॥
यम धर्मराज तुम्हारे पुत्र। सत्य न्याय के हो तुम सूत्र॥
॥ 17 ॥
कर्ण के पिता महान कहाओ। दानवीर-गुण जग में फैलाओ॥
॥ 18 ॥
सुग्रीव पुष्पक राम सखाई। सूर्य-पुत्र यश सब जग गाई॥
॥ 19 ॥
ऋग्वेद में तुम्हारा गान। सूर्य सूक्त में तुम्हारा मान॥
॥ 20 ॥
गायत्री मंत्र तुम्हारा ध्यान। त्रिकाल संध्या तुम्हारा ज्ञान॥
॥ 21 ॥
उच्च राशि मेष तुम्हारी। सिंह भवन की शोभा प्यारी॥
॥ 22 ॥
आत्माकारक तुम ग्रह राजा। नवग्रहों में तुम ही साजा॥
॥ 23 ॥
रविवार व्रत जो करे भाई। सूर्य कृपा उस पर सदाई॥
॥ 24 ॥
तांबे के पात्र से अर्घ्य दो। लाल पुष्प और चंदन लो॥
॥ 25 ॥
आदित्य हृदय स्तोत्र पढ़ाया। अगस्त्य मुनि ने राम सिखाया॥
॥ 26 ॥
लंका-विजय से पूर्व सवेरे। सूर्य उपासना राम ने घेरे॥
॥ 27 ॥
छठ पूजा में तुम्हें मनाएं। व्रती निर्जला खड़े रहाएं॥
॥ 28 ॥
मकर संक्रांति पर्व तुम्हारा। फसल-धान का उत्सव प्यारा॥
॥ 29 ॥
रथ-सप्तमी पर पूजा होवे। जन्म-कुंडली दोष खोवे॥
॥ 30 ॥
सूर्य नमस्कार बारह करें। शरीर और मन को बल भरें॥
॥ 31 ॥
प्राण शक्ति का तुम हो स्रोत। जीवन का तुम ही हो ज्योत॥
॥ 32 ॥
अन्न-जल और वायु सजाओ। प्राणीमात्र को जीवन दाओ॥
॥ 33 ॥
वैद्यनाथ धन्वंतरि जैसे। रोग-नाश करते हो वैसे॥
॥ 34 ॥
राजयोग और यश दिलाओ। कीर्ति पताका जग में लाओ॥
॥ 35 ॥
पितृ दोष को दूर भगाओ। पूर्वजों को सद्गति दिलाओ॥
॥ 36 ॥
सूर्य स्तुति जो नित्य करे। दारिद्र्य संकट सब हरे॥
॥ 37 ॥
बुद्धि यश बल विद्या देओ। सकल मनोरथ पूर्ण करो॥
॥ 38 ॥
पाप-ताप और दुख मिटाओ। भक्त को सुख-समृद्धि पाओ॥
॥ 39 ॥
जो नित सूर्य चालीसा पढ़े। सूर्य कृपा उस पर सदा बढ़े॥
॥ 40 ॥
यह चालीसा सूर्य की गाऊँ। सूर्य चरण में शीश नवाऊँ॥
दोहा
सूर्य चालीसा जो पढ़े, करे सूर्य का ध्यान। रोग-दोष सब नाश हो, मिले यश और मान॥
सामान्य प्रश्न
प्र.सूर्य चालीसा के क्या लाभ हैं?
सूर्य चालीसा उज्ज्वल स्वास्थ्य, ऊर्जा और तीव्र दृष्टि प्रदान करती है। यह जन्मकुंडली से सूर्य दोष हटाती है, चर्मरोग दूर करती है और करियर में सफलता, नेतृत्व गुण तथा मानसिक स्पष्टता देती है।
प्र.सूर्य चालीसा पाठ का सबसे अच्छा समय कब है?
आदर्श समय सूर्योदय के समय, स्नान के बाद, पूर्व दिशा में मुँह करके है। रविवार विशेष शुभ है। छठ पूजा, मकर संक्रांति और रथ सप्तमी पर पाठ विशेष फलदायी है।
प्र.सूर्य चालीसा नेत्र रोगों में कैसे सहायक है?
वैदिक ज्योतिष में भगवान सूर्य दृष्टि के कारक हैं। सूर्य चालीसा की 9-10वीं चौपाई नेत्र स्वास्थ्य के लिए उनकी कृपा का आह्वान करती है। उगते सूर्य को जल अर्पण के साथ नियमित पाठ नेत्र रोगों के लिए पारंपरिक वैदिक उपाय है।
प्र.सूर्य चालीसा और गायत्री मंत्र में क्या संबंध है?
सूर्य चालीसा और गायत्री मंत्र दोनों ही दिव्य प्रकाश और ज्ञान के स्रोत सूर्य की प्रार्थनाएं हैं। गायत्री मंत्र सौर बुद्धि (सवितुर) का आह्वान करता है, जबकि चालीसा सूर्य के अनेक रूपों और गुणों की स्तुति करती है।