भगवान शनि देव · भक्ति स्तोत्र
शनि चालीसा
Shani Chalisa
शनि चालीसा राशिचक्र के कर्मफल न्यायाधीश और सूर्यपुत्र भगवान शनि देव की शक्तिशाली 40 चौपाइयों की स्तुति है। शनिवार को पाठ से साढ़ेसाती, शनि ढैया और समस्त शनि दोषों की शांति होती है, बाधाएं दूर होती हैं और न्याय, अनुशासन व दीर्घकालिक स्थिरता मिलती है।
अंतिम अपडेट: 21 मई 2026 · पारंपरिक वैदिक भक्ति ग्रंथ
शनि चालीसा के लाभ
- ·साढ़ेसाती और शनि ढैया के दोषों से राहत
- ·करियर में बाधाओं, विलंब और व्यावसायिक असफलता से मुक्ति
- ·कानूनी मामलों, विवादों और न्यायालय के मामलों में न्याय
- ·अनुशासन, दृढ़ता और कार्यों में दीर्घकालिक सफलता
- ·दुर्घटनाओं, चोरी और अचानक आपदाओं से सुरक्षा
- ·कर्मिक पाठों की स्वीकृति के माध्यम से आध्यात्मिक विकास
पाठ का सर्वोत्तम समय
शनिवार, विशेष रूप से सूर्यास्त के समय या शाम को। शनि जयंती, अमावस्या और शनि प्रदोष पर विशेष।
शनि चालीसा, संपूर्ण पाठ
॥ श्री शनि चालीसा ॥
दोहा
जय गणेश गिरिजापति, जय सूर्यसुत शनिदेव। नमन करूँ मैं भक्त तव, देहु निर्भय वर देव॥ शनिदेव की चालीसा, जो पढ़े भक्ति के साथ। साढ़ेसाती शनिढैया, दूर हो सब आपात॥
॥ 1 ॥
जय जय शनिदेव दयाला। सूर्यपुत्र कृपा करो काला॥
॥ 2 ॥
छाया मातु के तुम हो पुत्र। कर्म न्याय के हो तुम सूत्र॥
॥ 3 ॥
नीलवर्ण तुम नीलांबर धारी। काले घोड़े पर सवारी॥
॥ 4 ॥
धनुष-बाण और त्रिशूल थामे। गिद्ध-वाहन पर तुम विराजे॥
॥ 5 ॥
मकर और कुंभ राशि तुम्हारी। कर्मफल देते न्याय अधिकारी॥
॥ 6 ॥
सप्त वर्ष साढ़े की आवत। भक्त तुम्हारे दुख न पावत॥
॥ 7 ॥
राम पर जब शनि की दृष्टि। लंका-विजय बनी दिव्य सृष्टि॥
॥ 8 ॥
नल-नील ने सेतु बनाया। शनि दशा में राम ने पाया॥
॥ 9 ॥
विक्रमादित्य पर परीक्षा आई। शनि दशा में खूब आजमाई॥
॥ 10 ॥
भक्ति-भाव से जिसने भजा। शनिदेव ने उसको सजा॥
॥ 11 ॥
तेल काले तिल शनि को चढ़ाओ। उड़द-दाल से प्रीति जताओ॥
॥ 12 ॥
शनि मंदिर में दीप जलाओ। नीले फूल अर्पण करो भाओ॥
॥ 13 ॥
शनिवार व्रत करे जो कोई। शनि कृपा उस पर सदा होई॥
॥ 14 ॥
हनुमान जी शनि को मनाएं। बजरंगबली शनि भय भगाएं॥
॥ 15 ॥
शनि-मंत्र का करे जप जोई। संकट-बाधा दूर उसकी होई॥
॥ 16 ॥
कर्म सुधारो नीति अपनाओ। शनि की कृपा तुम पर पाओ॥
॥ 17 ॥
न्यायप्रिय हो दूजों से व्यवहारा। शनिदेव करें तब उद्धारा॥
॥ 18 ॥
गरीब-दीन की करो सहाई। शनि-देव की मिले रजाई॥
॥ 19 ॥
अहंकार और झूठ त्यागो। शनि के क्रोध से तुम जागो॥
॥ 20 ॥
लोहे की वस्तु करे दान। शनि होते प्रसन्न महान॥
॥ 21 ॥
शनि ग्रह जब अस्त हो जाई। कार्य अटकते बाधा आई॥
॥ 22 ॥
शनि उच्च हो तुला भवन में। पुण्यफल मिले जीवन-आनन में॥
॥ 23 ॥
अष्टम शनि संकट भारी। चालीसा से हो उद्धारी॥
॥ 24 ॥
द्वादश भाव में जो शनि आवे। व्यय-हानि और रोग सतावे॥
॥ 25 ॥
शनि की दशा-महादशा में। चालीसा पढ़ो श्रद्धा-आशा में॥
॥ 26 ॥
पिपल-वृक्ष पर जल चढ़ाओ। शनिदेव को प्रसन्न बनाओ॥
॥ 27 ॥
शनि-स्तोत्र और शनि नाम। जपते रहो सुबह-ओ-शाम॥
॥ 28 ॥
नवग्रह में तुम श्रेष्ठ न्यायी। सबको देते कर्मफल भाई॥
॥ 29 ॥
क्रूर नहीं तुम दयावान हो। भक्त-कृपालु भगवान हो॥
॥ 30 ॥
जो तुमसे डरकर भाग जाए। वह और संकट में फंस जाए॥
॥ 31 ॥
जो तुमको प्रेम से अपनाए। शनिदेव उसे उठा ले जाए॥
॥ 32 ॥
संघर्ष में तुम ताकत देते। कठिन समय में साथ निभाते॥
॥ 33 ॥
धीरे-धीरे पर पक्का फल। शनि देते हैं जीवन बल॥
॥ 34 ॥
शनि की कृपा से बना नेता। भक्त बना भाग्य का विधेता॥
॥ 35 ॥
शनि अष्टोत्तर नाम पढ़ो। शनि-संकट से ऊपर उठो॥
॥ 36 ॥
रोग-शोक और ऋण हरो। भक्त को निर्भय तुम करो॥
॥ 37 ॥
मृत्यु-भय से रक्षा करो। काल के पाश से मुक्त करो॥
॥ 38 ॥
दशा-अंतर्दशा में पढ़े। शनि कृपा उस पर सदा चढ़े॥
॥ 39 ॥
जो शनि चालीसा गाए। शनिदेव उसे अपनाए॥
॥ 40 ॥
यह चालीसा भक्ति से पढ़ो। शनिदेव चरणों में सदा गड़ो॥
दोहा
शनि चालीसा नित पढ़े, शनिवार को करे स्नान। साढ़ेसाती दूर हो, मिले सुख-यश-सम्मान॥
सामान्य प्रश्न
प्र.साढ़ेसाती क्या है और शनि चालीसा कैसे मदद करती है?
साढ़ेसाती 7.5 वर्ष की वह अवधि है जब शनि आपकी चंद्र राशि से पहले, उस पर और बाद की राशि में भ्रमण करते हैं। इस दौरान शनिवार को शनि चालीसा का पाठ शनि देव को प्रसन्न करता है, कठिनाइयों की तीव्रता कम होती है और कर्मिक चुनौतियां आध्यात्मिक विकास में बदलती हैं।
प्र.शनि चालीसा पाठ का सबसे अच्छा समय कब है?
शनिवार का सूर्यास्त समय सबसे शुभ है, क्योंकि यह परंपरागत शनि प्रदोष काल है। शनि जयंती (ज्येष्ठ मास की अमावस्या), अमावस्या और शनि की दशा या साढ़ेसाती काल में पाठ विशेष फलदायी है।
प्र.शनि चालीसा पाठ के समय क्या चढ़ाएं?
भगवान शनि को काले तिल का तेल, उड़द दाल, नीले या काले फूल, लोहे की वस्तुएं और सरसों का तेल अर्पण किया जाता है। शनिवार को शनि मंदिर में या पीपल के पेड़ के नीचे तिल के तेल का दीपक जलाना अत्यंत प्रभावी माना जाता है।
प्र.क्या शनि एक पाप ग्रह हैं?
वैदिक ज्योतिष में शनि एक कर्म ग्रह हैं, स्वाभाविक रूप से पाप नहीं। वे पिछले कर्मों का फल, अच्छे और बुरे दोनों, देते हैं। अच्छे कर्म करने वालों के लिए शनि पुरस्कार और उन्नति लाते हैं। वे एक न्यायप्रिय और कड़क गुरु हैं जो सच्चे भक्तों को दीर्घकालिक स्थिरता और ज्ञान देते हैं।