नव दुर्गा (नौ दिव्य रूप) · भक्ति स्तोत्र
नवदुर्गा चालीसा
Navdurga Chalisa
नवदुर्गा चालीसा देवी दुर्गा के नौ रूपों, शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री, की स्तुति करती है। नवरात्रि में पाठ से संपूर्ण दैवीय स्त्री शक्ति का आह्वान होता है जो सुरक्षा, समृद्धि और मोक्ष देती है।
अंतिम अपडेट: 13 मई 2026 · पारंपरिक वैदिक भक्ति ग्रंथ
नवदुर्गा चालीसा के लाभ
- ·सभी प्रकार की बुराई और नकारात्मकता से संपूर्ण सुरक्षा
- ·एक प्रार्थना में सभी नौ देवियों का एक साथ आशीर्वाद
- ·जीवन के नौ क्षेत्रों में सफलता: स्वास्थ्य, धन, ज्ञान, प्रेम, साहस, शांति, शक्ति, भक्ति और मोक्ष
- ·दैवीय स्त्री ऊर्जा (शक्ति) और आंतरिक शक्ति
- ·नवगुणी कृपा से सभी सच्ची मनोकामनाओं की पूर्ति
- ·नौ रात्रि उपासना के माध्यम से आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष
पाठ का सर्वोत्तम समय
नवरात्रि (चैत्र और शारदीय) के दौरान, विशेष रूप से अष्टमी और नवमी को। नौ दिवसीय उत्सव में प्रतिदिन पाठ विशेष फलदायी है।
नवदुर्गा चालीसा, संपूर्ण पाठ
॥ श्री नवदुर्गा चालीसा ॥
दोहा
नव दुर्गा की वंदना, शैलपुत्री से आरंभ। सिद्धिदात्री पर समाप्त हो, जय शक्ति का प्रारंभ॥ नव देवी नव शक्ति का, करूँ मैं स्तुतिगान। नवरात्रि में पाठ से, मिले मुक्ति-कल्याण॥
॥ 1 ॥
जय शैलपुत्री पर्वतराज-सुता। वृषभ-वाहिनी त्रिशूलधारिणी माता॥
॥ 2 ॥
नवरात्रि प्रथम दिवस तुम्हारा। शिव-भार्या देवी अवतारा॥
॥ 3 ॥
जय ब्रह्मचारिणी तप की देवी। रुद्राक्ष-माल जप की सेवी॥
॥ 4 ॥
सहस्र वर्ष तप किया तुमने। शिव पति के लिए जन्म लिया तुमने॥
॥ 5 ॥
जय चंद्रघंटा चंद्रमा सोहे। घंटा-नाद से दानव मोहे॥
॥ 6 ॥
सिंह-वाहिनी दस-भुजाधारी। युद्धभूमि में करो उद्धारी॥
॥ 7 ॥
जय कूष्मांडा ब्रह्मांड-निर्माता। सूर्य-मंडल की हो तुम माता॥
॥ 8 ॥
अष्टभुजी तुम यज्ञ-स्वरूपा। सकल सृष्टि की हो तुम रूपा॥
॥ 9 ॥
जय स्कंदमाता कार्तिकेय-माई। कमल-पुष्प पर विराजी आई॥
॥ 10 ॥
पंचम दिवस नवरात्रि का। स्कंदमाता पूजन सुखदायका॥
॥ 11 ॥
जय कात्यायनी महिषासुर-मर्दिनी। षष्ठ दिवस की देवी अर्चिनी॥
॥ 12 ॥
कात्य ऋषि की पुत्री कहाई। सिंह-वाहिनी शस्त्र-धराई॥
॥ 13 ॥
जय कालरात्रि महाकाल-स्वरूपा। सप्तम दिवस की देवी अनूपा॥
॥ 14 ॥
गर्दभ-वाहिनी कृष्णवर्ण माई। भूत-पिशाच को दूर भगाई॥
॥ 15 ॥
जय महागौरी श्वेत-वर्णा। अष्टम दिवस की देवी पूर्णा॥
॥ 16 ॥
वृषभ-वाहिनी चार भुजाधारी। पाप-ताप हरो संसार की प्यारी॥
॥ 17 ॥
जय सिद्धिदात्री नवम शक्ति माई। सिद्धि-दायिनी सुर-नर-मुनि की माई॥
॥ 18 ॥
कमल-आसनी चार-भुजाधारी। सकल सिद्धि की देनेहारी॥
॥ 19 ॥
नव देवी नव शक्ति अपारा। नवरात्रि में करो उद्धारा॥
॥ 20 ॥
प्रथम दिवस शैलपुत्री पूजो। द्वितीय दिन ब्रह्मचारिणी भजो॥
॥ 21 ॥
तृतीय चंद्रघंटा को ध्याओ। चतुर्थ कूष्मांडा पद पाओ॥
॥ 22 ॥
पंचम स्कंदमाता मनाओ। षष्ठ कात्यायनी को बुलाओ॥
॥ 23 ॥
सप्तम कालरात्रि की शरण लो। अष्टम महागौरी का वर लो॥
॥ 24 ॥
नवम सिद्धिदात्री की पूजा। जीवन में नहिं रहे दूजा॥
॥ 25 ॥
नव रंग नव रूप नव शक्ति। नव दिन नव देवी की भक्ति॥
॥ 26 ॥
दुर्गा सप्तशती का पाठ। नवरात्रि में करे जो ठाठ॥
॥ 27 ॥
हवन-यज्ञ नव कन्या भोज। नवदुर्गा की पूर्ण मनोज॥
॥ 28 ॥
लाल चुनरी लाल पुष्प चढ़ाओ। नव देवी को प्रसन्न बनाओ॥
॥ 29 ॥
धूप दीप नैवेद्य अर्पण। नव देवी का करो वरण॥
॥ 30 ॥
अखंड ज्योति जलाओ माई। नव देवी की कृपा पाई॥
॥ 31 ॥
शाकाहार और ब्रह्मचर्य पालो। नवरात्रि का व्रत संभालो॥
॥ 32 ॥
भूत-पिशाच और तंत्र-मंत्र। नव दुर्गा से नष्ट सर्व यंत्र॥
॥ 33 ॥
शत्रु-नाश और रोग-निवारण। नव देवी से मिले तारण॥
॥ 34 ॥
धन-धान्य और सुख-समृद्धि। नव देवी दें अपार ऋद्धि॥
॥ 35 ॥
विवाह-योग और संतान सुख। नव देवी हरे सब दुख॥
॥ 36 ॥
विद्या बुद्धि और ज्ञान दाओ। सरस्वती-कात्यायनी मनाओ॥
॥ 37 ॥
मोक्ष मुक्ति और परमधाम। सिद्धिदात्री दें ललाम॥
॥ 38 ॥
जो नव देवी चालीसा पढ़े। जीवन में सुख-समृद्धि बढ़े॥
॥ 39 ॥
नवरात्रि में नव पाठ करे। नव देवी की कृपा उस पर परे॥
॥ 40 ॥
यह नवदुर्गा चालीसा गाऊँ। नव देवी चरणों में शीश नवाऊँ॥
दोहा
नव देवी नव शक्ति की, करें जो नित आराध। नवरात्रि का पुण्य मिले, पूरे हों सब साध॥
सामान्य प्रश्न
प्र.नवदुर्गा चालीसा में दुर्गा के नौ रूप कौन हैं?
नौ रूप हैं: (1) शैलपुत्री, पर्वतराज की पुत्री, (2) ब्रह्मचारिणी, तपस्विनी देवी, (3) चंद्रघंटा, चंद्र-घंटाधारिणी, (4) कूष्मांडा, ब्रह्मांड की निर्माता, (5) स्कंदमाता, कार्तिकेय की माता, (6) कात्यायनी, योद्धा देवी, (7) कालरात्रि, अंधकार की देवी, (8) महागौरी, शुद्ध श्वेत देवी, और (9) सिद्धिदात्री, समस्त सिद्धियों की दात्री।
प्र.नवदुर्गा चालीसा पाठ का सबसे अच्छा समय कब है?
नवदुर्गा चालीसा नवरात्रि, चैत्र नवरात्रि (मार्च-अप्रैल) और शारदीय नवरात्रि (सितंबर-अक्टूबर) दोनों, के दौरान सर्वाधिक शक्तिशाली होती है। नौ दिन में प्रतिदिन संबंधित देवी को समर्पित पाठ से पूर्ण नवगुणी आशीर्वाद मिलता है।
प्र.क्या नवदुर्गा चालीसा व्यक्तिगत देवी प्रार्थनाओं की जगह ले सकती है?
नवदुर्गा चालीसा एक व्यापक प्रार्थना है जो सभी नौ रूपों का एक साथ आह्वान करती है। हालांकि विशेष समस्याओं के लिए, जैसे सुरक्षा के लिए कालरात्रि या सिद्धियों के लिए सिद्धिदात्री, व्यक्तिगत रूपों की समर्पित प्रार्थनाएं अधिक लक्षित होती हैं।
प्र.नवरात्रि में नवदुर्गा चालीसा के साथ कौन से अनुष्ठान करें?
पारंपरिक नवरात्रि अनुष्ठानों में शामिल हैं: नौ दिन अखंड ज्योति जलाना, शाकाहारी उपवास रखना, लाल फूल और चुनरी चढ़ाना, अष्टमी पर कन्या पूजन और नवमी पर हवन करना।