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माँ काली · भक्ति स्तोत्र

काली चालीसा

Kali Chalisa

देवतामाँ काली
श्लोक40 चौपाइयाँ
भाषाहिंदी (देवनागरी)

काली चालीसा माँ काली — बुराई को जड़ से नष्ट करने वाली उग्र माता — का शक्तिशाली आह्वान है। यह काले जादू से सुरक्षा, गहरी जड़ें जमाए डर को दूर करने और जीवन की सबसे कठिन परिस्थितियों पर विजय पाने की शक्ति देती है।

अंतिम अपडेट: 19 अप्रैल 2026 · पारंपरिक वैदिक भक्ति ग्रंथ

काली चालीसा के लाभ

  • ·काले जादू और तांत्रिक प्रहार से सुरक्षा
  • ·गहरी जड़ें जमाए डर से मुक्ति
  • ·सबसे शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वियों पर विजय
  • ·नकारात्मक कर्म का रूपांतरण

पाठ का सर्वोत्तम समय

अमावस्या, शनिवार की रात और काली पूजा (बंगाल में दीपावली की रात) के दौरान।

काली चालीसा — संपूर्ण पाठ

॥ श्री काली चालीसा ॥

दोहा

जय माँ काली महाशक्ति, दुष्ट-दलनी देव। भक्त-वत्सल सुरपति-वंद्या, करहु कृपा सेव॥

1

जय जय काली महाशक्ति। करो सदा भक्तों पर भक्ति॥

2

श्याम वर्ण मुंडमाल धारी। खड्ग हस्त सर्वभय हारी॥

3

रक्त-नेत्र दिगम्बर रूपा। शिव-वक्ष-विराजित महा-भूपा॥

4

महादेव शिव हैं तुम्हारे। तुम शक्ति उनकी जग में न्यारे॥

5

सृष्टि-संहार-पालन करती। त्रिगुण से परे सदा विचरती॥

6

दुर्गा-काली-महाकाली। काल-विनाशिनी काल की काली॥

7

रक्तबीज का किया संहार। भव-भय से उबारा संसार॥

8

महिषासुर वध किया महाकाली। देवों की रक्षा की रणचंडी॥

9

शुम्भ-निशुम्भ को तुमने मारा। सत्य-धर्म का किया उजियारा॥

10

तव उग्र रूप से सब डरते। दुष्ट जन पाप से अब लड़ते॥

11

तव माधुर्य जो भक्त ध्यावे। सो परमानंद-रस पावे॥

12

काली-कवच जो नित धारे। भूत-पिशाच न आवे द्वारे॥

13

तंत्र-मंत्र सब निष्फल होवे। काली माँ की शरण में जो सोवे॥

14

अभिचार जादू सब नाशे। भक्त जन माँ की शरण में वासे॥

15

शत्रु-भय से रक्षा करो माँ। अपने भक्त को पार लगा माँ॥

16

दस महाविद्या की रानी। जगदम्बा की महिमा पहचानी॥

17

काली तारा त्रिपुर सुंदरी। भुवनेश्वरी छिन्नमस्ता धारी॥

18

भैरवी धूमावती बगलामुखी। मातंगी कमला — दस महाशक्ति॥

19

इनकी रानी हो तुम काली। सब देवी में तुम सबसे माली॥

20

आदि शक्ति परम-कल्याणी। प्रकृति-पुरुष की तुम अभिमानी॥

21

जो भय में डूबा हो मन भारी। काली माँ से करे पुकारी॥

22

माँ के चरण में शीश नवाये। सब भय तत्क्षण दूर हो जाये॥

23

गहरे दुख में जो नर डूबे। काली माँ की भक्ति से ऊभे॥

24

अमावस्या को दीप जलावे। काली माँ का प्रसाद पावे॥

25

काली पूजा जो नित करे। जीवन में आनंद-रस भरे॥

26

लाल पुष्प हिबिस्कस चढ़ावे। काली माँ को प्रसन्न बनावे॥

27

दिव्य शक्ति का करो आह्वान। माँ काली दें अभय-वरदान॥

28

माँ के नाम का दीप जलाओ। जीवन-पथ आलोकित पाओ॥

29

नकारात्मक कर्म जो हो। काली माँ की कृपा से धो॥

30

पुराने घाव भर देती माई। नई शक्ति का करे सहाई॥

31

परिवर्तन की देवी हो माँ। काल के पार हो तुम महाँ॥

32

जो इस चालीसे को पढ़े। काली माँ की कृपा में बढ़े॥

33

शनिवार और अमावस को। काली माँ का पाठ करे नित को॥

34

तांत्रिक बाधा दूर हटावे। काली माँ का भक्त सुखावे॥

35

कठिन से कठिन में सहाय। काली माँ दूर न हो जाय॥

36

मृत्यु-भय से रक्षा करो माई। महाकाली की जय जय गाई॥

37

जन्म-मरण के चक्र से छुड़ाओ। मोक्ष का पथ हमें दिखलाओ॥

38

काली माँ के नाम का जाप। नाशे जन्म-जन्मांतर के पाप॥

39

जय जय काली महाशक्ति। सदा बनी रहे तव भक्ति॥

40

इस चालीसे के पाठ का फल। काली माँ दें मुक्ति-सदा-सफल॥

दोहा

काली माँ की चालीसा, करे जो नित पाठ। भय-भूत-बाधा नाशे, मिले मुक्ति का घाट॥

सामान्य प्रश्न

प्र.काली चालीसा के क्या लाभ हैं?

काली चालीसा काले जादू, तांत्रिक प्रहार और बुरी शक्तियों से शक्तिशाली सुरक्षा प्रदान करती है। गहरी जड़ें जमाए डर से मुक्ति, शक्तिशाली शत्रुओं पर विजय और नकारात्मक कर्म का रूपांतरण करती है।

प्र.काली चालीसा पाठ का सबसे अच्छा समय कब है?

अमावस्या (नई चाँद की रात), शनिवार की रात और काली पूजा (कार्तिक मास की अमावस्या, विशेषकर बंगाल में) के दौरान। आधी रात के बाद दक्षिण की ओर मुंह करके काले तिल के तेल का दीपक जलाकर पाठ करना पारंपरिक तांत्रिक अभ्यास है।

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