माँ अन्नपूर्णा · भक्ति स्तोत्र
अन्नपूर्णा चालीसा
Annapurna Chalisa
अन्नपूर्णा चालीसा भोजन और पोषण की दिव्य प्रदाता माँ अन्नपूर्णा की स्तुति है। वे वह देवी हैं जो सुनिश्चित करती हैं कि कोई भूखा न रहे। इस चालीसा के पाठ से खाद्य सुरक्षा, भूख और गरीबी का निवारण, रसोई में प्रचुरता और उचित पोषण के माध्यम से स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है।
अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · पारंपरिक वैदिक भक्ति ग्रंथ
अन्नपूर्णा चालीसा के लाभ
- ·घर में खाद्य सुरक्षा और प्रचुरता
- ·गरीबी और भूख का निवारण
- ·उचित पोषण और पाचन के माध्यम से स्वास्थ्य
- ·दूसरों को खिलाने और पोषित करने वालों के लिए आशीर्वाद
- ·रसोई, घर और परिवार का सुचारु संचालन
- ·जीवन की सरल प्रचुरता से कृतज्ञता और संतुष्टि
पाठ का सर्वोत्तम समय
अन्नपूर्णा जयंती (मार्गशीर्ष पूर्णिमा), भोजन पकाने से पहले और दीपावली के दौरान। गरीबों को भोजन कराने पर विशेष शक्तिशाली।
अन्नपूर्णा चालीसा — संपूर्ण पाठ
॥ अन्नपूर्णा चालीसा ॥
दोहा
जय अन्नपूर्णा की जय, करो कृपा हे देव। भक्त जनों की सुनो सदा, यही है विनती सेव॥
सामान्य प्रश्न
प्र.अन्नपूर्णा चालीसा के क्या लाभ हैं?
घर में खाद्य सुरक्षा और प्रचुरता गरीबी और भूख का निवारण उचित पोषण और पाचन के माध्यम से स्वास्थ्य दूसरों को खिलाने और पोषित करने वालों के लिए आशीर्वाद रसोई, घर और परिवार का सुचारु संचालन जीवन की सरल प्रचुरता से कृतज्ञता और संतुष्टि
प्र.अन्नपूर्णा चालीसा पाठ का सबसे अच्छा समय कब है?
अन्नपूर्णा जयंती (मार्गशीर्ष पूर्णिमा), भोजन पकाने से पहले और दीपावली के दौरान। गरीबों को भोजन कराने पर विशेष शक्तिशाली।