नवरात्रि व्रत — हिंदू पवित्र उपवास
नवरात्रि व्रत
संक्षिप्त परिचय
नवरात्रि व्रत देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों — शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री — की नौ रातों की उपासना है। वर्ष में चार बार (चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ नवरात्रि) मनाई जाती है, चैत्र और शारद (आश्विन) नवरात्रि सबसे प्रमुख हैं।
अंतिम अपडेट: 19 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
सभी पाप दूर होते हैं, सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, शत्रु और नकारात्मक शक्तियां नष्ट होती हैं, स्वास्थ्य, धन और ज्ञान मिलता है।
विधि
दिन 1 (प्रतिपदा): घट स्थापना करें। प्रत्येक दिन के स्वरूप की विशेष रंग से पूजा करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। अष्टमी पर कन्या पूजा करें। नवमी पर हवन करें।
व्रत कब रखें
वर्ष में चार बार: चैत्र (वसंत), आषाढ़ (ग्रीष्म), आश्विन (शरद) और माघ (शीत) नवरात्रि।
व्रत नियम
अनाज, प्याज, लहसुन और माँसाहारी भोजन से बचें। साबूदाना, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, फल और दूध की अनुमति है।
व्रत कैसे खोलें
विजयादशमी पूजा के बाद दशमी (10वें दिन) व्रत खोलें। कई लोग कन्या पूजा के बाद अष्टमी पर आंशिक रूप से व्रत खोलते हैं।
सामान्य प्रश्न
प्र.नवरात्रि व्रत क्या है?
नवरात्रि व्रत देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों — शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री — की नौ रातों की उपासना है। वर्ष में चार बार (चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ नवरात्रि) मनाई जाती है, चैत्र...
प्र.नवरात्रि व्रत के व्रत नियम क्या हैं?
अनाज, प्याज, लहसुन और माँसाहारी भोजन से बचें। साबूदाना, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, फल और दूध की अनुमति है।
प्र.नवरात्रि व्रत कब रखना चाहिए?
वर्ष में चार बार: चैत्र (वसंत), आषाढ़ (ग्रीष्म), आश्विन (शरद) और माघ (शीत) नवरात्रि।
प्र.नवरात्रि व्रत के क्या लाभ हैं?
सभी पाप दूर होते हैं, सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, शत्रु और नकारात्मक शक्तियां नष्ट होती हैं, स्वास्थ्य, धन और ज्ञान मिलता है।