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नवरात्रि व्रत — हिंदू पवित्र उपवास

चैत्र नवरात्रि व्रत

देवता देवी दुर्गा (नौ रूप)
प्रकार नवरात्रि व्रत

संक्षिप्त परिचय

चैत्र नवरात्रि चैत्र माह (मार्च-अप्रैल) में मनाई जाने वाली वसंत नवरात्रि है, जो चैत्र शुक्ल प्रतिपदा — हिंदू नव वर्ष — से आरंभ होती है। नौ रातें देवी दुर्गा के नौ रूपों (नवदुर्गा) की पूजा को समर्पित हैं: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। यह नवरात्रि 9वें दिन राम नवमी पर समाप्त होती है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

देवी दुर्गा से शक्ति, साहस और सुरक्षा मिलती है, नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होती हैं, विवाह और संतान की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, शुभ नई शुरुआत होती है, नौ दिव्य स्त्री शक्तियों का आशीर्वाद मिलता है।

विधि

पहले दिन गंगा जल, आम के पत्तों और नारियल के साथ कलश स्थापित करें। प्रतिदिन नवदुर्गा के एक रूप की पूजा करें। दुर्गा सप्तशती या देवी स्तोत्र पाठ करें। नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाएं। प्रतिदिन व्रत रखें। अष्टमी या नवमी पर नौ कन्याओं को भोजन कराकर कन्या पूजा करें। नवमी पर हवन के साथ समाप्त करें।

व्रत कब रखें

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक — मार्च या अप्रैल में 9 दिन, जो हिंदू नव वर्ष (उगादि/गुड़ी पड़वा) के साथ मेल खाते हैं।

व्रत नियम

नौ दिनों तक अनाज (गेहूँ, चावल), माँसाहारी भोजन, प्याज, लहसुन और शराब से बचें। अनुमत: साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू, फल, दूध, पनीर और सेंधा नमक। कुछ प्रतिदिन एक बार भोजन करते हैं; कुछ अष्टमी पर निर्जला रखते हैं।

व्रत कैसे खोलें

नवमी पर कन्या पूजा और हवन के बाद प्रसाद — हलवा, पूड़ी और चने — से व्रत खोलें। कुछ लोग प्रतिदिन शाम की आरती के बाद फलाहार से व्रत खोलते हैं।

सामान्य प्रश्न

प्र.चैत्र नवरात्रि व्रत क्या है?

चैत्र नवरात्रि चैत्र माह (मार्च-अप्रैल) में मनाई जाने वाली वसंत नवरात्रि है, जो चैत्र शुक्ल प्रतिपदा — हिंदू नव वर्ष — से आरंभ होती है। नौ रातें देवी दुर्गा के नौ रूपों (नवदुर्गा) की पूजा को समर्पित हैं: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा...

प्र.चैत्र नवरात्रि व्रत के व्रत नियम क्या हैं?

नौ दिनों तक अनाज (गेहूँ, चावल), माँसाहारी भोजन, प्याज, लहसुन और शराब से बचें। अनुमत: साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू, फल, दूध, पनीर और सेंधा नमक। कुछ प्रतिदिन एक बार भोजन करते हैं; कुछ अष्टमी पर निर्जला रखते हैं।

प्र.चैत्र नवरात्रि व्रत कब रखना चाहिए?

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक — मार्च या अप्रैल में 9 दिन, जो हिंदू नव वर्ष (उगादि/गुड़ी पड़वा) के साथ मेल खाते हैं।

प्र.चैत्र नवरात्रि व्रत के क्या लाभ हैं?

देवी दुर्गा से शक्ति, साहस और सुरक्षा मिलती है, नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होती हैं, विवाह और संतान की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, शुभ नई शुरुआत होती है, नौ दिव्य स्त्री शक्तियों का आशीर्वाद मिलता है।

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