D60 — षष्ट्यंश
षष्टांश चार्ट (D60)
पूर्वजन्म के कर्म, समग्र शुभाशुभ फल और जीवन का अंतिम निर्णय
विवरण
षष्टांश चार्ट (D60) सभी षोडश वर्ग चार्टों में सर्वाधिक सूक्ष्म और गहन है। प्रत्येक राशि को साठ 0°30' के भागों में बांटा जाता है। BPHS में ऋषि पराशर ने D60 को विशेष महत्व देते हुए कहा है कि यह पूर्वजन्म के कर्म और वर्तमान जीवन के समग्र शुभाशुभ फल का परम दर्पण है। कई आचार्य D60 को D1 और D9 के बाद तीसरा सर्वाधिक महत्वपूर्ण चार्ट मानते हैं। D60 में 60 "अंश" (subdivisions) हैं जिनके अलग-अलग नाम हैं जैसे "घोरा", "राक्षस", "देव", "कुबेर" आदि — प्रत्येक अंश के गुण से उस भाग में पड़ने वाले ग्रह का फल विशेष होता है। D60 का लग्न और लग्नेश पूर्वजन्म के कर्म-संस्कार का संकेत देते हैं। D60 में शुभ ग्रह केंद्र में हों तो पूर्वजन्म के पुण्य कर्म इस जन्म में सहायक होते हैं। D60 की विश्वसनीयता पूरी तरह जन्म-समय की सटीकता पर निर्भर है — एक-दो मिनट की त्रुटि भी D60 लग्न बदल सकती है।
कैसे पढ़ें
D60 में सबसे पहले D60 लग्न और उसका "षष्टांश नाम" देखें — यह पूर्वजन्म के स्वभाव का संकेत है। D60 लग्नेश की D60 में स्थिति पूर्वजन्म के कर्म-फल की दिशा बताती है। D60 में ग्रहों के केंद्र-त्रिकोण में होने पर पुण्य-कर्म के फल इस जन्म में सक्रिय हैं। D60 में पाप ग्रहों का लग्न पर प्रभाव पूर्वजन्म के कर्म-ऋण का संकेत है। D1 और D9 के साथ D60 का मिलान करें — तीनों में एक समान संकेत हो तो वह फल अवश्य मिलता है। D60 विश्लेषण के लिए जन्म-समय एक-दो मिनट से अधिक अनिश्चित न हो।
महत्व
D60 सर्वाधिक गहन वर्ग चार्ट है। यह D1 और D9 के बाद कुंडली का "अंतिम निर्णायक" माना जाता है। पराशर के अनुसार D60 में बली ग्रह अन्य चार्टों की कमियाँ भी दूर कर सकता है। D60 का उपयोग गहन और विशेषज्ञ ज्योतिष-विश्लेषण में होता है।
सामान्य प्रश्न
प्र.D60 के लिए जन्म-समय कितना सटीक होना चाहिए?
D60 में प्रत्येक खंड केवल 0°30' का है जो लगभग 2 मिनट में बदलता है। अतः D60 विश्लेषण के लिए जन्म-समय ±1 मिनट की सटीकता आवश्यक है। यदि जन्म-समय अनिश्चित हो तो D60 का विश्लेषण भ्रामक हो सकता है। जन्म-समय शोधन (birth time rectification) के बाद ही D60 पर भरोसा करें।
प्र.D60 के अलग-अलग "अंश" (षष्टांश नाम) क्या दर्शाते हैं?
D60 के 60 खंडों के नाम पराशर परंपरा में वर्णित हैं — जैसे "घोरा" (दुष्ट), "राक्षस" (आसुरी), "देव" (दिव्य), "कुबेर" (धनवान), "पूर्ण चंद्र" (पूर्ण शुभ), "काल" (मृत्युकारक) आदि। ग्रह जिस नाम वाले खंड में हो, उस नाम के गुण अपने फल में मिलाता है। यह विश्लेषण अत्यंत सूक्ष्म और विशेषज्ञ कार्य है।
प्र.D60 में बली ग्रह D1 की कमजोरी को कैसे सुधारता है?
पराशर के अनुसार D60 में "देव" या "पूर्ण चंद्र" अंश में स्थित ग्रह — यदि D1 में वह कमजोर भी हो — तो उस ग्रह के कारक विषयों में अंततः शुभ फल मिलता है। यह पूर्वजन्म के पुण्य कर्म का प्रभाव माना जाता है। इसलिए कहते हैं कि D60 जन्म कुंडली का "अंतिम न्यायाधीश" है।
प्र.क्या D60 से पूर्वजन्म की घटनाएं जानी जा सकती हैं?
D60 से पूर्वजन्म की विशेष घटनाएं नहीं जानी जा सकतीं, परंतु पूर्वजन्म के कर्मों का स्वभाव और उनके इस जन्म पर प्रभाव का अनुमान लगाया जा सकता है। D60 लग्न का षष्टांश नाम और D60 लग्नेश की स्थिति मिलाकर यह जाना जाता है कि पूर्वजन्म में जातक का मुख्य कर्म-संस्कार किस प्रकार का था — धर्म, अर्थ, काम या मोक्ष-केंद्रित।