शिव पूजा — वैदिक पूजा विधि
काशी विश्वनाथ पूजा
संक्षिप्त परिचय
काशी विश्वनाथ पूजा भगवान शिव की उनके सर्वोच्च रूप विश्वनाथ — ब्रह्मांड के स्वामी — के रूप में पूजा है, जो वाराणसी (काशी) में सबसे पवित्र ज्योतिर्लिंग में विराजमान हैं। काशी को शाश्वत नगरी माना जाता है जहां भगवान शिव स्वयं मृत्यु के समय तारक मंत्र कानों में फूंककर मोक्ष प्रदान करते हैं। यह पूजा काशी विश्वनाथ मंदिर में या घर पर शिव लिंग पर मंत्र द्वारा की जा सकती है।
अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
मोक्ष और जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिलती है, कई जन्मों के पाप दूर होते हैं, भगवान शिव की कृपा और दिव्य सुरक्षा प्राप्त होती है, गंभीर बीमारियां ठीक होती हैं और स्वास्थ्य बाधाएं दूर होती हैं, सभी कार्यों में सफलता मिलती है, पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है, और कुंडली में गंभीर शनि या राहु पीड़ा के लिए विशेष प्रभावी है।
चरण-दर-चरण विधि
स्नान से शुद्ध हों और स्वच्छ सफेद या हल्के रंग के वस्त्र पहनें। स्वच्छ ऊंचे मंच पर शिव लिंग स्थापित करें। पंचामृत अभिषेक करें। फिर ओम नमः शिवाय मंत्र जपते हुए गंगाजल से लिंग को स्नान कराएं। भस्म और चंदन का लेप लगाएं। बिल्व पत्र, सफेद फूल और धतूरा अर्पित करें। कपूर दीपक जलाएं। महामृत्युंजय मंत्र 108 बार जपें या शिव सहस्रनाम का पाठ करें। कपूर दीप से आरती कर प्रसाद वितरित करें।
शुभ मुहूर्त
सोमवार, महाशिवरात्रि, श्रावण माह (विशेषकर श्रावण सोमवार), प्रदोष व्रत (त्रयोदशी), और प्रत्येक माह की शिवरात्रि। ब्रह्म मुहूर्त और निशीत काल (मध्यरात्रि) शिव पूजा के सबसे पवित्र समय हैं।
आवश्यक सामग्री
- ·शिव लिंग
- ·पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, चीनी)
- ·गंगाजल
- ·भस्म
- ·बिल्व पत्र
- ·सफेद फूल
- ·धतूरा के फूल
- ·चंदन का लेप
- ·कपूर
- ·अगरबत्ती
- ·रुद्राक्ष माला
सामान्य प्रश्न
प्र.काशी विश्वनाथ पूजा क्या है?
काशी विश्वनाथ पूजा भगवान शिव की उनके सर्वोच्च रूप विश्वनाथ — ब्रह्मांड के स्वामी — के रूप में पूजा है, जो वाराणसी (काशी) में सबसे पवित्र ज्योतिर्लिंग में विराजमान हैं। काशी को शाश्वत नगरी माना जाता है जहां भगवान शिव स्वयं मृत्यु के समय तारक मंत्र कान...
प्र.काशी विश्वनाथ पूजा के क्या लाभ हैं?
मोक्ष और जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिलती है, कई जन्मों के पाप दूर होते हैं, भगवान शिव की कृपा और दिव्य सुरक्षा प्राप्त होती है, गंभीर बीमारियां ठीक होती हैं और स्वास्थ्य बाधाएं दूर होती हैं, सभी कार्यों में सफलता मिलती है, पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है, और कुंडली में गंभीर शनि या राहु पीड़ा के लिए विशेष प्रभावी है।
प्र.काशी विश्वनाथ पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
सोमवार, महाशिवरात्रि, श्रावण माह (विशेषकर श्रावण सोमवार), प्रदोष व्रत (त्रयोदशी), और प्रत्येक माह की शिवरात्रि। ब्रह्म मुहूर्त और निशीत काल (मध्यरात्रि) शिव पूजा के सबसे पवित्र समय हैं।
प्र.काशी विश्वनाथ पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
शिव लिंग, पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी, चीनी), गंगाजल, भस्म, बिल्व पत्र, सफेद फूल, धतूरा के फूल, चंदन का लेप, कपूर, अगरबत्ती, रुद्राक्ष माला।