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खंड १ · अंक १ · स्था. MMXXVIशुक्रवार, 24 अप्रैल 2026मुफ्त · वैदिक · सटीक
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वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना

अन्य पूजाएं — वैदिक पूजा विधि

कार्तिक पूर्णिमा पूजा

देवता भगवान विष्णु, भगवान शिव और कार्तिक देवता
अवधि 2–3 घंटे
श्रेणी अन्य पूजाएं

संक्षिप्त परिचय

कार्तिक पूर्णिमा पूजा हिंदू पंचांग में सबसे पवित्र पूर्णिमा अनुष्ठानों में से एक है, जो कार्तिक माह (अक्टूबर–नवंबर) की पूर्णिमा को पड़ती है। इसे त्रिपुरी पूर्णिमा या देव दीपावली — देवताओं के लिए दीपों का उत्सव — भी कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया था और भगवान विष्णु चार माह की योग निद्रा (चातुर्मास) से जागे थे। भक्त गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करते हैं, दीप दान करते हैं, तुलसी और सत्यनारायण की पूजा करते हैं, और नदी के किनारे हजारों दीपक जलाते हैं। मान्यता है कि इस दिन स्नान करने से हजार अश्वमेध यज्ञों का फल मिलता है।

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

अत्यधिक आध्यात्मिक पुण्य अर्जित होता है, अनेक जन्मों के पापों का नाश होता है, विष्णु और शिव दोनों का दिव्य आशीर्वाद मिलता है, शुद्ध मन से मांगी गई मनोकामनाएं पूरी होती हैं, समृद्धि और अच्छा स्वास्थ्य मिलता है, और दिवंगत आत्माओं को शांति मिलती है।

चरण-दर-चरण विधि

सूर्योदय से पहले उठकर नदी, तालाब या कुंड में स्नान करें (घर पर हों तो गंगाजल मिलाएं)। उगते सूर्य को अर्घ्य दें। तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं और तुलसी पूजा करें। विष्णु और शिव की छवियों से वेदी सजाएं। सत्यनारायण कथा या शिव पंचाक्षर का पाठ करें। संध्या काल में जल के पास या घर के प्रवेश द्वार पर 108 मिट्टी के दीपक जलाएं। नदी को दीप दान करें। प्रसाद के रूप में खीर या मिठाई वितरित करें।

शुभ मुहूर्त

कार्तिक पूर्णिमा (कार्तिक माह की पूर्णिमा) — एक निश्चित वार्षिक तिथि। पवित्र स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त (पूर्व-भोर) और दीप दान के लिए संध्या काल सबसे शुभ है।

आवश्यक सामग्री

  • ·विष्णु और शिव की छवियां
  • ·तुलसी का पौधा
  • ·मिट्टी के दीपक (108)
  • ·घी
  • ·गंगाजल
  • ·फूल
  • ·अगरबत्ती
  • ·कपूर
  • ·खीर या मिठाई
  • ·फल
  • ·नारियल
  • ·अक्षत (अखंडित चावल)

सामान्य प्रश्न

प्र.कार्तिक पूर्णिमा पूजा क्या है?

कार्तिक पूर्णिमा पूजा हिंदू पंचांग में सबसे पवित्र पूर्णिमा अनुष्ठानों में से एक है, जो कार्तिक माह (अक्टूबर–नवंबर) की पूर्णिमा को पड़ती है। इसे त्रिपुरी पूर्णिमा या देव दीपावली — देवताओं के लिए दीपों का उत्सव — भी कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव ने त्...

प्र.कार्तिक पूर्णिमा पूजा के क्या लाभ हैं?

अत्यधिक आध्यात्मिक पुण्य अर्जित होता है, अनेक जन्मों के पापों का नाश होता है, विष्णु और शिव दोनों का दिव्य आशीर्वाद मिलता है, शुद्ध मन से मांगी गई मनोकामनाएं पूरी होती हैं, समृद्धि और अच्छा स्वास्थ्य मिलता है, और दिवंगत आत्माओं को शांति मिलती है।

प्र.कार्तिक पूर्णिमा पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

कार्तिक पूर्णिमा (कार्तिक माह की पूर्णिमा) — एक निश्चित वार्षिक तिथि। पवित्र स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त (पूर्व-भोर) और दीप दान के लिए संध्या काल सबसे शुभ है।

प्र.कार्तिक पूर्णिमा पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

विष्णु और शिव की छवियां, तुलसी का पौधा, मिट्टी के दीपक (108), घी, गंगाजल, फूल, अगरबत्ती, कपूर, खीर या मिठाई, फल, नारियल, अक्षत (अखंडित चावल)।

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