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शिव पूजा — वैदिक पूजा विधि

काल भैरव पूजा

देवता काल भैरव (शिव का उग्र स्वरूप, काशी के कोतवाल)
अवधि 1–2 घंटे
श्रेणी शिव पूजा

संक्षिप्त परिचय

काल भैरव पूजा काल भैरव की आराधना है — भगवान शिव का वह भयंकर, काल-अतीत स्वरूप जो काल (समय) पर शासन करता है, काशी (वाराणसी) की रक्षा करता है और श्मशान का अधिपति है। काल भैरव काशी के कोतवाल हैं — कोई भी आत्मा उनकी अनुमति के बिना वाराणसी में प्रवेश या निकास नहीं कर सकती, और वे काशी में मरने वाले सभी लोगों के कानों में तारक मंत्र फुसफुसाते हैं, जिससे कर्म की परवाह किए बिना मोक्ष प्राप्त होता है। काल भैरव अष्टमी — मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष अष्टमी — उनका प्रमुख उत्सव है। वे मंगलवार और रविवार को विशेष रूप से पूजे जाते हैं।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

काल भैरव पूजा अभय देती है, शत्रुओं और बाधाओं को त्वरित शक्ति से दूर करती है और काला जादू, बुरी नजर और मानसिक हमलों से शक्तिशाली सुरक्षा प्रदान करती है। काल के स्वामी के रूप में, काल भैरव मृत्यु के भय को दूर करते हैं और भक्त को अच्छी मृत्यु (काशी लाभ) — मरण के क्षण पर मुक्ति — प्रदान करते हैं। वे कालसर्प दोष और गंभीर राहु-केतु पीड़ाओं से बचाते हैं। काल भैरव अष्टमी का व्रत और पूजा आध्यात्मिक प्रगति को तीव्र करती है, कर्मिक ऋणों को जलाती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।

चरण-दर-चरण विधि

काल भैरव पूजा आदर्श रूप से मंगलवार या रविवार की शाम को, या काल भैरव अष्टमी पर, भैरव मंदिर या शिव मंदिर में की जाती है। पूजा से पहले स्नान करें। काले या गहरे नीले कपड़े पहनें — काल भैरव के रंग। काले तिल, काले तिल के लड्डू, काले फूल, सरसों के तेल का दीपक, लाल गुड़हल और सुरा (प्रतीकात्मक रूप से एक छोटे पात्र में; आधुनिक भक्त लाल फलों का रस अर्पित करते हैं) अर्पित करें। देवता के वाहन के रूप में एक कुत्ते की मूर्ति या खिलौना प्रस्तुत करें। आदि शंकराचार्य द्वारा रचित काल भैरव अष्टकम का पाठ करें: "देवराज सेव्यमान पावनांघ्रि पंकजम..." रुद्राक्ष माला पर 108 बार "ॐ काल भैरवाय नमः" का जाप करें।

शुभ मुहूर्त

काल भैरव अष्टमी (मार्गशीर्ष कृष्णाष्टमी, नवंबर-दिसंबर) सर्वोच्च अवसर है, जहाँ काशी (वाराणसी) और उज्जैन के काल भैरव मंदिरों में विशाल जनसमूह एकत्र होता है। मंगलवार और रविवार वर्ष भर साप्ताहिक शुभ दिन हैं। इन दिनों मध्यरात्रि पूजा विशेष रूप से शक्तिशाली मानी जाती है। प्रत्येक मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी भी लघु भैरव अष्टमी के रूप में मनाई जाती है।

आवश्यक सामग्री

  • ·काल भैरव की छवि या यंत्र
  • ·काले तिल
  • ·काले तिल के लड्डू
  • ·गहरे रंग के फूल (काला/गहरा चंपा या जस्मीन)
  • ·सरसों के तेल का दीपक
  • ·लाल गुड़हल के फूल
  • ·शराब या लाल फलों का रस (प्रतीकात्मक अर्पण)
  • ·कुत्ते की मूर्ति या खिलौना (वाहन अर्पण)
  • ·रुद्राक्ष माला
  • ·काला कपड़ा
  • ·नारियल
  • ·तिल की चिक्की या गहरे रंग की मिठाई
  • ·काल भैरव अष्टकम पाठ
  • ·अगरबत्ती
  • ·कपूर

सामान्य प्रश्न

प्र.काल भैरव पूजा क्या है?

काल भैरव पूजा काल भैरव की आराधना है — भगवान शिव का वह भयंकर, काल-अतीत स्वरूप जो काल (समय) पर शासन करता है, काशी (वाराणसी) की रक्षा करता है और श्मशान का अधिपति है। काल भैरव काशी के कोतवाल हैं — कोई भी आत्मा उनकी अनुमति के बिना वाराणसी में प्रवेश या नि...

प्र.काल भैरव पूजा के क्या लाभ हैं?

काल भैरव पूजा अभय देती है, शत्रुओं और बाधाओं को त्वरित शक्ति से दूर करती है और काला जादू, बुरी नजर और मानसिक हमलों से शक्तिशाली सुरक्षा प्रदान करती है। काल के स्वामी के रूप में, काल भैरव मृत्यु के भय को दूर करते हैं और भक्त को अच्छी मृत्यु (काशी लाभ) — मरण के क्षण पर मुक्ति — प्रदान करते हैं। वे कालसर्प दोष और गंभीर राहु-केतु पीड़ाओं से बचाते हैं। काल भैरव अष्टमी का व्रत और पूजा आध्यात्मिक प्रगति को तीव्र करती है, कर्मिक ऋणों को जलाती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।

प्र.काल भैरव पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

काल भैरव अष्टमी (मार्गशीर्ष कृष्णाष्टमी, नवंबर-दिसंबर) सर्वोच्च अवसर है, जहाँ काशी (वाराणसी) और उज्जैन के काल भैरव मंदिरों में विशाल जनसमूह एकत्र होता है। मंगलवार और रविवार वर्ष भर साप्ताहिक शुभ दिन हैं। इन दिनों मध्यरात्रि पूजा विशेष रूप से शक्तिशाली मानी जाती है। प्रत्येक मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी भी लघु भैरव अष्टमी के रूप में मनाई जाती है।

प्र.काल भैरव पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

काल भैरव की छवि या यंत्र, काले तिल, काले तिल के लड्डू, गहरे रंग के फूल (काला/गहरा चंपा या जस्मीन), सरसों के तेल का दीपक, लाल गुड़हल के फूल, शराब या लाल फलों का रस (प्रतीकात्मक अर्पण), कुत्ते की मूर्ति या खिलौना (वाहन अर्पण), रुद्राक्ष माला, काला कपड़ा, नारियल, तिल की चिक्की या गहरे रंग की मिठाई, काल भैरव अष्टकम पाठ, अगरबत्ती, कपूर।

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