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अन्य पूजाएं — वैदिक पूजा विधि

चतुर्दशी पूजा

देवता भगवान शिव और यमराज
अवधि 1–2 घंटे (या रात्रि भर जागरण)
श्रेणी अन्य पूजाएं

संक्षिप्त परिचय

चतुर्दशी पूजा चंद्र पखवाड़े के दोनों पक्षों की चौदहवीं तिथि को की जाती है। कृष्ण पक्ष चतुर्दशी भगवान शिव और पितरों से जुड़ी है जबकि शिवरात्रि माघ या फाल्गुन माह में पड़ती है। प्रत्येक माह मासिक शिवरात्रि के रूप में रात्रि-जागरण और शिव पूजा की जाती है।

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिलती है, अकाल मृत्यु से रक्षा होती है, पापों का नाश होता है, आध्यात्मिक उन्नति होती है, पितरों को शांति मिलती है और मोक्ष के लिए शिव की कृपा प्राप्त होती है।

चरण-दर-चरण विधि

सूर्योदय से अगले दिन तक उपवास रखें। शिव लिंग का पंचामृत से अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें। शिव पंचाक्षर मंत्र का 108 बार जाप करें। रात्रि जागरण करें और अगले दिन प्रातः व्रत खोलें।

शुभ मुहूर्त

प्रत्येक चंद्र माह की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी। महा शिवरात्रि सबसे शुभ है। इस दिन प्रदोष काल और मध्यरात्रि पूजा के लिए सर्वोत्तम समय हैं।

आवश्यक सामग्री

  • ·शिव लिंग
  • ·बेलपत्र
  • ·धतूरे के फूल
  • ·सफेद फूल
  • ·दूध
  • ·दही
  • ·शहद
  • ·घी
  • ·गंगाजल
  • ·अगरबत्ती
  • ·कपूर
  • ·अक्षत
  • ·पंचामृत

सामान्य प्रश्न

प्र.चतुर्दशी पूजा क्या है?

चतुर्दशी पूजा चंद्र पखवाड़े के दोनों पक्षों की चौदहवीं तिथि को की जाती है। कृष्ण पक्ष चतुर्दशी भगवान शिव और पितरों से जुड़ी है जबकि शिवरात्रि माघ या फाल्गुन माह में पड़ती है। प्रत्येक माह मासिक शिवरात्रि के रूप में रात्रि-जागरण और शिव पूजा की जाती है...

प्र.चतुर्दशी पूजा के क्या लाभ हैं?

जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिलती है, अकाल मृत्यु से रक्षा होती है, पापों का नाश होता है, आध्यात्मिक उन्नति होती है, पितरों को शांति मिलती है और मोक्ष के लिए शिव की कृपा प्राप्त होती है।

प्र.चतुर्दशी पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

प्रत्येक चंद्र माह की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी। महा शिवरात्रि सबसे शुभ है। इस दिन प्रदोष काल और मध्यरात्रि पूजा के लिए सर्वोत्तम समय हैं।

प्र.चतुर्दशी पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

शिव लिंग, बेलपत्र, धतूरे के फूल, सफेद फूल, दूध, दही, शहद, घी, गंगाजल, अगरबत्ती, कपूर, अक्षत, पंचामृत।

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