वैदिक मंत्र · भगवान शिव
शिव पंचाक्षर — नमः शिवाय
Shiv Panchakshara
संस्कृत (देवनागरी)
नमः शिवाय पञ्चाक्षर स्तोत्रम् (प्रथम श्लोक): नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नमः शिवाय
रोमन लिपि
Namah Shivaya Panchakshara Stotra (first verse): Nagendraharaya Trilochanaya Bhasmangaraagaya Maheshvaraya Nityaya Shuddhaya Digambaraya Tasmai Nakaraya Namah Shivaya
अर्थ
शुभ शिव को नमस्कार। पाँच अक्षर न-म-शि-वा-य: न = पृथ्वी तत्व के स्वामी; म = जल के स्वामी; शि = अग्नि के स्वामी; वा = वायु के स्वामी; य = आकाश के स्वामी। पंचाक्षर स्तोत्र: नागराज को माला की तरह धारण करने वाले, तीन नेत्रों वाले, भस्म से अनुलिप्त, महेश्वर, नित्य, शुद्ध, दिगंबर — उस नकार (न) वाले को नमस्कार।
अंतिम अपडेट: 20 अप्रैल 2026 · पारंपरिक वैदिक मंत्र
शिव पंचाक्षर — नमः शिवाय के लाभ
- ·शुद्ध पंचाक्षर (ॐ के बिना) सबसे पवित्र शैव मंत्र है
- ·शरीर, मन और वातावरण में पाँचों तत्वों की शुद्धि होती है
- ·अनेक जन्मों के सभी पापों और नकारात्मक कर्मों का नाश होता है
- ·मृत्यु के समय मोक्ष मिलता है — शिव स्वयं यह मंत्र फुसफुसाते हैं
- ·जाप ध्यान के लिए आदर्श — करोड़ों बार निरंतर जप सकते हैं
- ·महानतम शैव संतों द्वारा अभ्यास: आदि शंकराचार्य, अप्पय्य दीक्षित
जाप विधि
- 1.शुद्ध शैव अभ्यास के लिए पंचाक्षर को "ॐ" के बिना जपते हैं
- 2.श्वास के साथ तालमेल: श्वास लेते समय "न-म-शि", छोड़ते समय "वा-य"
- 3.दिन में 24 घंटे जप सकते हैं — समय, स्थान या अवस्था पर कोई प्रतिबंध नहीं
- 4.शिव मंदिरों में, विशेषकर प्रदोष के दौरान, सबसे शक्तिशाली
- 5.महाशिवरात्रि: रात के चारों प्रहर निरंतर जाप
- 6.उन्नत अभ्यास: शिव अभिषेक (शिवलिंग की पूजा स्नान) करते हुए जाप
जाप का सर्वोत्तम समय
कभी भी। प्रदोष काल (सूर्यास्त से 1.5 घंटे पहले, विशेषकर त्रयोदशी पर)। महाशिवरात्रि। सोमवार।
अनुशंसित जाप संख्या
कोई निश्चित संख्या नहीं। दैनिक: 108 से 1008। पुरश्चरण: 1.25 करोड़। महाशिवरात्रि: रात भर यथासंभव।
सामान्य प्रश्न
प्र.नमः शिवाय ॐ के साथ जपें या बिना?
दोनों मान्य हैं। "नमः शिवाय" (पंचाक्षर) शुद्ध शैव अभ्यास है। "ॐ नमः शिवाय" (षडाक्षर) प्रणव सहित लोकप्रिय रूप है। शैव दीक्षा में "नमः शिवाय" ही दिया जाता है।
प्र.पंचाक्षर स्तोत्र क्या है?
यह आदि शंकराचार्य की पाँच श्लोकों वाली स्तुति है जिसमें हर श्लोक एक अक्षर (न, म, शि, वा, य) से शुरू होता है। मंत्र जाप से पहले इसका पाठ करने से गहराई बढ़ती है।