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वैदिक मंत्र · भगवान शिव (त्र्यंबकेश्वर)

महामृत्युंजय मंत्र

Mahamrityunjaya Mantra

प्रकारवैदिक मंत्र
देवताभगवान शिव (त्र्यंबकेश्वर)
अक्षर32

संस्कृत (देवनागरी)

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्

रोमन लिपि

Om Tryambakaṃ Yajāmahe Sugandhinṃ Puṣṭivardhanam Urvārukamiva Bandhanān Mṛtyor Mukṣīya Māmṛtāt

अर्थ

हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की आराधना करते हैं! आप सुगंधित और सभी प्राणियों के पोषक हैं। जिस प्रकार पका हुआ खीरा बेल से स्वतः अलग हो जाता है, उसी प्रकार हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करके अमरत्व प्रदान करें।

अंतिम अपडेट: 19 अप्रैल 2026 · पारंपरिक वैदिक मंत्र

महामृत्युंजय मंत्र के लाभ

  • ·मृत्यु के भय को जीतता है और दीर्घायु तथा उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करता है
  • ·शक्तिशाली उपचार मंत्र — गंभीर बीमारी से उबरने के लिए जपा जाता है
  • ·दुर्घटनाओं, अचानक आपदाओं और अकाल मृत्यु से सुरक्षा करता है
  • ·कुंडली में राहु, केतु और शनि के बुरे प्रभावों को दूर करता है
  • ·मानसिक शांति देता है और गहरे भय तथा चिंताएँ दूर करता है
  • ·मोक्ष प्रदान करता है — आत्मा को जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त करता है

जाप विधि

  1. 1.कुश आसन या सफेद ऊनी आसन पर उत्तर या पूर्व की ओर मुँह करके बैठें
  2. 2.घी का दीपक जलाएँ और शिवलिंग या तस्वीर पर बेल पत्र चढ़ाएँ
  3. 3.रुद्राक्ष की माला रखें — रुद्राक्ष भगवान शिव को विशेष प्रिय है
  4. 4.अर्थ पर गहरे ध्यान के साथ जपें — शिव की दिव्य उपचार ज्योति की कल्पना करें
  5. 5.प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि और सोमवार प्रातः विशेष रूप से लाभकारी
  6. 6.रोगी के लिए: जाप के बाद जल का छिड़काव करें या उसके सामने बैठकर जपें

जाप का सर्वोत्तम समय

ब्रह्म मुहूर्त (4–6 बजे), प्रदोष व्रत (त्रयोदशी तिथि), महाशिवरात्रि, और सुरक्षा के लिए राहु काल में। सोमवार विशेष रूप से शुभ।

अनुशंसित जाप संख्या

प्रतिदिन 108 बार (1 माला)। रोग निवारण के लिए 1008 बार। पुरश्चरण: 1 करोड़ 25 लाख जाप।

सामान्य प्रश्न

प्र.महामृत्युंजय मंत्र का उपयोग किसलिए होता है?

महामृत्युंजय मंत्र मुख्य रूप से स्वास्थ्य, रोग निवारण और अकाल मृत्यु से सुरक्षा के लिए जपा जाता है। गंभीर रोगी, दुर्घटना या ऑपरेशन का सामना कर रहे व्यक्ति, या कठिन ग्रह दशाओं (राहु-केतु, साढ़ेसाती) में विशेष रूप से लाभकारी।

प्र.महामृत्युंजय मंत्र कब जपना चाहिए?

ब्रह्म मुहूर्त (4–6 बजे), प्रदोष व्रत और महाशिवरात्रि पर विशेष रूप से जपें। सोमवार को शिव की पूजा के साथ यह मंत्र जपना अत्यंत फलदायी है।

प्र.क्या किसी और के लिए महामृत्युंजय मंत्र जप सकते हैं?

हाँ। जाप के समय उस व्यक्ति का मन में ध्यान करें और जाप के बाद जल उन पर छिड़कें। मंत्र की सुरक्षात्मक ऊर्जा उस व्यक्ति को मिलती है।

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