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पौराणिक मंत्र · भगवान शिव

ओम नमः शिवाय

Om Namah Shivaya

प्रकारपौराणिक मंत्र
देवताभगवान शिव
अक्षर6

संस्कृत (देवनागरी)

ॐ नमः शिवाय

रोमन लिपि

Om Namaḥ Śivāya

अर्थ

मैं शिव को प्रणाम करता हूँ, जो परम मंगलकारी और सभी प्राणियों में शुद्ध चेतना हैं। न = पृथ्वी, म = जल, शि = अग्नि, वा = वायु, य = आकाश। पाँच अक्षर सृष्टि के पाँच तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

अंतिम अपडेट: 13 जून 2026 · पारंपरिक वैदिक मंत्र

ओम नमः शिवाय के लाभ

  • ·सबसे अधिक जपा जाने वाला शिव मंत्र, शांति, संतुलन और दिव्य सुरक्षा देता है
  • ·शरीर में पाँच तत्वों की शुद्धि और सामंजस्य होता है
  • ·अहंकार, घमंड और आसक्ति को नष्ट करता है, आत्मा को मोक्ष के लिए तैयार करता है
  • ·क्रोध, तनाव और भावनात्मक उथल-पुथल को नियंत्रित करने के लिए उत्तम
  • ·भक्ति को मजबूत करता है और परमात्मा से जुड़ाव गहरा करता है
  • ·मृत्यु संस्कार में पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है, प्रयाण करती आत्मा को शांति मिलती है

जाप विधि

  1. 1.कहीं भी, कभी भी जप सकते हैं, यही इसकी सबसे बड़ी शक्ति है
  2. 2.विधिवत अभ्यास के लिए: उत्तर की ओर बैठें, दीप जलाएँ, रुद्राक्ष माला रखें
  3. 3.जोर से, धीरे (उपांशु) या मन में (मानसिक), तीनों विधियाँ मान्य हैं
  4. 4.श्वास के साथ तालमेल बिठाएँ: श्वास लेते समय "ओम नमः", छोड़ते समय "शिवाय"
  5. 5.चलते समय, दैनिक कार्यों में या भावनात्मक विचलन में, निरंतर जाप करें
  6. 6.महाशिवरात्रि: रात भर निरंतर जाप से अधिकतम आध्यात्मिक लाभ

जाप का सर्वोत्तम समय

कभी भी, कहीं भी। विधिवत: ब्रह्म मुहूर्त और प्रदोष काल (सूर्यास्त से डेढ़ घंटे पहले)। सोमवार शिव का पवित्र दिन है। महाशिवरात्रि पर रातभर जाप।

अनुशंसित जाप संख्या

कोई निश्चित संख्या नहीं, निरंतर जाप ध्यान के रूप में करें। परंपरागत: सुबह-शाम 108 बार (1 माला)। समर्पित अभ्यास के लिए: 5 या 11 माला दैनिक।

सामान्य प्रश्न

प्र.ओम नमः शिवाय के प्रत्येक अक्षर का अर्थ क्या है?

पाँच अक्षर न-म-शि-वा-य पाँच तत्वों के अनुरूप हैं: न = पृथ्वी, म = जल, शि = अग्नि, वा = वायु, य = आकाश। ये सृष्टि के पाँच मूल तत्व हैं। इस मंत्र का जाप शरीर और मन में इन तत्वों को शुद्ध और सामंजस्यपूर्ण बनाता है।

प्र.क्या ओम नमः शिवाय का जाप महिलाएँ कर सकती हैं?

हाँ, बिल्कुल। यह मंत्र सभी के लिए है, कोई प्रतिबंध नहीं। भगवान शिव के भक्त हर जाति, लिंग और आयु के होते हैं।

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