वैदिक मंत्र · भगवान शिव (तत्पुरुष)
शिव गायत्री मंत्र
Shiv Gayatri Mantra
प्रकारवैदिक मंत्र
देवताभगवान शिव (तत्पुरुष)
अक्षर24
संस्कृत (देवनागरी)
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्
रोमन लिपि
Om Tatpurushaya Vidmahe Mahadevaya Dhimahi Tanno Rudrah Prachodayat
अर्थ
हम उस सर्वोच्च पुरुष (तत्पुरुष) को जानते हैं, महादेव का ध्यान करते हैं, रुद्र हमें प्रेरित और प्रकाशित करें।
अंतिम अपडेट: 14 जून 2026 · पारंपरिक वैदिक मंत्र
शिव गायत्री मंत्र के लाभ
- ·शिव के तत्पुरुष पहलू का आह्वान, शिव के पाँच मुखों में सर्वोच्च
- ·मन शुद्ध होता है, कर्म नष्ट होते हैं और आध्यात्मिक विकास तेज होता है
- ·कुंडली में शनि मजबूत होता है, शिव शनि के स्वामी हैं
- ·राहु और केतु के नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं
- ·दिव्य ज्ञान और माया को भेदने की क्षमता मिलती है
- ·शिव भक्तों के लिए गायत्री-रूप ध्यान मंत्र के रूप में शक्तिशाली
जाप विधि
- 1.सोमवार और महाशिवरात्रि को जपें
- 2.उत्तर दिशा में, सफेद कपड़े पर बैठें, कर्पूर दीपक जलाएँ
- 3.बेल पत्र चढ़ाएँ, तीन पत्तियाँ शिव के तीन नेत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं
- 4.रुद्राक्ष माला (विशेषतः शिव के लिए 5 मुखी रुद्राक्ष)
- 5.महामृत्युंजय मंत्र के साथ एक ही सत्र में जप सकते हैं
- 6.ब्रह्म मुहूर्त और प्रदोष काल आदर्श हैं
जाप का सर्वोत्तम समय
सोमवार ब्रह्म मुहूर्त। प्रदोष काल। महाशिवरात्रि। शिव अभिषेक के दौरान।
अनुशंसित जाप संख्या
प्रतिदिन 108 बार। महाशिवरात्रि: रात के प्रहरों में 1008 बार।
सामान्य प्रश्न
प्र.शिव गायत्री और महामृत्युंजय में क्या अंतर है?
शिव गायत्री ध्यान और दार्शनिक मंत्र है जो शिव के सर्वोच्च स्वरूप का चिंतन करता है। महामृत्युंजय सीधे रोग निवारण और मृत्यु पर विजय के लिए है।
प्र.शिव गायत्री किसे जपनी चाहिए?
शिव भक्त, आध्यात्मिक साधक, कुंडली में कमजोर शनि वाले और राहु-केतु दोष वाले लोगों को।