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वैदिक मंत्र · भगवान शिव — मृत्युञ्जय स्वरूप

मृत्युञ्जय मंत्र (लघु रूप)

Mrityunjaya Mantra (Short Form)

प्रकारवैदिक मंत्र
देवताभगवान शिव — मृत्युञ्जय स्वरूप
अक्षर34

संस्कृत (देवनागरी)

ॐ जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं ॐ

रोमन लिपि

Om Joom Sah Om Bhur Bhuvah Svah Tryambakam Yajamahe Sugandim Pustivardhanam Urvarukamiva Bandhanat Mrityormukshiya Maamritat Svah Bhuvah Bhur Om Sah Joom Om

अर्थ

ॐ जूं सः — मृत्युञ्जय बीज मंत्र जो सीधे शिव की मृत्यु-जय शक्ति को सक्रिय करता है। हम तीन आँखों वाले भगवान (शिव) की पूजा करते हैं जो सुगंधित हैं और सभी प्राणियों का पोषण करते हैं। वे हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें — जैसे पका हुआ खीरा अपनी बेल से मुक्त हो जाता है — लेकिन कभी अमरत्व से नहीं।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · पारंपरिक वैदिक मंत्र

मृत्युञ्जय मंत्र (लघु रूप) के लाभ

  • ·विशिष्ट उपचार उद्देश्यों के लिए मानक महामृत्युञ्जय से अधिक शक्तिशाली — जूं सः बीज सीधे अमृत को सक्रिय करता है
  • ·ज्योतिष में निर्धारित उपाय के रूप में उपयोग किया जाता है जब 8वाँ भाव, 8वाँ स्वामी, या शनि गंभीर रूप से पीड़ित हो
  • ·गंभीर बीमारी, सर्जरी, या चिकित्सा संकट से उबरने में तेजी लाता है
  • ·मृत्यु के भय और अस्तित्वगत चिंता को दूर करता है — योगिक समझ प्रदान करता है कि मृत्यु परिवर्तन है, विनाश नहीं
  • ·शिव की तृतीय नेत्र ऊर्जा को सक्रिय करता है — अंतर्ज्ञान और सूक्ष्म आयामों को देखने की क्षमता बढ़ाता है
  • ·कई जन्मों में संचित नकारात्मक कर्म को शुद्ध करता है

जाप विधि

  1. 1.ब्रह्म मुहूर्त (4–6 बजे) या मध्यरात्रि में जप सर्वोत्तम — शिव की ऊर्जा इन घंटों में सबसे प्रबल होती है
  2. 2.सफेद या भूरे आसन पर उत्तर या पूर्व की ओर मुंह करके बैठें; गिनती के लिए रुद्राक्ष माला का उपयोग करें
  3. 3.शुरू करने से पहले शिवलिंग या शिव की छवि को कच्चे दूध, शहद और बेलपत्र से सुशोभित करें
  4. 4.पूर्ण ॐ जूं सः फ्रेमिंग के साथ जपें — इसे केवल त्र्यम्बकं... तक न घटाएँ क्योंकि बीज सैंडविच उपचार धारा को बढ़ाता है
  5. 5.गंभीर बीमारी या सुरक्षा के लिए: 40 दिनों तक प्रतिदिन भोर में 108 बार बिना नागा के
  6. 6.उन्नत अभ्यास: 1008 बार जपते हुए शिवलिंग का अभिषेक — ध्वनि कंपन पानी में उपचार शक्ति भरता है

जाप का सर्वोत्तम समय

प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त। प्रदोष (13वीं चंद्र तिथि, विशेषकर सोमवार प्रदोष)। महाशिवरात्रि। किसी भी समय सोमवार। सूर्य/चंद्र ग्रहण।

अनुशंसित जाप संख्या

प्रतिदिन 108 बार (1 माला)। उपचार साधना के लिए: भोर में 3 माला (324 बार)। पुरश्चरण: 1.25 लाख। तीव्र संकट के लिए: लगातार 1008 बार।

सामान्य प्रश्न

प्र.महामृत्युञ्जय मंत्र और इस लघु रूप में क्या अंतर है?

ऋग्वेद और यजुर्वेद का शास्त्रीय महामृत्युञ्जय (त्र्यम्बकं यजामहे...) मूल पाठ है। ॐ जूं सः फ्रेमिंग वाला "लघु रूप" तांत्रिक परंपरा में — विशेषकर शिव आगमों और मृत्युञ्जय कल्प जैसे ग्रंथों में — सिखाया गया मृत्युञ्जय साधना संस्करण है। ज्योतिष प्रयोग अक्सर 8वें भाव के ग्रह दोषों के लिए इस विस्तारित रूप को निर्धारित करते हैं।

प्र.किसी बीमार व्यक्ति के लिए मृत्युञ्जय मंत्र कितनी बार जपना चाहिए?

शास्त्रीय ग्रंथ निर्धारित करते हैं: सामान्य स्वास्थ्य रखरखाव के लिए प्रतिदिन 108 बार; गंभीर बीमारी के लिए 1008 बार; तीव्र संकट में 10,000 बार। परिवार के सदस्य बीमार व्यक्ति की ओर से जप कर सकते हैं — पुण्य रोगी को समर्पित किया जाता है। मृत्युञ्जय जप (108+ बार) से पवित्र जल या दूध पारंपरिक रूप से पीने के लिए दिया जाता है।

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