पौराणिक मंत्र · भगवान बृहस्पति
गुरु दशा के लिए गुरु मंत्र
Guru Mantra for Guru Dasha
संस्कृत (देवनागरी)
ॐ बृं बृहस्पतये नमः गुरु स्तोत्र: देवानां च ऋषीणां च गुरुं काञ्चनसन्निभम् बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्
रोमन लिपि
Om Brim Brihaspataye Namah Guru Stotra: Devanam Cha Rishinam Cha Gurum Kanchanasannibham Buddhibhutam Trilokesham Tam Namami Brihaspatim
अर्थ
ॐ। बृहस्पति को नमस्कार। गुरु स्तोत्र: देवताओं और ऋषियों के गुरु, सोने के वर्ण वाले, बुद्धि के अवतार, तीनों लोकों के स्वामी बृहस्पति को नमस्कार।
अंतिम अपडेट: 20 अप्रैल 2026 · पारंपरिक वैदिक मंत्र
गुरु दशा के लिए गुरु मंत्र के लाभ
- ·बृहस्पति महादशा और अंतर्दशा (16 वर्ष) का प्राथमिक उपाय
- ·बृहस्पति काल में ज्ञान, वित्तीय समृद्धि और आध्यात्मिक विकास बढ़ता है
- ·कमजोर बृहस्पति के कारण विवाह और संतान में देरी दूर होती है
- ·जन्म कुंडली में बृहस्पति के सकारात्मक पहलुओं को मजबूत करता है
- ·शिक्षकों, सलाहकारों, वकीलों और आध्यात्मिक मार्गदर्शकों के लिए लाभकारी
- ·गुरु चांडाल योग (बृहस्पति-राहु युति) के प्रभाव दूर होते हैं
जाप विधि
- 1.गुरुवार प्रातः — बृहस्पति का पवित्र दिन
- 2.गुरुवार का व्रत — केवल सात्विक पीला भोजन (दाल, चावल, हल्दी दूध)
- 3.पीले वस्त्र पहनें, बृहस्पति को पीले फूल और पीली मिठाई अर्पित करें
- 4.पुखराज माला या तुलसी माला
- 5.पूर्ण पुरश्चरण के लिए 40 दिनों में 19,000 बार जपें
- 6.गुरुवार को इस मंत्र के साथ विष्णु सहस्रनाम पढ़ें
जाप का सर्वोत्तम समय
गुरुवार सूर्योदय पर। पुष्य नक्षत्र के दिन। गुरु पूर्णिमा। गुरु होरा के दौरान।
अनुशंसित जाप संख्या
प्रतिदिन 108 बार। गुरुवार: 1008 बार। पुरश्चरण: 40 दिनों में 19,000 जाप।
सामान्य प्रश्न
प्र.बृहस्पति महादशा में क्या होता है?
बृहस्पति महादशा 16 वर्ष तक चलती है और आमतौर पर सभी दशाओं में सबसे शुभ मानी जाती है। ज्ञान, करियर, विवाह, संतान और समृद्धि बढ़ती है। गुरु मंत्र लाभकारी प्रभावों को अधिकतम करता है।