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क्षेत्रीय त्योहार — हिंदू पवित्र उत्सव

वैकुंठ एकादशी

देवता भगवान विष्णु (रंगनाथ, वेंकटेश्वर)
माह मार्गझि/धनु (दिसंबर/जनवरी)
क्षेत्र तमिलनाडु (श्रीरंगम, तिरुपति), केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश

संक्षिप्त परिचय

वैकुंठ एकादशी (मुक्कोटि एकादशी भी कहलाती है) वर्ष की सबसे पवित्र एकादशी है, जो मार्गझि (धनु) के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु वैकुंठ द्वारम (स्वर्ग के द्वार) खोलते हैं। श्रीरंगम और तिरुपति में लाखों तीर्थयात्री परमपद वासल से गुजरने आते हैं।

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

महत्व

वैष्णव भक्तों के लिए सबसे शुभ एकादशी — इस दिन उपवास करना वर्ष की सभी 24 एकादशियों के पालन के बराबर माना जाता है। वैकुंठ द्वारम का खुलना आत्मा की मुक्ति और शाश्वत आनंद में प्रवेश का प्रतीक है।

अनुष्ठान और परंपराएं

पूर्ण उपवास (निर्जला — पानी के बिना) या आंशिक उपवास। विष्णु मंदिरों में रात भर जागरण। विष्णु सहस्रनाम, भगवद गीता और दिव्य प्रबंधम का पाठ। श्रीरंगम और तिरुपति में परमपद वासल से गुजरें। विष्णु को तुलसी पत्ते, कमल के फूल और पीले फूल चग़ाएं।

पारंपरिक व्यंजन

तुलसी जल (पवित्र तुलसी का पानी)फल (एकादशी व्रत फल)दूध और दहीसाबूदाना खिचड़ीमीठा पोंगल (शक्कराई पोंगल)पनकम (गुड़-काली मिर्च पेय)

सामान्य प्रश्न

प्र.वैकुंठ एकादशी क्या है?

वैकुंठ एकादशी (मुक्कोटि एकादशी भी कहलाती है) वर्ष की सबसे पवित्र एकादशी है, जो मार्गझि (धनु) के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु वैकुंठ द्वारम (स्वर्ग के द्वार) खोलते हैं। श्रीरंगम और तिरुपति में लाखों तीर्थया...

प्र.वैकुंठ एकादशी का क्या महत्व है?

वैष्णव भक्तों के लिए सबसे शुभ एकादशी — इस दिन उपवास करना वर्ष की सभी 24 एकादशियों के पालन के बराबर माना जाता है। वैकुंठ द्वारम का खुलना आत्मा की मुक्ति और शाश्वत आनंद में प्रवेश का प्रतीक है।

प्र.वैकुंठ एकादशी के अनुष्ठान क्या हैं?

पूर्ण उपवास (निर्जला — पानी के बिना) या आंशिक उपवास। विष्णु मंदिरों में रात भर जागरण। विष्णु सहस्रनाम, भगवद गीता और दिव्य प्रबंधम का पाठ। श्रीरंगम और तिरुपति में परमपद वासल से गुजरें। विष्णु को तुलसी पत्ते, कमल के फूल और पीले फूल चग़ाएं।

प्र.वैकुंठ एकादशी में कौन से व्यंजन बनते हैं?

तुलसी जल (पवित्र तुलसी का पानी), फल (एकादशी व्रत फल), दूध और दही, साबूदाना खिचड़ी, मीठा पोंगल (शक्कराई पोंगल), पनकम (गुड़-काली मिर्च पेय)

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