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क्षेत्रीय त्योहार — हिंदू पवित्र उत्सव

थाई पूसम (थाईपूसम)

देवता भगवान मुरुगन (कार्तिकेय)
माह थाई (जनवरी/फरवरी)
क्षेत्र तमिलनाडु (पलनी, तिरुचेंदुर), मलेशिया (बातू गुफाएं), सिंगापुर, मॉरीशस

संक्षिप्त परिचय

थाई पूसम तमिल महीने थाई की पूर्णिमा को पूसम (पुष्य) तारे के उदय के समय मनाया जाता है। यह उस अवसर का स्मरण है जब देवी पार्वती ने मुरुगन को वेल दिया था। अपनी तीव्र कावडी तपस्या के लिए विश्व प्रसिद्ध यह त्योहार पलनी और बातू गुफाओं में लाखों भक्तों को आकर्षित करता है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

महत्व

दैवीय इच्छा की राक्षसी शक्तियों पर विजय और तपस्या व भक्ति की शक्ति का प्रतीक। कावडी तपस्या मुरुगन के प्रति भक्त के पूर्ण समर्पण और संकट के समय की गई मन्नतों की पूर्ति का प्रतीक है।

अनुष्ठान और परंपराएं

भक्त पहले से कई दिनों या हफ्तों तक कठोर उपवास और ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। कावडी ले जाना। वेल की सुइयों और हुकों से शरीर भेदन। मंदिर परिक्रमा। सिर मुंडवाना।

पारंपरिक व्यंजन

पंचामृतमदूध (पाल कावडी)कोझुकट्टाईकेला (नेंथ्र पझम)गन्ने का रसवेल्ल पुट्टू

सामान्य प्रश्न

प्र.थाई पूसम (थाईपूसम) क्या है?

थाई पूसम तमिल महीने थाई की पूर्णिमा को पूसम (पुष्य) तारे के उदय के समय मनाया जाता है। यह उस अवसर का स्मरण है जब देवी पार्वती ने मुरुगन को वेल दिया था। अपनी तीव्र कावडी तपस्या के लिए विश्व प्रसिद्ध यह त्योहार पलनी और बातू गुफाओं में लाखों भक्तों को आक...

प्र.थाई पूसम (थाईपूसम) का क्या महत्व है?

दैवीय इच्छा की राक्षसी शक्तियों पर विजय और तपस्या व भक्ति की शक्ति का प्रतीक। कावडी तपस्या मुरुगन के प्रति भक्त के पूर्ण समर्पण और संकट के समय की गई मन्नतों की पूर्ति का प्रतीक है।

प्र.थाई पूसम (थाईपूसम) के अनुष्ठान क्या हैं?

भक्त पहले से कई दिनों या हफ्तों तक कठोर उपवास और ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। कावडी ले जाना। वेल की सुइयों और हुकों से शरीर भेदन। मंदिर परिक्रमा। सिर मुंडवाना।

प्र.थाई पूसम (थाईपूसम) में कौन से व्यंजन बनते हैं?

पंचामृतम, दूध (पाल कावडी), कोझुकट्टाई, केला (नेंथ्र पझम), गन्ने का रस, वेल्ल पुट्टू

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