क्षेत्रीय त्योहार — हिंदू पवित्र उत्सव
रामलीला (रामायण नाट्य प्रदर्शन)
संक्षिप्त परिचय
रामलीला भारत की सबसे पुरानी और प्रिय जीवंत नाट्य परंपराओं में से एक है — नवरात्रि के दौरान उत्तर भारत के हजारों कस्बों और गाँवों में हर वर्ष खुले मंच पर रामायण का दस-रात्रि नाट्य मंचन, जिसकी परिणति दशहरे (विजया दशमी) को रावण के विशाल पुतले के दहन के साथ होती है। यह परंपरा दिल्ली के रामलीला मैदान और वाराणसी में सबसे समृद्ध रूप से मनाई जाती है, जहाँ रामनगर की रामलीला (1830 से काशी नरेश के संरक्षण में) यूनेस्को द्वारा मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता प्राप्त है। राम, सीता, लक्ष्मण की भूमिका के लिए युवा ब्राह्मण बालकों का चयन होता है जो वेशभूषा धारण करने के बाद दिव्य अवतार माने जाते हैं।
अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
महत्व
रामलीला एक साथ भक्तिपूर्ण नाट्य, सामुदायिक अनुष्ठान और जीवंत धर्मग्रंथ है — उत्तर भारत की मुख्यतः मौखिक संस्कृतियों के लिए वार्षिक रामलीला सदियों तक रामायण को पीढ़ी दर पीढ़ी प्रसारित करने का प्राथमिक माध्यम थी। तुलसीदास की रामचरितमानस (16वीं शताब्दी में अवधी में रचित) अधिकांश रामलीलाओं का पाठ्य आधार है। दशहरे पर रावण का दहन — लाखों लोगों के साक्षी में — इस ब्रह्मांडीय सिद्धांत को साकार करता है कि अधर्म का अंततः धर्म द्वारा नाश होता है।
अनुष्ठान और परंपराएं
दस रातों में से अधिक से अधिक रामलीला प्रदर्शनों में भाग लें — प्रत्येक रात रामायण के एक अलग प्रसंग का मंचन होता है। राम और सीता की भूमिका निभाने वाले बाल कलाकारों को माला और प्रसाद अर्पित करें — वे प्रदर्शन के दौरान दिव्य अवतार माने जाते हैं। लंका दहन की रात "हनुमान" अभिनेता द्वारा लंका के पुतले में आग लगाने का दृश्य देखें। दशहरे (दसवें दिन) पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के तीन विशाल पुतलों का दहन देखें। दस दिनों में प्रतिदिन रामचरितमानस के दोहे पढ़ें।
पारंपरिक व्यंजन
सामान्य प्रश्न
प्र.रामलीला (रामायण नाट्य प्रदर्शन) क्या है?
रामलीला भारत की सबसे पुरानी और प्रिय जीवंत नाट्य परंपराओं में से एक है — नवरात्रि के दौरान उत्तर भारत के हजारों कस्बों और गाँवों में हर वर्ष खुले मंच पर रामायण का दस-रात्रि नाट्य मंचन, जिसकी परिणति दशहरे (विजया दशमी) को रावण के विशाल पुतले के दहन के ...
प्र.रामलीला (रामायण नाट्य प्रदर्शन) का क्या महत्व है?
रामलीला एक साथ भक्तिपूर्ण नाट्य, सामुदायिक अनुष्ठान और जीवंत धर्मग्रंथ है — उत्तर भारत की मुख्यतः मौखिक संस्कृतियों के लिए वार्षिक रामलीला सदियों तक रामायण को पीढ़ी दर पीढ़ी प्रसारित करने का प्राथमिक माध्यम थी। तुलसीदास की रामचरितमानस (16वीं शताब्दी में अवधी में रचित) अधिकांश रामलीलाओं का पाठ्य आधार है। दशहरे पर रावण का दहन — लाखों लोगों के साक्षी में — इस ब्रह्मांडीय सिद्धांत को साकार करता है कि अधर्म का अंततः धर्म द्वारा नाश होता है।
प्र.रामलीला (रामायण नाट्य प्रदर्शन) के अनुष्ठान क्या हैं?
दस रातों में से अधिक से अधिक रामलीला प्रदर्शनों में भाग लें — प्रत्येक रात रामायण के एक अलग प्रसंग का मंचन होता है। राम और सीता की भूमिका निभाने वाले बाल कलाकारों को माला और प्रसाद अर्पित करें — वे प्रदर्शन के दौरान दिव्य अवतार माने जाते हैं। लंका दहन की रात "हनुमान" अभिनेता द्वारा लंका के पुतले में आग लगाने का दृश्य देखें। दशहरे (दसवें दिन) पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के तीन विशाल पुतलों का दहन देखें। दस दिनों में प्रतिदिन रामचरितमानस के दोहे पढ़ें।
प्र.रामलीला (रामायण नाट्य प्रदर्शन) में कौन से व्यंजन बनते हैं?
पूरी सब्जी (तली पूरी और आलू की सब्जी — रामलीला मेले का क्लासिक भोजन), जलेबी और रबड़ी, चाट (आलू टिक्की, गोलगप्पा, दही भल्ला — रामलीला मैदान का स्ट्रीट फूड), खीर (प्रसाद के रूप में), पंचामृत (आरती में राम अभिषेक में), इमरती (घी में तली मसूर की मिठाई), सत्तू शरबत (भुने चने का शीतल पेय)