आज: वैदिक ज्योतिष · प्राचीन · सटीक · मुफ्त
खंड १ · अंक १ · स्था. MMXXVIशुक्रवार, 24 अप्रैल 2026मुफ्त · वैदिक · सटीक
VedicBirth
वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना

फसल त्योहार — हिंदू पवित्र उत्सव

पोंगल

देवता सूर्य देवता, इंद्र, पशुधन
माह थाई (जनवरी 14–17)
क्षेत्र तमिलनाडु (सबसे भव्य); विश्वभर में तमिल प्रवासी

संक्षिप्त परिचय

पोंगल तमिल का सबसे महत्वपूर्ण फसल उत्सव है, जो थाई मास (जनवरी मध्य) में चार दिनों तक मनाया जाता है। यह मकर संक्रांति के साथ मेल खाता है और शीतकालीन अयनांत के अंत और सूर्य की उत्तरायण यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है। "पोंगल" का अर्थ है "उबल कर बाहर आना" — मिट्टी के बर्तन में नए चावल को दूध और गुड़ के साथ उबालने की रस्म का संदर्भ है जब तक वह उफन न जाए, जो प्रचुरता का प्रतीक है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

महत्व

फसल के लिए सूर्य, वर्षा और खेत के जानवरों के प्रति कृतज्ञता। पोंगल प्रचुरता की भावना का प्रतिनिधित्व करता है — "हमारा जीवन उबलते बर्तन की तरह उफने।" यह विश्वभर में तमिल समुदायों के लिए सबसे सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण त्योहार है।

अनुष्ठान और परंपराएं

दिन 1 (भोगी): अलाव में पुरानी घरेलू वस्तुएं जलाएं। दिन 2 (सूर्य पोंगल): बाहर मिट्टी के बर्तन में चावल, दूध और गुड़ उबालें जब तक उफने; सूर्य को अर्पित करें। दिन 3 (मट्टू पोंगल): मवेशियों को नहलाएं और माला व रंग से सजाएं। दिन 4 (कानुम पोंगल): परिवार से मिलें, प्रवेश द्वार पर कोलम बनाएं।

पारंपरिक व्यंजन

पोंगल (मीठा चावल-दाल व्यंजन)चक्करई पोंगल (गुड़ चावल)वेन पोंगल (नमकीन)पायसममुरुक्कूवड़ागन्ना

सामान्य प्रश्न

प्र.पोंगल क्या है?

पोंगल तमिल का सबसे महत्वपूर्ण फसल उत्सव है, जो थाई मास (जनवरी मध्य) में चार दिनों तक मनाया जाता है। यह मकर संक्रांति के साथ मेल खाता है और शीतकालीन अयनांत के अंत और सूर्य की उत्तरायण यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है। "पोंगल" का अर्थ है "उबल कर बाहर आना"...

प्र.पोंगल का क्या महत्व है?

फसल के लिए सूर्य, वर्षा और खेत के जानवरों के प्रति कृतज्ञता। पोंगल प्रचुरता की भावना का प्रतिनिधित्व करता है — "हमारा जीवन उबलते बर्तन की तरह उफने।" यह विश्वभर में तमिल समुदायों के लिए सबसे सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण त्योहार है।

प्र.पोंगल के अनुष्ठान क्या हैं?

दिन 1 (भोगी): अलाव में पुरानी घरेलू वस्तुएं जलाएं। दिन 2 (सूर्य पोंगल): बाहर मिट्टी के बर्तन में चावल, दूध और गुड़ उबालें जब तक उफने; सूर्य को अर्पित करें। दिन 3 (मट्टू पोंगल): मवेशियों को नहलाएं और माला व रंग से सजाएं। दिन 4 (कानुम पोंगल): परिवार से मिलें, प्रवेश द्वार पर कोलम बनाएं।

प्र.पोंगल में कौन से व्यंजन बनते हैं?

पोंगल (मीठा चावल-दाल व्यंजन), चक्करई पोंगल (गुड़ चावल), वेन पोंगल (नमकीन), पायसम, मुरुक्कू, वड़ा, गन्ना

संबंधित त्योहार