क्षेत्रीय त्योहार — हिंदू पवित्र उत्सव
नवरात्रि गरबा (गुजरात)
संक्षिप्त परिचय
गुजरात की नवरात्रि दुनिया का सबसे लंबा निरंतर नृत्य उत्सव है, जहां लाखों लोग अंबा माता के सम्मान में लगातार नौ रातों तक गरबा और डांडिया-रास नृत्य करते हैं। गरबा — एक मिट्टी के दीपक (गरबो) या देवी की छवि के चारों ओर किया जाने वाला वृत्ताकार भक्ति नृत्य — एक प्राचीन लोक परंपरा है जो एक भव्य सामूहिक उत्सव में विकसित हो गई है। प्रतिभागी दर्पण के काम से कढ़े चमकीले चनिया चोली और केडियू पहनते हैं। UNESCO ने 2023 में गरबा को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया। नौ रातें नौ देवियों (नवदुर्गा) के नौ स्वरूपों के अनुरूप हैं, और प्रत्येक शाम विशेष पूजा के बाद नृत्य शुरू होता है।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
महत्व
गरबा केवल नृत्य नहीं बल्कि एक चलती-फिरती ध्यान और पूजा की विधि है — वृत्ताकार गति काल के चक्र और दिव्य के चारों ओर भक्त की परिक्रमा का प्रतीक है। नवरात्रि भैंसे-रूपी राक्षस महिषासुर पर देवी की ब्रह्मांडीय विजय का उत्सव है। गुजरातियों के लिए नवरात्रि सांस्कृतिक पहचान की अभिव्यक्ति और सामुदायिक एकता का समय है जब नृत्य के मैदान में सामाजिक बाधाएं मिट जाती हैं।
अनुष्ठान और परंपराएं
एक पवित्र मिट्टी के घड़े (गरबो) में दीप जलाकर स्थापित करें — यह देवी के गर्भ का प्रतीक है — और प्रत्येक रात के नृत्य से पहले अंबा माता की आरती करें। दिन में उपवास रखें और केवल सात्विक भोजन से व्रत तोड़ें। पारंपरिक गुजराती परिधान पहनें — महिलाएं चनिया चोली और पुरुष केडिया-धोती। शाम के पहले भाग में देवी की छवि या गरबो के चारों ओर वृत्तों में गरबा करें। आधी रात के बाद सजे हुए डंडों से जोड़ियों में डांडिया-रास करें। नवमी पर कन्या पूजा करें — युवा लड़कियों को देवी के स्वरूप के रूप में सम्मानित करें।
पारंपरिक व्यंजन
सामान्य प्रश्न
प्र.नवरात्रि गरबा (गुजरात) क्या है?
गुजरात की नवरात्रि दुनिया का सबसे लंबा निरंतर नृत्य उत्सव है, जहां लाखों लोग अंबा माता के सम्मान में लगातार नौ रातों तक गरबा और डांडिया-रास नृत्य करते हैं। गरबा — एक मिट्टी के दीपक (गरबो) या देवी की छवि के चारों ओर किया जाने वाला वृत्ताकार भक्ति नृत्...
प्र.नवरात्रि गरबा (गुजरात) का क्या महत्व है?
गरबा केवल नृत्य नहीं बल्कि एक चलती-फिरती ध्यान और पूजा की विधि है — वृत्ताकार गति काल के चक्र और दिव्य के चारों ओर भक्त की परिक्रमा का प्रतीक है। नवरात्रि भैंसे-रूपी राक्षस महिषासुर पर देवी की ब्रह्मांडीय विजय का उत्सव है। गुजरातियों के लिए नवरात्रि सांस्कृतिक पहचान की अभिव्यक्ति और सामुदायिक एकता का समय है जब नृत्य के मैदान में सामाजिक बाधाएं मिट जाती हैं।
प्र.नवरात्रि गरबा (गुजरात) के अनुष्ठान क्या हैं?
एक पवित्र मिट्टी के घड़े (गरबो) में दीप जलाकर स्थापित करें — यह देवी के गर्भ का प्रतीक है — और प्रत्येक रात के नृत्य से पहले अंबा माता की आरती करें। दिन में उपवास रखें और केवल सात्विक भोजन से व्रत तोड़ें। पारंपरिक गुजराती परिधान पहनें — महिलाएं चनिया चोली और पुरुष केडिया-धोती। शाम के पहले भाग में देवी की छवि या गरबो के चारों ओर वृत्तों में गरबा करें। आधी रात के बाद सजे हुए डंडों से जोड़ियों में डांडिया-रास करें। नवमी पर कन्या पूजा करें — युवा लड़कियों को देवी के स्वरूप के रूप में सम्मानित करें।
प्र.नवरात्रि गरबा (गुजरात) में कौन से व्यंजन बनते हैं?
साबूदाना खिचड़ी (नवरात्रि व्रत का प्रमुख व्यंजन), राजगिरा पूरी, सिंघाड़े का हलवा, कुट्टू की पूरी, मखाना खीर, फराली पैटिस, नारियल की बर्फी