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प्रमुख त्योहार — हिंदू पवित्र उत्सव

कुम्भ मेला

देवता भगवान विष्णु, गंगा, यमुना, सरस्वती
माह हर 3 वर्ष पर घूर्णन स्थलों पर; महाकुम्भ हर 12 वर्ष पर (जनवरी/फरवरी)
क्षेत्र प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक, उज्जैन

संक्षिप्त परिचय

कुम्भ मेला विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक समागम है, जो चार पवित्र नदी संगमों — प्रयागराज (त्रिवेणी संगम), हरिद्वार, नासिक और उज्जैन — पर 12 वर्षीय चक्र में आयोजित होता है। इसकी उत्पत्ति समुद्र मंथन से जुड़ी है, जिसमें अमृत की बूंदें इन चारों स्थानों पर गिरी थीं। श्रद्धालु मानते हैं कि कुम्भ में पवित्र स्नान सभी पापों को धो देता है और पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति दिलाता है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

महत्व

शाही स्नान तिथियों पर कुम्भ स्नान मोक्ष प्रदान करता है। यह समस्त हिंदू आध्यात्मिक परंपराओं की एकता का प्रतीक है। यूनेस्को द्वारा मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता प्राप्त है।

अनुष्ठान और परंपराएं

शुभ तिथियों पर शाही स्नान — विशेषकर मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी। संगम में पवित्र डुबकी लगाएं। नागा साधुओं और अखाड़ों की शोभायात्रा में भाग लें। आध्यात्मिक प्रवचन सुनें। साधुओं को भोजन और वस्त्र दान करें।

पारंपरिक व्यंजन

खिचड़ीहलवापूरीचनाप्रसाद लड्डू

सामान्य प्रश्न

प्र.कुम्भ मेला क्या है?

कुम्भ मेला विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक समागम है, जो चार पवित्र नदी संगमों — प्रयागराज (त्रिवेणी संगम), हरिद्वार, नासिक और उज्जैन — पर 12 वर्षीय चक्र में आयोजित होता है। इसकी उत्पत्ति समुद्र मंथन से जुड़ी है, जिसमें अमृत की बूंदें इन चारों स्थानों पर ग...

प्र.कुम्भ मेला का क्या महत्व है?

शाही स्नान तिथियों पर कुम्भ स्नान मोक्ष प्रदान करता है। यह समस्त हिंदू आध्यात्मिक परंपराओं की एकता का प्रतीक है। यूनेस्को द्वारा मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता प्राप्त है।

प्र.कुम्भ मेला के अनुष्ठान क्या हैं?

शुभ तिथियों पर शाही स्नान — विशेषकर मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी। संगम में पवित्र डुबकी लगाएं। नागा साधुओं और अखाड़ों की शोभायात्रा में भाग लें। आध्यात्मिक प्रवचन सुनें। साधुओं को भोजन और वस्त्र दान करें।

प्र.कुम्भ मेला में कौन से व्यंजन बनते हैं?

खिचड़ी, हलवा, पूरी, चना, प्रसाद लड्डू

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