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क्षेत्रीय त्योहार — हिंदू पवित्र उत्सव

कावड़ी उत्सव (कावड़ी आट्टम)

देवता भगवान मुरुगन (सुब्रमण्य)
माह थाई / पंगुनी (जनवरी-मार्च)
क्षेत्र तमिलनाडु, केरल, श्रीलंका, मलेशिया, सिंगापुर

संक्षिप्त परिचय

कावड़ी उत्सव या कावड़ी आट्टम, भगवान मुरुगन को समर्पित एक भक्ति प्रथा और त्योहार है जिसमें भक्त कावड़ी — एक शारीरिक बोझ या सजावटी जुआ — को आभार और मन्नत पूरी करने के रूप में ले जाते हैं। यह प्रथा थाईपुसम और पंगुनी उत्तिरम के दौरान सबसे प्रमुखता से होती है।

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

महत्व

भगवान मुरुगन के प्रति पूर्ण समर्पण, पवित्र मन्नतों की पूर्ति, पिछले पापों का प्रायश्चित और आध्यात्मिक मुक्ति। कावड़ी वाहक देवता को एक जीवित भेंट बन जाता है।

अनुष्ठान और परंपराएं

त्योहार से पहले हफ्तों तक उपवास और ब्रह्मचर्य। अनुष्ठान स्नान और पीले/नारंगी कपड़े पहनना। शरीर छेदन के साथ दूध के बर्तन की कावड़ी या वेल कावड़ी ले जाना। पूरे जुलूस में "वेल वेल मुरुगा" का जाप। गर्म जमीन पर नंगे पांव चलना।

पारंपरिक व्यंजन

पाल (दूध)पंचामृतमफलों का भोगकोझुकट्टईनेई पोंगलसर्करई पोंगल

सामान्य प्रश्न

प्र.कावड़ी उत्सव (कावड़ी आट्टम) क्या है?

कावड़ी उत्सव या कावड़ी आट्टम, भगवान मुरुगन को समर्पित एक भक्ति प्रथा और त्योहार है जिसमें भक्त कावड़ी — एक शारीरिक बोझ या सजावटी जुआ — को आभार और मन्नत पूरी करने के रूप में ले जाते हैं। यह प्रथा थाईपुसम और पंगुनी उत्तिरम के दौरान सबसे प्रमुखता से होत...

प्र.कावड़ी उत्सव (कावड़ी आट्टम) का क्या महत्व है?

भगवान मुरुगन के प्रति पूर्ण समर्पण, पवित्र मन्नतों की पूर्ति, पिछले पापों का प्रायश्चित और आध्यात्मिक मुक्ति। कावड़ी वाहक देवता को एक जीवित भेंट बन जाता है।

प्र.कावड़ी उत्सव (कावड़ी आट्टम) के अनुष्ठान क्या हैं?

त्योहार से पहले हफ्तों तक उपवास और ब्रह्मचर्य। अनुष्ठान स्नान और पीले/नारंगी कपड़े पहनना। शरीर छेदन के साथ दूध के बर्तन की कावड़ी या वेल कावड़ी ले जाना। पूरे जुलूस में "वेल वेल मुरुगा" का जाप। गर्म जमीन पर नंगे पांव चलना।

प्र.कावड़ी उत्सव (कावड़ी आट्टम) में कौन से व्यंजन बनते हैं?

पाल (दूध), पंचामृतम, फलों का भोग, कोझुकट्टई, नेई पोंगल, सर्करई पोंगल

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