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क्षेत्रीय त्योहार — हिंदू पवित्र उत्सव

गणगौर

देवता गौरी (पार्वती) और ईसर (शिव)
माह चैत्र (मार्च/अप्रैल) — होली से 18 दिन
क्षेत्र राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात (राजस्थानी समुदाय)

संक्षिप्त परिचय

गणगौर राजस्थान के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, जो देवी गौरी (पार्वती) और उनके पति ईसर (शिव) को समर्पित है। "गण" शिव का स्थानीय नाम है और "गौर" गौरी (पार्वती) का। यह त्योहार मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा मनाया जाता है — अविवाहित लड़कियां ईसर जैसे अच्छे पति की कामना करती हैं, जबकि विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं। होली के अगले दिन से 18 दिनों तक महिलाएं गौरी और ईसर की मिट्टी की मूर्तियों की पूजा करती हैं और गणगौर तृतीया पर भव्य जुलूस के साथ उत्सव समाप्त होता है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

महत्व

गणगौर गौरी और शिव के दिव्य विवाह का उत्सव है, जो आदर्श दाम्पत्य बंधन का प्रतीक है। अविवाहित महिलाएं शिव जैसा समर्पित पति पाने के लिए गौरी की पूजा करती हैं। विवाहित महिलाएं वैवाहिक सुख और पति की दीर्घायु के लिए गौरी का आशीर्वाद मांगती हैं। यह त्योहार वसंत के आगमन, धरती की उर्वरता और शुष्क सर्दी के बाद जीवन के नवीनीकरण का भी उत्सव है।

अनुष्ठान और परंपराएं

गौरी और ईसर की मिट्टी की मूर्तियां बनाएं (या कुम्हार से खरीदें)। महिलाएं 18 दिनों तक रोज़ फूल, अगरबत्ती, सिन्दूर और गीतों से मूर्तियों की पूजा करें। हाथों पर मेहंदी लगाएं। पारंपरिक घूमर और गणगौर गीत गाएं। गणगौर तृतीया को: मूर्तियों को नए वस्त्र पहनाएं, उन्हें झील/नदी तक जुलूस में ले जाएं और विसर्जित करें। पारंपरिक राजस्थानी परिधान और आभूषण पहनें। साथ में उत्सव का भोजन करें।

पारंपरिक व्यंजन

घेवरपूरन पोलीमालपुआगुजियाखीरलहसुन चटनी के साथ बाजरे की रोटीदाल बाटी चूरमा

सामान्य प्रश्न

प्र.गणगौर क्या है?

गणगौर राजस्थान के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, जो देवी गौरी (पार्वती) और उनके पति ईसर (शिव) को समर्पित है। "गण" शिव का स्थानीय नाम है और "गौर" गौरी (पार्वती) का। यह त्योहार मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा मनाया जाता है — अविवाहित लड़कियां ईसर ...

प्र.गणगौर का क्या महत्व है?

गणगौर गौरी और शिव के दिव्य विवाह का उत्सव है, जो आदर्श दाम्पत्य बंधन का प्रतीक है। अविवाहित महिलाएं शिव जैसा समर्पित पति पाने के लिए गौरी की पूजा करती हैं। विवाहित महिलाएं वैवाहिक सुख और पति की दीर्घायु के लिए गौरी का आशीर्वाद मांगती हैं। यह त्योहार वसंत के आगमन, धरती की उर्वरता और शुष्क सर्दी के बाद जीवन के नवीनीकरण का भी उत्सव है।

प्र.गणगौर के अनुष्ठान क्या हैं?

गौरी और ईसर की मिट्टी की मूर्तियां बनाएं (या कुम्हार से खरीदें)। महिलाएं 18 दिनों तक रोज़ फूल, अगरबत्ती, सिन्दूर और गीतों से मूर्तियों की पूजा करें। हाथों पर मेहंदी लगाएं। पारंपरिक घूमर और गणगौर गीत गाएं। गणगौर तृतीया को: मूर्तियों को नए वस्त्र पहनाएं, उन्हें झील/नदी तक जुलूस में ले जाएं और विसर्जित करें। पारंपरिक राजस्थानी परिधान और आभूषण पहनें। साथ में उत्सव का भोजन करें।

प्र.गणगौर में कौन से व्यंजन बनते हैं?

घेवर, पूरन पोली, मालपुआ, गुजिया, खीर, लहसुन चटनी के साथ बाजरे की रोटी, दाल बाटी चूरमा

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