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Goddess Saraswati · Devotional Hymn

सरस्वती चालीसा

Saraswati Chalisa

DeityGoddess Saraswati
Verses40 Chaupais
LanguageHindi (Devanagari)

Saraswati Chalisa invokes Goddess Saraswati, the deity of knowledge, arts, music, and wisdom. It is the prayer of students, scholars, artists, and musicians seeking divine intelligence and creativity.

Last updated: 19 April 2026 · Traditional Vedic devotional text

Benefits of Saraswati Chalisa

  • ·Excellence in studies and academics
  • ·Artistic and creative inspiration
  • ·Eloquence and command over language
  • ·Sharp memory and analytical intelligence

Best Time to Recite

Vasant Panchami (Saraswati Puja), Thursday, and before studies or artistic practice.

सरस्वती चालीसा — पाठ

॥ श्री सरस्वती चालीसा ॥

दोहा

जनक जानकी हरण करि, राखे सिय की लाज। सरस्वती की कृपा बिन, काव्य न हो आज॥

1

जय सरस्वती माँ जग वंदनी। ज्ञान बुद्धि विद्या की अर्चनी॥

2

शुभ्र वसन धारिणी वीणापाणि। हंस वाहिनी जग की रानी॥

3

चार भुजा मन मोहन रूपा। स्वर्ण मुकुट शोभित सुर-भूपा॥

4

पुस्तक-दायिनी माला-धारणी। बुद्धि-प्रदायिनी कला-विभूषिनी॥

5

सरस्वती माँ तुम विद्या-दात्री। तुम्हीं हो ज्ञान की कलावात्री॥

6

वेद-विद्या की तुम अधिष्ठात्री। सकल शास्त्र की परम ज्ञात्री॥

7

विद्यार्थी जन ध्यान लगावें। तव कृपा से विजय पावें॥

8

कवि लेखक जो पाठ करे। वाणी सिद्धि फल खूब भरे॥

9

संगीत-कला में पूर्णता पावे। जो नित तव चालीसा गावे॥

10

ब्रह्मा-मानसी जगत-जननी। शारदा देवी भव-भयहरणी॥

11

तुम्हीं हो मातु कृपालु अम्बे। तुम्हीं हो विद्या-विमला-स्तम्भे॥

12

जो भी सेवक शरण में आवे। ज्ञान-विज्ञान में दक्ष हो जावे॥

13

मूढ़ बुद्धि को तुम सुधारो। हम पर कृपा-दृष्टि विस्तारो॥

14

वाणी में मधुरता भर दो माँ। हृदय में ज्ञान-ज्योति जगा दो माँ॥

15

तुम गायत्री माँ वेद-जननी। तुम्हीं हो सृष्टि की आदि-रचयित्री॥

16

नवरात्रि में पूजा करें। सरस्वती माँ कृपा भरें॥

17

वसंत पंचमी सबसे शुभ जानो। इस दिन माँ को ध्यान से मानो॥

18

श्वेत पुष्प से पूजन करें। माँ सरस्वती का आशीर्वाद वरें॥

19

विद्यालय और ज्ञान-मंदिर में। माँ का वास हो सब कंदर में॥

20

जो ध्यान लगाकर यह पढ़े। सो परीक्षा में आगे बढ़े॥

21

तर्क-वितर्क में जो उलझे। माँ से प्रार्थना करे सुलझे॥

22

कला में प्रवीणता जो चाहे। सरस्वती माँ की शरण में आये॥

23

नृत्य संगीत चित्र कलाधारी। माँ देती सबको वरदान भारी॥

24

प्रतिभा की तुम हो आधार माँ। हर कला का तुमसे है संसार माँ॥

25

गुरु-शिष्य परम्परा की रक्षक। विद्या परम्परा की भव-दक्षक॥

26

चारों वेद तुम्हारे उद्गम से। ज्ञान प्रवाहित हुआ संसार में॥

27

उपनिषद और दर्शन-शास्त्र। सब तुम्हारे ही ज्ञान-पात्र॥

28

मूर्खों को भी ज्ञानी बनाओ। साधकों को मुक्ति दिलाओ॥

29

भक्ति-ज्ञान-वैराग्य की दात्री। तुम्हीं हो माँ मोक्ष-सुख-विधात्री॥

30

जिह्वा पर तुम नित वास करो। शब्द-शब्द में शक्ति भरो॥

31

स्मृति-शक्ति तीव्र कर दो माई। पाठ करे नित मिले सहाई॥

32

परीक्षा में जो सफल हो जाये। माँ का ध्यान करे, मन में आये॥

33

बुद्धि विशारद तव प्रताप से। ज्ञान मिले तव कृपा-स्वभाव से॥

34

सरस्वती की जय जय करते। विद्या की गंगा में सब तरते॥

35

जो यह पाठ नित्य दोहरावे। सो नित नव ज्ञान प्रकाश पावे॥

36

कवि साहित्यकार और गायक। माँ को मानें नित नित नायक॥

37

तुम बिन ज्ञान-विज्ञान न होवे। तुम बिन सृष्टि सूनी-सी होवे॥

38

जय जय जय माँ वीणावादिनी। तुम हो जग की सब विधि साधिनी॥

39

यह चालीसा पढ़े जो भाई। सरस्वती माँ करें सहाई॥

40

विद्यार्थी को विद्या दीजे। साधक को मुक्ति-पद दीजे॥

दोहा

सरस्वती की वंदना, करत सदा हम नाम। बुद्धि विद्या ज्ञान दो, पूरण करो सब काम॥

Frequently Asked Questions

Q.What are the benefits of Saraswati Chalisa?

Saraswati Chalisa sharpens memory and intelligence, improves academic performance, enhances artistic creativity, and grants eloquence in speech and writing. It is especially beneficial for students before exams and for creative professionals.

Q.When is the best time to recite Saraswati Chalisa?

Vasant Panchami (Saraswati Puja, usually January–February), Thursday, and early morning before studies. Reciting it before an important exam, interview, or creative performance is a traditional practice.

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