Goddess Lakshmi · Devotional Hymn
लक्ष्मी चालीसा
Lakshmi Chalisa
Lakshmi Chalisa is a devotional hymn to Goddess Lakshmi, the deity of wealth, prosperity, and fortune. Recited especially on Fridays and Diwali, it attracts wealth, removes financial obstacles, and brings domestic harmony.
Last updated: 19 April 2026 · Traditional Vedic devotional text
Benefits of Lakshmi Chalisa
- ·Attraction of wealth and financial prosperity
- ·Removal of poverty and debt
- ·Business success and career growth
- ·Domestic harmony and marital happiness
Best Time to Recite
Friday, Diwali, Kojagari Purnima (full moon of Ashvin), and during Lakshmi Puja.
लक्ष्मी चालीसा — पाठ
॥ श्री लक्ष्मी चालीसा ॥
दोहा
मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास। मनोकामना सिद्ध कर, पुरवहु मेरी आस॥
॥ 1 ॥
सिंधु-सुता मैं सुमरौं तोही। ज्ञान बुद्धि विद्या दो मोही॥
॥ 2 ॥
तुम समान नहिं कोई उपकारी। सकल विश्व की तुम हितकारी॥
॥ 3 ॥
जय जय जगत जननी जगदम्बा। सबकी तुम हो आदि अम्बा॥
॥ 4 ॥
तुम हो जग की पालन हारी। दया दृष्टि सब पर तुम्हारी॥
॥ 5 ॥
विष्णु प्रिया प्रकटी भव सागर। कमला नाम जगत में उजागर॥
॥ 6 ॥
आदि लक्ष्मी तुम जग की माता। पालन करत हो सब जग त्राता॥
॥ 7 ॥
सिंह वाहिनी धन दायिनी देवी। भक्त जनन की प्रिय सेवी॥
॥ 8 ॥
कमल पुष्प पर बिराजती माई। चार भुजा में शोभा पाई॥
॥ 9 ॥
हस्त कमल नित वर देत। भक्त जनन का दुख हरती॥
॥ 10 ॥
महालक्ष्मी जय श्री लक्ष्मी। सर्व सुख दायिनी जग लक्ष्मी॥
॥ 11 ॥
मैं तुमरो सेवक अनुरागी। तुम सब की हो मंगल दागी॥
॥ 12 ॥
राजलक्ष्मी वरलक्ष्मी माई। धनलक्ष्मी जग में यश पाई॥
॥ 13 ॥
गजलक्ष्मी संतान सुखदाई। सौभाग्य लक्ष्मी जग में आई॥
॥ 14 ॥
विजयलक्ष्मी विद्यालक्ष्मी भारी। धैर्यलक्ष्मी रोग विनाशकारी॥
॥ 15 ॥
जो कोई तुमको ध्यान लगावे। सो निश्चय वांछित फल पावे॥
॥ 16 ॥
तुम हो दया दृष्टि की दानी। त्रिभुवन जन की दुख हरनी॥
॥ 17 ॥
देवी शक्ति जगत में न्यारी। करहु सदा भक्तन हितकारी॥
॥ 18 ॥
विष्णु वक्ष पर रहो विराजी। जगत जनन जय महाराजी॥
॥ 19 ॥
जगत-जननी दुख हारिणी माई। तुम बिन और न कोई सहाई॥
॥ 20 ॥
माँ तुम बिन जगत अंधेरा। पड़ा हुआ है भ्रम का फेरा॥
॥ 21 ॥
तव प्रकाश से जग उजियारा। तुम्हीं हो जग की पालनहारा॥
॥ 22 ॥
जो नर तुम्हरी भक्ति करे। सो नित मंगलमय जीवन भरे॥
॥ 23 ॥
दरिद्रता दूर करो माई। सुख-समृद्धि घर-घर पहुँचाई॥
॥ 24 ॥
पुत्र-पुत्री सुख-संपद दीजे। सुख-समृद्धि हमको अर्पीजे॥
॥ 25 ॥
रोग शोक दुख दूर हटाओ। सुख और शांति हमें पहुँचाओ॥
॥ 26 ॥
सुमिरन करते जो नर नारी। उन पर होती कृपा तुम्हारी॥
॥ 27 ॥
शुक्रवार को व्रत जो करे। लक्ष्मी प्रसाद उसे भर भरे॥
॥ 28 ॥
दीपावली पर पूजन कीजे। घर-घर धन-वैभव भरि दीजे॥
॥ 29 ॥
शंख बजाकर करहु आरती। सुख समृद्धि की भरहु थाली॥
॥ 30 ॥
पुष्प चढ़ाकर करहु प्रणाम। लक्ष्मी देती सब विश्राम॥
॥ 31 ॥
जो नर लक्ष्मी चालीसा गावे। धन धान्य घर में भरि पावे॥
॥ 32 ॥
व्यापार में वृद्धि सो पावे। जो ध्यान से पाठ लगावे॥
॥ 33 ॥
नित नव मंगल प्रगट होई। कष्ट न उसके रहे कोई॥
॥ 34 ॥
कमलासन पर बिराजो माता। हम सब की हो जन्म जन्म त्राता॥
॥ 35 ॥
भक्ति भाव से जो स्तुति करे। लक्ष्मी कृपा उस पर भरि भरे॥
॥ 36 ॥
दुखी दरिद्री जो जन आवे। लक्ष्मी उसे सुखी कर जावे॥
॥ 37 ॥
देवी भगवती सदय होई। कष्ट न भक्त के रहे कोई॥
॥ 38 ॥
या चालीसा को जो ध्यावे। लक्ष्मी प्रसाद निश्चय पावे॥
॥ 39 ॥
पाठ करे शुचि ध्यान लगाई। लक्ष्मी की हो कृपा सहाई॥
॥ 40 ॥
जय लक्ष्मी माँ जय जय माता। सब भक्तों का करो उद्धारा॥
दोहा
सिंधु-सुता पद-पंकज नमामि। लक्ष्मी चालीसा पाठ फल पावे॥
Frequently Asked Questions
Q.What are the benefits of Lakshmi Chalisa?
Lakshmi Chalisa attracts wealth, removes poverty and debt, brings business success, and creates domestic harmony. It is most powerful when recited on Fridays, during Diwali, and on Kojagari Purnima.
Q.When is the best time to recite Lakshmi Chalisa?
Friday, Diwali, Kojagari Purnima (full moon of Ashvin month), and during Lakshmi Puja are the most auspicious times. Reciting after evening aarti with a lit lamp and incense maximises the benefit.