घर मंदिर वास्तु — आदर्श स्थान, मूर्ति की दिशा और स्थापना नियम
संक्षिप्त उत्तर
उत्तर-पूर्व कोना घर मंदिर के लिए आदर्श है। मूर्तियां पूर्व या पश्चिम की ओर मुख करें। शयनकक्ष, बाथरूम, सीढ़ी के नीचे या शौचालय की दीवार के सामने मंदिर न रखें।
अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वास्तु शास्त्र परंपरा
घर का मंदिर परिवार का आध्यात्मिक केंद्र है।
सर्वोत्तम स्थान: उत्तर-पूर्व
ईशान्य (उत्तर-पूर्व) दिव्य ऊर्जा का क्षेत्र है। यहां मंदिर रखना सबसे शुभ। पूर्व दूसरा सर्वोत्तम विकल्प।
मूर्ति स्थापना नियम
मूर्तियां इस प्रकार रखें कि पूजा करते समय मुख पूर्व या पश्चिम की ओर हो। मूर्तियां पिछली दीवार से थोड़ी दूर रखें।
क्या न करें
शयनकक्ष में मंदिर नहीं। बाथरूम की दीवार के सामने या सीढ़ी के नीचे नहीं। जमीन पर नहीं।
मुख्य वास्तु टिप्स
- ✓उत्तर-पूर्व या पूर्व में घर मंदिर
- ✓मूर्तियां पूर्व या पश्चिम की ओर मुख करें
- ✓शयनकक्ष या बाथरूम की दीवार के सामने नहीं
- ✓टूटी मूर्तियां न रखें — नदी में विसर्जित करें
- ✓प्रतिदिन साफ रखें, अखंड दीया रखें
FAQ — घर मंदिर वास्तु — पूजा कक्ष बनाम मंदिर, मूर्ति स्थापना
प्र.घर मंदिर में मूर्तियां किस दिशा में रखें?
मूर्तियां पूर्व या पश्चिम की ओर मुख करें ताकि पूजा करते समय आप उसी दिशा में हों।
प्र.क्या शयनकक्ष में मंदिर रख सकते हैं?
वास्तु इसके विरुद्ध है। यदि अनिवार्य हो तो दरवाजे वाले कैबिनेट मंदिर का उपयोग करें।
प्र.घर मंदिर की आदर्श ऊंचाई क्या है?
खड़े होने पर छाती की ऊंचाई पर — लगभग 2.5 से 3 फीट।