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पूजा कक्ष वास्तु — दिशा, मूर्ति स्थापना और नियम

संक्षिप्त उत्तर

पूजा कक्ष उत्तर-पूर्व कोने (ईशान कोण) में होना चाहिए। मूर्तियां पश्चिम या दक्षिण की ओर मुख करके स्थापित हों — भक्त पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके पूजा करे। मूर्तियां सीधे जमीन पर या दीवार से सटी न रखें।

अंतिम अपडेट: 20 अप्रैल 2026 · स्रोत: वास्तु शास्त्र परंपरा

वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व कोने को ईशान कोण कहा जाता है — यह दैवीय चेतना, शिव के तृतीय नेत्र और ब्रह्मांड से सूक्ष्म संबंध का क्षेत्र है। इसीलिए यह घर के पूजा स्थान के लिए स्वाभाविक और अनिवार्य स्थान है।

उत्तर-पूर्व क्यों?

उत्तर-पूर्व दिशा उगते सूर्य की पहली किरणें और उत्तर की चुंबकीय शक्ति और पूर्व की सौर ऊर्जा का संगम प्राप्त करती है। विश्वकर्मा प्रकाश (एक प्राचीन वास्तु ग्रंथ) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उत्तर-पूर्व वास्तु पुरुष का सिर है।

मूर्ति स्थापना के नियम

मूर्तियां पश्चिम या दक्षिण की ओर मुख करके स्थापित हों। मूर्तियां सीधे जमीन पर न रखें — कम से कम 6 इंच ऊंचे मंच पर रखें। मूर्तियां पीछे की दीवार से कम से कम 1 इंच दूर रखें।

विशेष देवताओं की दिशाएं

- गणेश: उत्तर या दक्षिण की ओर मुख - शिवलिंग: उत्तर की ओर मुख - लक्ष्मी: पूर्व की ओर मुख - दुर्गा/देवी: उत्तर की ओर मुख - सरस्वती: पूर्व या उत्तर की ओर मुख

क्या न करें

खंडित मूर्तियां पूजा स्थान में कभी न रखें — उन्हें नदी में विसर्जित करें। पूजा कक्ष सीढ़ी के नीचे, शौचालय के नीचे या बेडरूम के नीचे न हो। पूर्वजों की तस्वीरें देवताओं के साथ एक ही स्थान पर न रखें।

मुख्य वास्तु टिप्स

  • पूजा कक्ष उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में — सबसे शुभ कोना
  • मूर्तियां पश्चिम या दक्षिण की ओर मुख, भक्त पूर्व या उत्तर की ओर
  • मूर्तियां लकड़ी के मंच पर कम से कम 6 इंच ऊंची
  • मूर्ति और पिछली दीवार के बीच 1 इंच का अंतर
  • खंडित मूर्तियां कभी न रखें — नदी में विसर्जित करें
  • सफेद, पीला या हल्का क्रीम रंग
  • पूजा कक्ष शौचालय, बेडरूम और सीढ़ी के नीचे न हो

FAQ — पूजा कक्ष वास्तु

प्र.मूर्तियों का मुख किस दिशा में होना चाहिए?

मूर्तियां पश्चिम या दक्षिण की ओर मुख करें। गणेश उत्तर या दक्षिण में, शिवलिंग उत्तर में, लक्ष्मी पूर्व में।

प्र.क्या पूजा कक्ष दक्षिण में हो सकता है?

दक्षिण यम की दिशा है और पूजा स्थान के लिए उचित नहीं है। यदि मजबूरी हो तो तांबे/पीतल के बर्तन, पीली दीवारें और अखंड दीपक रखें।

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