अन्य पूजाएं — वैदिक पूजा विधि
विश्वकर्मा पूजा
संक्षिप्त परिचय
विश्वकर्मा पूजा भगवान विश्वकर्मा — देवताओं के दिव्य शिल्पी — को सम्मान देने के लिए मनाया जाने वाला वार्षिक उत्सव है। यह पूजा विश्वकर्मा जयंती (17 सितंबर) को मनाई जाती है और कारीगरों, इंजीनियरों और मैकेनिकों में लोकप्रिय है। इस दिन सभी औजार, मशीनें और वाहन साफ करके पूजे जाते हैं।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
कारीगरों को उत्पादकता और कौशल मिलता है, कार्यस्थल दुर्घटनाओं से सुरक्षा होती है, व्यवसायों को विकास का आशीर्वाद मिलता है, पेशेवर बाधाएं दूर होती हैं और रचनात्मकता के लिए दिव्य प्रेरणा मिलती है।
चरण-दर-चरण विधि
कार्यस्थल पर सभी औजार और मशीनें साफ करके सजाएं। भगवान विश्वकर्मा की छवि के साथ पूजा वेदी स्थापित करें। फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। विश्वकर्मा स्तोत्र पढ़ें और आरती करें। पूजा पूरी होने तक औजारों का उपयोग न करें। सभी श्रमिकों में प्रसाद वितरित करें।
शुभ मुहूर्त
विश्वकर्मा जयंती — 17 सितंबर (कन्या संक्रांति) या भाद्र माह का अंतिम दिन। प्रतिवर्ष कारखानों और कार्यालयों में कार्य समय के दौरान मनाई जाती है।
आवश्यक सामग्री
- ·विश्वकर्मा की छवि या मूर्ति
- ·औजार और उपकरण (पूजा के लिए)
- ·फूल
- ·फल
- ·मिठाई
- ·अगरबत्ती
- ·कपूर
- ·घी का दीपक
- ·पंचामृत
- ·अक्षत
- ·लाल वस्त्र
- ·नारियल
सामान्य प्रश्न
प्र.विश्वकर्मा पूजा क्या है?
विश्वकर्मा पूजा भगवान विश्वकर्मा — देवताओं के दिव्य शिल्पी — को सम्मान देने के लिए मनाया जाने वाला वार्षिक उत्सव है। यह पूजा विश्वकर्मा जयंती (17 सितंबर) को मनाई जाती है और कारीगरों, इंजीनियरों और मैकेनिकों में लोकप्रिय है। इस दिन सभी औजार, मशीनें और...
प्र.विश्वकर्मा पूजा के क्या लाभ हैं?
कारीगरों को उत्पादकता और कौशल मिलता है, कार्यस्थल दुर्घटनाओं से सुरक्षा होती है, व्यवसायों को विकास का आशीर्वाद मिलता है, पेशेवर बाधाएं दूर होती हैं और रचनात्मकता के लिए दिव्य प्रेरणा मिलती है।
प्र.विश्वकर्मा पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
विश्वकर्मा जयंती — 17 सितंबर (कन्या संक्रांति) या भाद्र माह का अंतिम दिन। प्रतिवर्ष कारखानों और कार्यालयों में कार्य समय के दौरान मनाई जाती है।
प्र.विश्वकर्मा पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
विश्वकर्मा की छवि या मूर्ति, औजार और उपकरण (पूजा के लिए), फूल, फल, मिठाई, अगरबत्ती, कपूर, घी का दीपक, पंचामृत, अक्षत, लाल वस्त्र, नारियल।