अन्य पूजाएं — वैदिक पूजा विधि
सूर्य ग्रहण पूजा
संक्षिप्त परिचय
सूर्य ग्रहण पूजा में वे सभी वैदिक अनुष्ठान सम्मिलित हैं जो सूर्य ग्रहण के दौरान सूतक काल के आरंभ से लेकर मोक्ष तक किए जाते हैं। सूर्य ग्रहण एक अत्यंत शक्तिशाली परंतु अशुभ खगोलीय घटना मानी जाती है जो ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं को अस्त-व्यस्त करती है। गृहस्थों के लिए सूतक काल ग्रहण से लगभग 12 घंटे पहले आरंभ होता है, जिसमें उपवास, भोजन न पकाना और शारीरिक-मानसिक शुद्धता बनाए रखना आवश्यक होता है। पीताम्बरा पाठ — बगलामुखी स्तोत्रों का पाठ — ग्रहण के दौरान किया जाने वाला एक शक्तिशाली सुरक्षात्मक अनुष्ठान है जो राहु और केतु के नकारात्मक ज्योतिषीय प्रभावों को निष्क्रिय करने में सहायक माना जाता है।
अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
सूर्य ग्रहण पूजा इस ब्रह्मांडीय रूप से संवेदनशील अवधि में राहु और केतु के दुष्प्रभावों से भक्त की रक्षा करती है। प्रयागराज संगम जैसे पवित्र संगम स्थलों पर सूर्य ग्रहण के दौरान स्नान सामान्य तीर्थयात्रा से लाखों गुना अधिक पुण्यदायी माना जाता है। ग्रहण काल में अन्न, वस्त्र और स्वर्ण का दान कर्मिक लाभ को कई गुना बढ़ा देता है। पीताम्बरा पाठ शत्रुओं, कानूनी बाधाओं और ग्रह-दोषों को दूर करने में सहायक है। राहु या केतु महादशा में जन्मे जातकों को इस पूजा से विशेष लाभ मिलता है।
चरण-दर-चरण विधि
ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक का पालन करें: पूर्ण उपवास रखें, भोजन न पकाएं, यथासंभव मौन रहें और सभी संग्रहीत खाद्य-जल में तुलसी के पत्ते रखें। ग्रहण के आरंभ से पीताम्बरा पाठ (बगलामुखी स्तोत्र) या सूर्य मंत्र का जाप करें — "ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः"। मोक्ष के क्षण पर — जब ग्रहण समाप्त हो और सूर्य पूर्णतः मुक्त हो जाए — पवित्र स्नान करें। आदर्श रूप से नदी या पवित्र कुंड पर; अन्यथा घर पर गंगाजल मिश्रित जल से सूर्याष्टकम का जाप करते हुए स्नान करें। स्नान के बाद सूर्य मंत्रों के साथ सूर्य को अर्घ्य दें। मोक्ष के तुरंत बाद किसी ब्राह्मण या गरीब को अन्न, तिल, तांबे का पात्र, लाल वस्त्र और गुड़ का दान करें।
शुभ मुहूर्त
यह पूजा विशेष रूप से सूर्य ग्रहण के दिन ही की जाती है। मंत्र जाप के लिए ग्रहण मध्य सबसे शक्तिशाली क्षण होता है, और पवित्र स्नान एवं दान के लिए मोक्ष का समय। भारत में दृश्यमान सूर्य ग्रहण — विशेष रूप से अश्विन, कार्तिक या चैत्र अमावस्या के दौरान — प्रयागराज संगम, हरिद्वार, वाराणसी, कुरुक्षेत्र और नासिक त्र्यंबकेश्वर में लाखों तीर्थयात्रियों को आकर्षित करते हैं।
आवश्यक सामग्री
- ·तुलसी के पत्ते (सूतक में खाद्य-जल शुद्धि के लिए)
- ·बगलामुखी / पीताम्बरा स्तोत्र पाठ
- ·सूर्याष्टकम पाठ
- ·रुद्राक्ष या तांबे की जप माला
- ·गंगाजल
- ·तांबे का पात्र (अर्घ्य के लिए)
- ·लाल वस्त्र
- ·तिल
- ·गुड़
- ·अगरबत्ती
- ·कपूर
- ·लाल फूल
- ·नारियल
सामान्य प्रश्न
प्र.सूर्य ग्रहण पूजा क्या है?
सूर्य ग्रहण पूजा में वे सभी वैदिक अनुष्ठान सम्मिलित हैं जो सूर्य ग्रहण के दौरान सूतक काल के आरंभ से लेकर मोक्ष तक किए जाते हैं। सूर्य ग्रहण एक अत्यंत शक्तिशाली परंतु अशुभ खगोलीय घटना मानी जाती है जो ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं को अस्त-व्यस्त करती है। गृहस्थो...
प्र.सूर्य ग्रहण पूजा के क्या लाभ हैं?
सूर्य ग्रहण पूजा इस ब्रह्मांडीय रूप से संवेदनशील अवधि में राहु और केतु के दुष्प्रभावों से भक्त की रक्षा करती है। प्रयागराज संगम जैसे पवित्र संगम स्थलों पर सूर्य ग्रहण के दौरान स्नान सामान्य तीर्थयात्रा से लाखों गुना अधिक पुण्यदायी माना जाता है। ग्रहण काल में अन्न, वस्त्र और स्वर्ण का दान कर्मिक लाभ को कई गुना बढ़ा देता है। पीताम्बरा पाठ शत्रुओं, कानूनी बाधाओं और ग्रह-दोषों को दूर करने में सहायक है। राहु या केतु महादशा में जन्मे जातकों को इस पूजा से विशेष लाभ मिलता है।
प्र.सूर्य ग्रहण पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
यह पूजा विशेष रूप से सूर्य ग्रहण के दिन ही की जाती है। मंत्र जाप के लिए ग्रहण मध्य सबसे शक्तिशाली क्षण होता है, और पवित्र स्नान एवं दान के लिए मोक्ष का समय। भारत में दृश्यमान सूर्य ग्रहण — विशेष रूप से अश्विन, कार्तिक या चैत्र अमावस्या के दौरान — प्रयागराज संगम, हरिद्वार, वाराणसी, कुरुक्षेत्र और नासिक त्र्यंबकेश्वर में लाखों तीर्थयात्रियों को आकर्षित करते हैं।
प्र.सूर्य ग्रहण पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
तुलसी के पत्ते (सूतक में खाद्य-जल शुद्धि के लिए), बगलामुखी / पीताम्बरा स्तोत्र पाठ, सूर्याष्टकम पाठ, रुद्राक्ष या तांबे की जप माला, गंगाजल, तांबे का पात्र (अर्घ्य के लिए), लाल वस्त्र, तिल, गुड़, अगरबत्ती, कपूर, लाल फूल, नारियल।