भगवान सूर्य (सूर्य देव) — पूजा विधि
सूर्य अर्घ्य पूजा विधि
सूर्य अर्घ्य पूजा की संपूर्ण चरण दर चरण विधि। घर पर या मंदिर में सूर्य अर्घ्य पूजा करने की सही वैदिक विधि।
अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
सूर्य अर्घ्य पूजा — चरण दर चरण विधि
- 1
सूर्योदय से पहले उठें और स्नान करें।
- 2
स्वच्छ ताम्र लोटे में शुद्ध जल भरें।
- 3
जल में लाल चंदन, लाल फूल और अक्षत मिलाएं।
- 4
पूर्व दिशा में उगते सूर्य की ओर मुख करें।
- 5
दोनों हाथों से ताम्र पात्र सिर के ऊपर उठाएं और जल की पतली धार से अर्घ्य दें ताकि जल की धार में इंद्रधनुष बने।
- 6
अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्र का जाप करें।
- 7
तीन से सात बार अर्घ्य दें।
- 8
इसके बाद सूर्य नमस्कार करें।
सूर्य अर्घ्य पूजा के महत्वपूर्ण नियम
• पूजा से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
• पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।
• पूजा के दौरान मोबाइल और अन्य विकर्षण दूर रखें।
• मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मुख्य अनुष्ठान में भाग न लें।
• एकाग्र और भक्तिपूर्ण मन से पूजा करें।
• एक बार शुरू की गई पूजा अधूरी न छोड़ें।
सूर्य अर्घ्य पूजा के लाभ
दृष्टि और नेत्र स्वास्थ्य सुधरता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता और शारीरिक शक्ति बढ़ती है, त्वचा रोग और रक्त विकार दूर होते हैं, मानसिक स्पष्टता और तीक्ष्ण बुद्धि मिलती है, जन्म कुंडली में कमजोर सूर्य के दुष्प्रभाव समाप्त होते हैं और समाज में सम्मान एवं प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।
FAQ — सूर्य अर्घ्य पूजा विधि
प्र.क्या सूर्य अर्घ्य पूजा घर पर की जा सकती है?
हाँ, सूर्य अर्घ्य पूजा घर पर की जा सकती है।
प्र.सूर्य अर्घ्य पूजा में कितना समय लगता है?
सूर्य अर्घ्य पूजा में सामान्यतः 15–30 मिनट का समय लगता है।
प्र.क्या सूर्य अर्घ्य पूजा के लिए पंडित जरूरी है?
सूर्य अर्घ्य पूजा परिवार के मुखिया द्वारा की जा सकती है, लेकिन जटिल अनुष्ठानों के लिए अनुभवी पंडित की सहायता लेना उचित है।
प्र.सूर्य अर्घ्य पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
सूर्योदय के समय (ब्रह्म मुहूर्त या तुरंत बाद) दैनिक रूप से आदर्श है। रथ सप्तमी, मकर संक्रांति और छठ पूजा (संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य) वार्षिक महापर्व हैं। रविवार की सुबह विशेष सौर ऊर्जा वाली होती है।