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वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना

अन्य पूजाएं — वैदिक पूजा विधि

सूर्य अर्घ्य पूजा

देवता भगवान सूर्य (सूर्य देव)
अवधि 15–30 मिनट
श्रेणी अन्य पूजाएं

संक्षिप्त परिचय

सूर्य अर्घ्य पूजा उगते सूर्य को जल (अर्घ्य) अर्पित करने का प्राचीन वैदिक अनुष्ठान है — हिंदू धर्म में सबसे प्राचीन और सर्वव्यापी दैनिक क्रियाओं में से एक। ताम्र पात्र से दोनों हाथों से सूर्य की दिशा में जल अर्पित करते समय प्रकाश का एक इंद्रधनुषी चाप बनता है जो प्रार्थनाओं को सूर्य देव तक पहुँचाता है। यह प्रथा ऋग्वेद में गहराई से निहित है और छठ पूजा तथा संध्यावंदनम से भी जुड़ी है।

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

दृष्टि और नेत्र स्वास्थ्य सुधरता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता और शारीरिक शक्ति बढ़ती है, त्वचा रोग और रक्त विकार दूर होते हैं, मानसिक स्पष्टता और तीक्ष्ण बुद्धि मिलती है, जन्म कुंडली में कमजोर सूर्य के दुष्प्रभाव समाप्त होते हैं और समाज में सम्मान एवं प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।

चरण-दर-चरण विधि

सूर्योदय से पहले उठें और स्नान करें। स्वच्छ ताम्र लोटे में शुद्ध जल भरें। जल में लाल चंदन, लाल फूल और अक्षत मिलाएं। पूर्व दिशा में उगते सूर्य की ओर मुख करें। दोनों हाथों से ताम्र पात्र सिर के ऊपर उठाएं और जल की पतली धार से अर्घ्य दें ताकि जल की धार में इंद्रधनुष बने। अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्र का जाप करें। तीन से सात बार अर्घ्य दें। इसके बाद सूर्य नमस्कार करें।

शुभ मुहूर्त

सूर्योदय के समय (ब्रह्म मुहूर्त या तुरंत बाद) दैनिक रूप से आदर्श है। रथ सप्तमी, मकर संक्रांति और छठ पूजा (संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य) वार्षिक महापर्व हैं। रविवार की सुबह विशेष सौर ऊर्जा वाली होती है।

आवश्यक सामग्री

  • ·ताम्र लोटा (जल पात्र)
  • ·शुद्ध जल
  • ·लाल चंदन
  • ·लाल फूल (गुड़हल या गुलाब की पंखुड़ियाँ)
  • ·अक्षत
  • ·लाल कपड़ा
  • ·अगरबत्ती
  • ·कपूर
  • ·कुमकुम

सामान्य प्रश्न

प्र.सूर्य अर्घ्य पूजा क्या है?

सूर्य अर्घ्य पूजा उगते सूर्य को जल (अर्घ्य) अर्पित करने का प्राचीन वैदिक अनुष्ठान है — हिंदू धर्म में सबसे प्राचीन और सर्वव्यापी दैनिक क्रियाओं में से एक। ताम्र पात्र से दोनों हाथों से सूर्य की दिशा में जल अर्पित करते समय प्रकाश का एक इंद्रधनुषी चाप ...

प्र.सूर्य अर्घ्य पूजा के क्या लाभ हैं?

दृष्टि और नेत्र स्वास्थ्य सुधरता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता और शारीरिक शक्ति बढ़ती है, त्वचा रोग और रक्त विकार दूर होते हैं, मानसिक स्पष्टता और तीक्ष्ण बुद्धि मिलती है, जन्म कुंडली में कमजोर सूर्य के दुष्प्रभाव समाप्त होते हैं और समाज में सम्मान एवं प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।

प्र.सूर्य अर्घ्य पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

सूर्योदय के समय (ब्रह्म मुहूर्त या तुरंत बाद) दैनिक रूप से आदर्श है। रथ सप्तमी, मकर संक्रांति और छठ पूजा (संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य) वार्षिक महापर्व हैं। रविवार की सुबह विशेष सौर ऊर्जा वाली होती है।

प्र.सूर्य अर्घ्य पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

ताम्र लोटा (जल पात्र), शुद्ध जल, लाल चंदन, लाल फूल (गुड़हल या गुलाब की पंखुड़ियाँ), अक्षत, लाल कपड़ा, अगरबत्ती, कपूर, कुमकुम।

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