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अन्य पूजाएं — वैदिक पूजा विधि

श्राद्ध पूजा

देवता पितृ देवता (पूर्वज आत्माएं)
अवधि 2–3 घंटे
श्रेणी अन्य पूजाएं

संक्षिप्त परिचय

श्राद्ध पूजा एक पवित्र वैदिक अनुष्ठान है जो दिवंगत पूर्वजों (पितरों) को सम्मान देने और परलोक में उनकी शांति और मुक्ति सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। संस्कृत शब्द "श्रत्" (श्रद्धा/सत्य) से व्युत्पन्न, श्राद्ध में तर्पण (जल अर्पण), पिंड दान (चावल के पिंड का अर्पण) और ब्राह्मणों तथा कौओं को भोजन कराना शामिल है। माना जाता है कि पितृ पक्ष पखवाड़े के दौरान पूर्वज पृथ्वी पर आते हैं और श्राद्ध अनुष्ठान उन्हें संतुष्ट करता है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

पूर्वज आत्माओं को कर्मिक ऋणों से मुक्त करता है और उन्हें मोक्ष देता है, परिवार की कुंडली से पितृ दोष दूर होता है, जीवित वंशजों को शांति और समृद्धि मिलती है, पितृ शाप से सुरक्षा मिलती है, और परिवार की संतान, स्वास्थ्य तथा भाग्य में सुधार होता है।

चरण-दर-चरण विधि

अनुष्ठान स्नान करें और स्वच्छ सफेद या अखंड वस्त्र पहनें। दक्षिण दिशा (पितरों की दिशा) की ओर मुख करें। तर्पण करें — पानी में तिल मिलाएं और पूर्वजों के नाम का उच्चारण करते हुए तीन बार दक्षिण दिशा में जल अर्पित करें। पिंड (पके चावल में तिल और शहद मिलाकर) तैयार करें और कुश घास पर अर्पित करें। स्वयं खाने से पहले कौओं, गायों और कुत्तों को भोजन कराएं। ब्राह्मण को आमंत्रित करके भोजन कराएं।

शुभ मुहूर्त

पूर्वज की मृत्यु तिथि पर, या पितृ पक्ष (भाद्रपद/आश्विन में 16 दिन) के किसी भी दिन। श्राद्ध के लिए कुतप मुहूर्त (मध्याह्न) सबसे शुभ है।

आवश्यक सामग्री

  • ·कुश घास
  • ·काले तिल
  • ·चावल
  • ·जौ का आटा
  • ·शहद
  • ·गाय का दूध
  • ·घी
  • ·सफेद फूल
  • ·अगरबत्ती
  • ·तर्पण के लिए तांबे का पात्र
  • ·काला कपड़ा
  • ·ब्राह्मण और कौओं के लिए भोजन

सामान्य प्रश्न

प्र.श्राद्ध पूजा क्या है?

श्राद्ध पूजा एक पवित्र वैदिक अनुष्ठान है जो दिवंगत पूर्वजों (पितरों) को सम्मान देने और परलोक में उनकी शांति और मुक्ति सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। संस्कृत शब्द "श्रत्" (श्रद्धा/सत्य) से व्युत्पन्न, श्राद्ध में तर्पण (जल अर्पण), पिंड दान (चावल ...

प्र.श्राद्ध पूजा के क्या लाभ हैं?

पूर्वज आत्माओं को कर्मिक ऋणों से मुक्त करता है और उन्हें मोक्ष देता है, परिवार की कुंडली से पितृ दोष दूर होता है, जीवित वंशजों को शांति और समृद्धि मिलती है, पितृ शाप से सुरक्षा मिलती है, और परिवार की संतान, स्वास्थ्य तथा भाग्य में सुधार होता है।

प्र.श्राद्ध पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

पूर्वज की मृत्यु तिथि पर, या पितृ पक्ष (भाद्रपद/आश्विन में 16 दिन) के किसी भी दिन। श्राद्ध के लिए कुतप मुहूर्त (मध्याह्न) सबसे शुभ है।

प्र.श्राद्ध पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

कुश घास, काले तिल, चावल, जौ का आटा, शहद, गाय का दूध, घी, सफेद फूल, अगरबत्ती, तर्पण के लिए तांबे का पात्र, काला कपड़ा, ब्राह्मण और कौओं के लिए भोजन।

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