अन्य पूजाएं — वैदिक पूजा विधि
रक्षा बंधन पूजा
संक्षिप्त परिचय
रक्षा बंधन पूजा श्रावण पूर्णिमा (जुलाई-अगस्त) के पर्व के केंद्र में है। इसमें बहन अपने भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बाँधती है — प्रेम, सुरक्षा और अटूट बंधन का प्रतीक। "रक्षा बंधन" का शाब्दिक अर्थ है "सुरक्षा का बंधन।" पूजा में राखी, कुमकुम, अक्षत, दीपक और मिठाई से सजी थाली तैयार कर भाई के माथे पर तिलक लगाना, आरती करना और राखी बाँधना शामिल है।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
लाभ
भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के बंधन को मजबूत करता है, भाई की दीर्घायु, स्वास्थ्य और सफलता के लिए दैवीय आशीर्वाद प्राप्त होता है, बहन की प्रार्थनाएं साल भर भाई के चारों ओर एक सुरक्षा कवच का काम करती हैं और पारिवारिक प्रेम एवं दायित्व के पवित्र बंधन का नवीनीकरण होता है।
चरण-दर-चरण विधि
रक्षा बंधन की सुबह बहन स्नान करके पूजा की थाली सजाए। थाली में राखी, जला हुआ दीपक, कुमकुम, अक्षत, मिठाई और सूखा नारियल रखें। भाई पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुँह करके बैठे। बहन माथे पर कुमकुम का तिलक लगाए, अक्षत रखे, दीपक से तीन बार आरती करे, फिर मंत्र पढ़ते हुए दाहिनी कलाई पर राखी बाँधे। भाई उपहार और रक्षा का वचन दे। बड़ों का आशीर्वाद लेकर मिठाई बाँटकर समारोह पूर्ण करें।
शुभ मुहूर्त
श्रावण पूर्णिमा (जुलाई-अगस्त)। पूजा पूर्णिमा के दिन अपराह्न या प्रदोष मुहूर्त में करनी चाहिए। भद्रा काल से बचना चाहिए — शुभ मुहूर्त के लिए पंचांग देखें।
आवश्यक सामग्री
- ·राखी धागा
- ·पूजा की थाली
- ·कुमकुम
- ·अक्षत
- ·छोटा मिट्टी या पीतल का दीपक
- ·दीपक के लिए घी या सरसों का तेल
- ·मिठाई
- ·सूखा नारियल
- ·अगरबत्ती
- ·पीली हल्दी का लेप
- ·फूल
सामान्य प्रश्न
प्र.रक्षा बंधन पूजा क्या है?
रक्षा बंधन पूजा श्रावण पूर्णिमा (जुलाई-अगस्त) के पर्व के केंद्र में है। इसमें बहन अपने भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बाँधती है — प्रेम, सुरक्षा और अटूट बंधन का प्रतीक। "रक्षा बंधन" का शाब्दिक अर्थ है "सुरक्षा का बंधन।" पूजा में राखी, कुमकुम, अक्षत, दीपक...
प्र.रक्षा बंधन पूजा के क्या लाभ हैं?
भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के बंधन को मजबूत करता है, भाई की दीर्घायु, स्वास्थ्य और सफलता के लिए दैवीय आशीर्वाद प्राप्त होता है, बहन की प्रार्थनाएं साल भर भाई के चारों ओर एक सुरक्षा कवच का काम करती हैं और पारिवारिक प्रेम एवं दायित्व के पवित्र बंधन का नवीनीकरण होता है।
प्र.रक्षा बंधन पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
श्रावण पूर्णिमा (जुलाई-अगस्त)। पूजा पूर्णिमा के दिन अपराह्न या प्रदोष मुहूर्त में करनी चाहिए। भद्रा काल से बचना चाहिए — शुभ मुहूर्त के लिए पंचांग देखें।
प्र.रक्षा बंधन पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?
राखी धागा, पूजा की थाली, कुमकुम, अक्षत, छोटा मिट्टी या पीतल का दीपक, दीपक के लिए घी या सरसों का तेल, मिठाई, सूखा नारियल, अगरबत्ती, पीली हल्दी का लेप, फूल।