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अन्य पूजाएं — वैदिक पूजा विधि

पितृ पक्ष पूजा

देवता पितृ देवता एवं यमराज
अवधि 16 दिन (प्रतिदिन 2–3 घंटे)
श्रेणी अन्य पूजाएं

संक्षिप्त परिचय

पितृ पक्ष पूजा एक व्यापक 16-दिवसीय पूर्वज पूजा अनुष्ठान है जो पितृ पक्ष पखवाड़े (भाद्रपद/आश्विन की कृष्ण पक्ष) के दौरान किया जाता है। यह हिंदू कैलेंडर में कई पीढ़ियों के सभी दिवंगत पूर्वजों को सम्मान देने का सबसे पवित्र काल है। पखवाड़े का प्रत्येक दिन एक विशिष्ट चंद्र तिथि से मेल खाता है, और पूर्वज की मृत्यु तिथि से मेल खाने वाली तिथि पर श्राद्ध किया जाता है। अंतिम दिन महालया अमावस्या (सर्व पितृ अमावस्या) सबसे शक्तिशाली होती है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लाभ

स्वास्थ्य, विवाह और संतान को प्रभावित करने वाला गहरा पितृ दोष दूर होता है, पीढ़ियों में सभी पूर्वज आत्माओं की मुक्ति होती है, असंतुष्ट पूर्वजों के कारण आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, परिवार में दीर्घकालिक समृद्धि और सद्भाव आता है, और भक्त को अपार पुण्य की प्राप्ति होती है।

चरण-दर-चरण विधि

पितृ पक्ष के पहले दिन संकल्प से शुरू करें। प्रतिदिन दक्षिण दिशा में तिल-जल अर्पित करके तर्पण करें। प्रत्येक पूर्वज की मृत्यु तिथि से मेल खाने वाली तिथि पर पिंड दान के साथ पूर्ण श्राद्ध करें। प्रतिदिन कौओं, गायों, कुत्तों और ब्राह्मणों को भोजन कराएं। दिवंगतों के नाम पर वस्त्र, भोजन और आवश्यक वस्तुएं दान करें। महालया अमावस्या पर सभी पूर्वजों के लिए एक साथ सर्व पितृ श्राद्ध करें।

शुभ मुहूर्त

पूरा पितृ पक्ष पखवाड़ा (भाद्रपद/आश्विन में 16 दिन)। महालया अमावस्या सबसे शुभ दिन है। कुतप मुहूर्त (दोपहर के आसपास) प्रतिदिन के लिए आदर्श है।

आवश्यक सामग्री

  • ·कुश घास
  • ·काले तिल
  • ·चावल और जौ
  • ·शहद और घी
  • ·तांबे का पात्र
  • ·सफेद और काला कपड़ा
  • ·जनेऊ
  • ·पिंड सामग्री
  • ·ब्राह्मणों के लिए भोजन
  • ·अगरबत्ती और कपूर
  • ·सफेद फूल
  • ·दान (दक्षिणा)

सामान्य प्रश्न

प्र.पितृ पक्ष पूजा क्या है?

पितृ पक्ष पूजा एक व्यापक 16-दिवसीय पूर्वज पूजा अनुष्ठान है जो पितृ पक्ष पखवाड़े (भाद्रपद/आश्विन की कृष्ण पक्ष) के दौरान किया जाता है। यह हिंदू कैलेंडर में कई पीढ़ियों के सभी दिवंगत पूर्वजों को सम्मान देने का सबसे पवित्र काल है। पखवाड़े का प्रत्येक दि...

प्र.पितृ पक्ष पूजा के क्या लाभ हैं?

स्वास्थ्य, विवाह और संतान को प्रभावित करने वाला गहरा पितृ दोष दूर होता है, पीढ़ियों में सभी पूर्वज आत्माओं की मुक्ति होती है, असंतुष्ट पूर्वजों के कारण आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, परिवार में दीर्घकालिक समृद्धि और सद्भाव आता है, और भक्त को अपार पुण्य की प्राप्ति होती है।

प्र.पितृ पक्ष पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

पूरा पितृ पक्ष पखवाड़ा (भाद्रपद/आश्विन में 16 दिन)। महालया अमावस्या सबसे शुभ दिन है। कुतप मुहूर्त (दोपहर के आसपास) प्रतिदिन के लिए आदर्श है।

प्र.पितृ पक्ष पूजा के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?

कुश घास, काले तिल, चावल और जौ, शहद और घी, तांबे का पात्र, सफेद और काला कपड़ा, जनेऊ, पिंड सामग्री, ब्राह्मणों के लिए भोजन, अगरबत्ती और कपूर, सफेद फूल, दान (दक्षिणा)।

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